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मेला पंडाल में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित
Updated Wed, 18 Apr 2018 12:28 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। नगरपालिका परिषद के तत्वावधान में चल रहे श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मेला पंडाल में सोमवार की रात्रि अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें दिल्ली, मध्य प्रदेश, कानपुर, बिहार, लखनऊ, मुरादाबाद और सहारनपुर के कवियों ने अपनी उम्दा रचनाओं से श्रोताओं की देर रात्रि तक वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम का शुभारंभ क्रांति सिंह, विकास त्यागी व पंकज त्यागी ने संयुक्त रूप से नारियल तोड़कर किया। मंच उद्घाटन व्यापारी नेता अजय सिंघल, माल्यार्पण राकेश गांगुली, दीप प्रज्ज्वलित मनमोहन सिंह गर्ग और धर्म ध्वज की स्थापना अरविंद बंसल ने किया। सहारनपुर के कवि मोहित संगम ने कहा कि दुनिया अगर मूरत है तो हम उसके निर्माता हैं, बाकी होंगे देश यहां भारत तो माता है। लखनऊ के वीर रस कवि प्रख्यात मिश्रा ने राम मंदिर और कश्मीर मुद्दे पर काव्य पाठ कर श्रोताओं में जोश भर दिया। मुरादाबाद की कवयित्री निवेदिता नाज ने गीत गजल सुनाकर दर्शकों का मन मोह लिया। बहजोई के सौरभकांत शर्मा ने कहा पतित जो हो नहीं जाए कहीं इतिहास ये अपना, मुस्कुराके उठा लाए हाथों में सिंधोरे को। दिल्ली की मोनिका देहलवी ने कहा प्यार से चूमना चाहत का मजा आता था, हर घड़ी तेरी मुहब्बत का मजा आता था, दूर परदेश में रहकर ये समझ आया मां तेरी बांहों में तो जन्नत का मजा आता था। हास्य कवि प्रताप फौजदार ने अपनी हास्य शैली से दर्शकों को बांधे रखा। उन्होंने कहा ऐलोसी वैलोसी कुछ नहीं, खुला रूट दो सेना को, जब चाहे जैसे मारे ये खुली छूट दो सेना को, आतंकवाद न मिट जाए तो मेरी मूछ मूड लेना, दूरबीन हाथ में दे दूंगा फिर पाकिस्तान ढूंढ लेना। इनके अलावा मध्य प्रदेश के शशिकांत यादव, बिहार के शम्मू शिखर और कानपुर के रूपेश सक्सेना ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर संयोजक नितिन गुप्ता, चौधरी राजपाल सिंह, ईशान गौड, बालेंद्र सिंह, अशोक गुप्ता, विपिन भारतीय, महेंद्र सैनी, अंशुल वर्मा, शुभम गर्ग, राजपाल रविवंशी, विकास चौधरी, सचिन शर्मा, प्रदीप सिंघल, कुलदीप सैनी, अभिषेक त्यागी, अनुज गर्ग आदि रहे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ क्रांति सिंह, विकास त्यागी व पंकज त्यागी ने संयुक्त रूप से नारियल तोड़कर किया। मंच उद्घाटन व्यापारी नेता अजय सिंघल, माल्यार्पण राकेश गांगुली, दीप प्रज्ज्वलित मनमोहन सिंह गर्ग और धर्म ध्वज की स्थापना अरविंद बंसल ने किया। सहारनपुर के कवि मोहित संगम ने कहा कि दुनिया अगर मूरत है तो हम उसके निर्माता हैं, बाकी होंगे देश यहां भारत तो माता है। लखनऊ के वीर रस कवि प्रख्यात मिश्रा ने राम मंदिर और कश्मीर मुद्दे पर काव्य पाठ कर श्रोताओं में जोश भर दिया। मुरादाबाद की कवयित्री निवेदिता नाज ने गीत गजल सुनाकर दर्शकों का मन मोह लिया। बहजोई के सौरभकांत शर्मा ने कहा पतित जो हो नहीं जाए कहीं इतिहास ये अपना, मुस्कुराके उठा लाए हाथों में सिंधोरे को। दिल्ली की मोनिका देहलवी ने कहा प्यार से चूमना चाहत का मजा आता था, हर घड़ी तेरी मुहब्बत का मजा आता था, दूर परदेश में रहकर ये समझ आया मां तेरी बांहों में तो जन्नत का मजा आता था। हास्य कवि प्रताप फौजदार ने अपनी हास्य शैली से दर्शकों को बांधे रखा। उन्होंने कहा ऐलोसी वैलोसी कुछ नहीं, खुला रूट दो सेना को, जब चाहे जैसे मारे ये खुली छूट दो सेना को, आतंकवाद न मिट जाए तो मेरी मूछ मूड लेना, दूरबीन हाथ में दे दूंगा फिर पाकिस्तान ढूंढ लेना। इनके अलावा मध्य प्रदेश के शशिकांत यादव, बिहार के शम्मू शिखर और कानपुर के रूपेश सक्सेना ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर संयोजक नितिन गुप्ता, चौधरी राजपाल सिंह, ईशान गौड, बालेंद्र सिंह, अशोक गुप्ता, विपिन भारतीय, महेंद्र सैनी, अंशुल वर्मा, शुभम गर्ग, राजपाल रविवंशी, विकास चौधरी, सचिन शर्मा, प्रदीप सिंघल, कुलदीप सैनी, अभिषेक त्यागी, अनुज गर्ग आदि रहे।
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