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फासला हमको मिटाना चाहिए...
Updated Sun, 17 Sep 2017 01:31 AM IST
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फासला हमको मिटाना चाहिए...
सहारनपुर। आज की शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम में शायरों और कवियों ने अपने उम्दा कलाम पेश कर उपस्थित जनसमूह की वाहवाही लूटी।
जनमंच सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा नेता सुनील शर्मा और कांग्रेस नेता मुकेश चौधरी ने संयुक्त रूप से किया। शमा रोशन कारी लियाकत अली कासमी, जितेंद्र जैन, इलियास त्यागी, सुनील शर्मा, सुरेंद्र अरोडा, मुनव्वर आफताब ने रोशन की। कवि नरेंद्र मस्ताना ने अपनी रचना पढी कि आजाद हुए हम कैसे, यह नहीं किसी ने जाना। सीने पर गोली खाई, तब जाकर मिला मुस्काना, पढ़कर तालियां बटोरीं। महमूद असर ने पढा कि, बात इंसान के किरदार की होती है मियां, वरना पैसा तो तवायफ भी कमा लेती है। कार्यक्रम में सभी शायरों कवियों और गायकों को शॉल और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। आसिफ निगार, मंसूर राणा, डॉ. आजाद अजीम सहारनपुरी, आदि ने भी अपनी रचनाएं पेश की। अध्यक्षता सलीम चौधरी और मुख्य अतिथि असद अजमेरी रहे। आसिफ निगार, मंसूर राणा, डॉ. आजाद अजीम सहारनपुरी, महमूद असर, बरकत होलट, फराज अहमद फराज, लईक अहमद, अमजद अजीम, आबिद हसन वफा, सदाकत राही, कृष्ण शलभ, डॉ. सारस बलवंत, हरिराम पथिक, योगेंद्र पाल दत्त, विनोद धरम आदि ने भी रचनाएं पढ़ी।
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सहारनपुर। आज की शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम में शायरों और कवियों ने अपने उम्दा कलाम पेश कर उपस्थित जनसमूह की वाहवाही लूटी।
जनमंच सभागार में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा नेता सुनील शर्मा और कांग्रेस नेता मुकेश चौधरी ने संयुक्त रूप से किया। शमा रोशन कारी लियाकत अली कासमी, जितेंद्र जैन, इलियास त्यागी, सुनील शर्मा, सुरेंद्र अरोडा, मुनव्वर आफताब ने रोशन की। कवि नरेंद्र मस्ताना ने अपनी रचना पढी कि आजाद हुए हम कैसे, यह नहीं किसी ने जाना। सीने पर गोली खाई, तब जाकर मिला मुस्काना, पढ़कर तालियां बटोरीं। महमूद असर ने पढा कि, बात इंसान के किरदार की होती है मियां, वरना पैसा तो तवायफ भी कमा लेती है। कार्यक्रम में सभी शायरों कवियों और गायकों को शॉल और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। आसिफ निगार, मंसूर राणा, डॉ. आजाद अजीम सहारनपुरी, आदि ने भी अपनी रचनाएं पेश की। अध्यक्षता सलीम चौधरी और मुख्य अतिथि असद अजमेरी रहे। आसिफ निगार, मंसूर राणा, डॉ. आजाद अजीम सहारनपुरी, महमूद असर, बरकत होलट, फराज अहमद फराज, लईक अहमद, अमजद अजीम, आबिद हसन वफा, सदाकत राही, कृष्ण शलभ, डॉ. सारस बलवंत, हरिराम पथिक, योगेंद्र पाल दत्त, विनोद धरम आदि ने भी रचनाएं पढ़ी।