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मसला शिया-सुन्नी का नहीं बल्कि हलाल और हराम का है: मदनी
Updated Sat, 09 Jun 2018 12:12 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने शिया-सुन्नी विवाद पर कहा कि यह मसला शिया-सुन्नी का नहीं बल्कि हलाल और हराम का है। हराम खाना किसी भी ऐतबार से जायज नहीं है, लेकिन अगर हलाल हो तो उसे खाने में कोई ऐतराज नहीं है।
शुक्रवार को मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मैं शियाओं के साथ बैठकर खाना खाता हूं, मुझे कोई ऐतराज नहीं है। जिस तरह का विवाद खड़ा किया जा रहा है उससे इतना तो साफ है कि यह शिया-सुन्नी का नहीं बल्कि हलाल और हराम का मसला है। जिसे शिया सुन्नी इख्तलाफ (विवाद) से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हलाल खाना शियाओं का हो, सुन्नियों का हो या फिर बिरादरान-ए-वतन (हिंदू भाईयों) के यहां का हो तो उसे खाने में कोई ऐतराज नहीं है। शिया सुन्नी मसले पर दारुल उलूम से लिए गए फतवे पर मदनी ने कहा कि रमजान में अखबार नहीं पढ़ते। बस इतनी बात सामने आई है कि कोई फतवा जारी हुआ है, लेकिन मुझे इल्म (जानकारी) नहीं कि यह फतवा दारुल उलूम से जारी हुआ या फिर कहीं और से। मौलाना मदनी ने कहा कि एक जमाने में शियाओं के खिलाफ ये अफवाह फैलाई गई थी कि शिया खाने और पानी में थूक देते हैं। अगर इस अफवाह की बुनियाद पर फतवा दिया है तो मेरा यह कहना है कि अगर ये काम सुन्नी कर रहे हैं तो उनका यहां खाना हराम है। शियाओं को भी वहां नहीं खाना चाहिए। बल्कि मैं तो इससे आगे जाकर कहूंगा कि अगर सगा भाई भी इस तरह का अमल करे तो वहां खाना नहीं चाहिए। मदनी ने जोर देते हुए कहा कि ये शिया सुन्नी का मसला नहीं बल्कि जान बूझकर किया जा रहा है। जो सही नहीं है।
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शुक्रवार को मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मैं शियाओं के साथ बैठकर खाना खाता हूं, मुझे कोई ऐतराज नहीं है। जिस तरह का विवाद खड़ा किया जा रहा है उससे इतना तो साफ है कि यह शिया-सुन्नी का नहीं बल्कि हलाल और हराम का मसला है। जिसे शिया सुन्नी इख्तलाफ (विवाद) से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हलाल खाना शियाओं का हो, सुन्नियों का हो या फिर बिरादरान-ए-वतन (हिंदू भाईयों) के यहां का हो तो उसे खाने में कोई ऐतराज नहीं है। शिया सुन्नी मसले पर दारुल उलूम से लिए गए फतवे पर मदनी ने कहा कि रमजान में अखबार नहीं पढ़ते। बस इतनी बात सामने आई है कि कोई फतवा जारी हुआ है, लेकिन मुझे इल्म (जानकारी) नहीं कि यह फतवा दारुल उलूम से जारी हुआ या फिर कहीं और से। मौलाना मदनी ने कहा कि एक जमाने में शियाओं के खिलाफ ये अफवाह फैलाई गई थी कि शिया खाने और पानी में थूक देते हैं। अगर इस अफवाह की बुनियाद पर फतवा दिया है तो मेरा यह कहना है कि अगर ये काम सुन्नी कर रहे हैं तो उनका यहां खाना हराम है। शियाओं को भी वहां नहीं खाना चाहिए। बल्कि मैं तो इससे आगे जाकर कहूंगा कि अगर सगा भाई भी इस तरह का अमल करे तो वहां खाना नहीं चाहिए। मदनी ने जोर देते हुए कहा कि ये शिया सुन्नी का मसला नहीं बल्कि जान बूझकर किया जा रहा है। जो सही नहीं है।
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