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बाल सहित्यकार कृष्ण शलभ के निधन से साहित्य प्रेमियों में शोक
Updated Wed, 01 Nov 2017 01:03 AM IST
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सहारनपुर। बाल साहित्यकार कृष्ण शलभ का मंगलवार दोपहर को निधन हो गया। वे दो दिन पहले एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उनके निधन से साहित्य प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके परिवार को सांत्वना देने के लिए उनके पैरामाउंट टयूलिप स्थित उनके आवास पर पहुंचे। उन्हें दिल्ली साहित्य अकादमी और उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने भी पुरस्कृत किया था।
नकुड़ में जन्मे कृष्ण शलभ को बाल्यकाल से ही कविताएं लिखने का शौक था। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने यूपी रोडवेज में नौकरी की। उनके बाल गीत संग्रह बचपन एक समंदर में 666 बाल कविताएं संग्रहीत हैं। इस संग्रह को दिल्ली साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला था। जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने उनको दिया था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से भी एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला था। उनकी पुस्तकों में टीली लीली झर, सूरज की चिट्ठी, नदी नहाती है, हम तो जिए कबीर सरीके मुख्य हैं। इसके अलावा उन्होंने करीब आधा दर्जन पुस्तकें संपादित की। वे वेस्ट यूपी के प्रतिष्ठित साहित्य संस्थान समन्वय के भी संस्थापक थे। उनके निधन पर अनेक साहित्यकारों ने शोक जताया है। इनमें विज्ञान व्रत, डॉ. अश्वघोष, डॉ. सुरेंद्र सिंघल, डॉ. आरपी सारस्वत, गीतकार राजेंद्र राजन, डॉ. वीरेंद्र आजम, मनीष कच्छल, सुरेश सपन, विनोद भृंग, बिजेंद्र पाल शर्मा, हरिराम, नरेंद्र मस्ताना, आदि रहे।
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नकुड़ में जन्मे कृष्ण शलभ को बाल्यकाल से ही कविताएं लिखने का शौक था। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने यूपी रोडवेज में नौकरी की। उनके बाल गीत संग्रह बचपन एक समंदर में 666 बाल कविताएं संग्रहीत हैं। इस संग्रह को दिल्ली साहित्य अकादमी का पुरस्कार मिला था। जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने उनको दिया था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से भी एक लाख रुपये का पुरस्कार मिला था। उनकी पुस्तकों में टीली लीली झर, सूरज की चिट्ठी, नदी नहाती है, हम तो जिए कबीर सरीके मुख्य हैं। इसके अलावा उन्होंने करीब आधा दर्जन पुस्तकें संपादित की। वे वेस्ट यूपी के प्रतिष्ठित साहित्य संस्थान समन्वय के भी संस्थापक थे। उनके निधन पर अनेक साहित्यकारों ने शोक जताया है। इनमें विज्ञान व्रत, डॉ. अश्वघोष, डॉ. सुरेंद्र सिंघल, डॉ. आरपी सारस्वत, गीतकार राजेंद्र राजन, डॉ. वीरेंद्र आजम, मनीष कच्छल, सुरेश सपन, विनोद भृंग, बिजेंद्र पाल शर्मा, हरिराम, नरेंद्र मस्ताना, आदि रहे।
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