{"_id":"59ab09894f1c1b11278b4f3b","slug":"71504381321-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ढोल-नगाड़ों के साथ नेजा संग लौटी 26 छड़ियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ढोल-नगाड़ों के साथ नेजा संग लौटी 26 छड़ियां
Updated Sun, 03 Sep 2017 01:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सहारनपुर। सांप्रदायिक एकता के प्रतीक बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज की शान में लगने वाला म्हाड़ी मेला सकुशल संपन्न हो गया। शनिवार को नेजा संग 26 छड़ियां वापस लौट आई। मेले के तीसरे दिन भी म्हाड़ी पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुुओं ने निशान और प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगी।
गंगोह रोड स्थित बाबा श्री जाहरवीर गोगा की म्हाड़ी पर लगा मेला शनिवार को सकुशल संपन्न हो गया। दोपहर एक बजे तक नेजा सहित 26 छड़ियां ढोल-नगाड़ों के साथ अंबाला रोड पर मेला गुघाल परिसर में स्थित बाबा काल भैरव विश्रामपुरी भैरव मंदिर पहुंच गई। सहारनपुर सहित पड़ोसी जनपदों के श्रद्धालुओं ने म्हाड़ी पर पहुंचकर निशान और प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगी। शाम पांच बजे मंदिर से नेजा सहित सभी छड़ियां अपने-अपने स्थानों पर प्रस्थान कर गई। बाबा श्री जाहरवीर के जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। वहीं, पुलिस-प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए रखे।
शनिवार को म्हाड़ी मेला संपन्न हो गया। सभी छड़ियां वापस लौट आई। मगर अभी तीन दिन तक शहर में अनेक जगहों पर लौटती छड़ियों का बसेरे आयोजित किए जाएंगे।
गंगोह रोड स्थित बाबा श्री जाहरवीर गोगा की म्हाड़ी पर लगा मेला शनिवार को सकुशल संपन्न हो गया। दोपहर एक बजे तक नेजा सहित 26 छड़ियां ढोल-नगाड़ों के साथ अंबाला रोड पर मेला गुघाल परिसर में स्थित बाबा काल भैरव विश्रामपुरी भैरव मंदिर पहुंच गई। सहारनपुर सहित पड़ोसी जनपदों के श्रद्धालुओं ने म्हाड़ी पर पहुंचकर निशान और प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगी। शाम पांच बजे मंदिर से नेजा सहित सभी छड़ियां अपने-अपने स्थानों पर प्रस्थान कर गई। बाबा श्री जाहरवीर के जयकारों से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। वहीं, पुलिस-प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए रखे।
विज्ञापन
शनिवार को म्हाड़ी मेला संपन्न हो गया। सभी छड़ियां वापस लौट आई। मगर अभी तीन दिन तक शहर में अनेक जगहों पर लौटती छड़ियों का बसेरे आयोजित किए जाएंगे।