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निर्यातकों को जीएसटी से राहत और रिफंड नहीं मिलने से निराशा
Updated Fri, 02 Feb 2018 12:32 AM IST
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सहारनपुर। अपनी कारीगरी से दुनियाभर में लकड़ी की नक्काशी का डंका बजाने वाले वुडकार्विंग उद्योग से जुड़े निर्यातक इस बार के बजट के निराश हैं। सरकार ने हस्तशिल्प और इसके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किसी तरह का कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है। जबकि जीएसटी के बाद से अब तक वुडकार्विंग के निर्यातकों को टैक्स रिफंड नहीं मिल पाया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि इन उद्योगों के लिए बजट में घोषणा होगी।
सहारनपुर वुडकार्विंग मैन्युफ्रैक्चरिंग एक्सपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष परविंदर सिंह का कहना है कि एक्सपोर्ट को जीएसटी से फ्री किया जाना था। मगर, ऐसा नहीं हुआ। जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक निर्यातकों को रिफंड नहीं मिला है। हस्तशिल्प के निर्यातकों के पास सीमित कैपिटल आय है और वह पूरी तरह से फंस गई है। मगर, बजट में किसी तरह की राहत नहीं मिली। जीएसटी लागू होने के बाद लकड़ी उद्योग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। सबसे अहम बात यह है कि जीएसटी के दायरे में हजारों लकड़ी कारखाने आ गए हैं, ऐसे में कारोबार करने के लिए उन्हें सबसे पहले जीएसटी नंबर लेना पड़ा और लकड़ी पर टैक्स लगने के कारण चीजें मंहगी हो गईं। फिलहाल बजट में किसी तरह की राहत नहीं मिलने से वुडकॉर्विंग कारोबारी निराश्पा है। निर्यातक औसफ उर्फ गुड्डू का कहना है कि लकड़ी पर टैक्स लगने के कारण ना केवल उत्पादों पर इसका असर पड़ा। छोटे कारोबारियों को टैक्स के लिए माथापच्ची करनी पड़ रही है। सहारनपुर में करीब 25 हजार छोटे-बड़े कारखानों को टैक्स के दायरे में आने के कारण इनमें फौरी तौर पर ज्यादातर ने कामकाज ही बंद कर दिया था। ऐसे में बजट से उम्मीद थी, मगर उसने निराश किया। सहारनपुर वुडकॉर्विंग एसोसिएशन के अध्यक्ष शेख फैजान का कहना है कि इस वक्त क्रिसमस के लिए उत्पाद तैयार होना है। मगर जीएसटी लागू होने के कारण छोटे कारखाने बंदी के कगार पर आ गए। कैपिटल इनकम टैक्स रिफंड नहीं होने से फंसी है। बजट में टैक्स रिफंड में सहूलियत की उम्मीद थी। मगर हस्तशिल्प क्षेत्र को बजट से दूर रखा गया।
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सहारनपुर वुडकार्विंग मैन्युफ्रैक्चरिंग एक्सपोर्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष परविंदर सिंह का कहना है कि एक्सपोर्ट को जीएसटी से फ्री किया जाना था। मगर, ऐसा नहीं हुआ। जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक निर्यातकों को रिफंड नहीं मिला है। हस्तशिल्प के निर्यातकों के पास सीमित कैपिटल आय है और वह पूरी तरह से फंस गई है। मगर, बजट में किसी तरह की राहत नहीं मिली। जीएसटी लागू होने के बाद लकड़ी उद्योग का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। सबसे अहम बात यह है कि जीएसटी के दायरे में हजारों लकड़ी कारखाने आ गए हैं, ऐसे में कारोबार करने के लिए उन्हें सबसे पहले जीएसटी नंबर लेना पड़ा और लकड़ी पर टैक्स लगने के कारण चीजें मंहगी हो गईं। फिलहाल बजट में किसी तरह की राहत नहीं मिलने से वुडकॉर्विंग कारोबारी निराश्पा है। निर्यातक औसफ उर्फ गुड्डू का कहना है कि लकड़ी पर टैक्स लगने के कारण ना केवल उत्पादों पर इसका असर पड़ा। छोटे कारोबारियों को टैक्स के लिए माथापच्ची करनी पड़ रही है। सहारनपुर में करीब 25 हजार छोटे-बड़े कारखानों को टैक्स के दायरे में आने के कारण इनमें फौरी तौर पर ज्यादातर ने कामकाज ही बंद कर दिया था। ऐसे में बजट से उम्मीद थी, मगर उसने निराश किया। सहारनपुर वुडकॉर्विंग एसोसिएशन के अध्यक्ष शेख फैजान का कहना है कि इस वक्त क्रिसमस के लिए उत्पाद तैयार होना है। मगर जीएसटी लागू होने के कारण छोटे कारखाने बंदी के कगार पर आ गए। कैपिटल इनकम टैक्स रिफंड नहीं होने से फंसी है। बजट में टैक्स रिफंड में सहूलियत की उम्मीद थी। मगर हस्तशिल्प क्षेत्र को बजट से दूर रखा गया।
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