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कांग्रेस को बड़ा झटका देकर छोटन हुए बसपा में शामिल
Updated Tue, 20 Jun 2017 12:32 AM IST
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कांग्रेस को झटका देकर छोटन बसपा में शामिल
सहारनपुर। रामपुर मनिहारन विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे विश्वदयाल छोटन ने कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया है। मुजफ्फरनगर में हुए एक कार्यक्रम के दौरान छोटन ने अपने समर्थकों सहित बसपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया है।
विश्वदयाल छोटन 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में रामपुर मनिहारन से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे थे। विधानसभा चुनावों से पूर्व ही वह कांग्रेस में शामिल हुए थे। उससे पूर्व के विधानसभा चुनावों में छोटन सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। क्षेत्र के कद्दावर नेता के रूप में छोटन की पहचान उनकी राजनीतिक विरासत मानी जा रही है। जिस कारण उनका बसपा में जाना कांग्रेस के लिए क्षति बताई जा रही है।
छोटन के पिता इलम सिंह बसपा से ही तीन बार विधायक रहे थे। मां सत्तो देवी भी एक बार बसपा से विधायक रही थीं। ईलम सिंह पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के करीबियों में माने जाते थे, लेकिन ईलम सिंह और सत्तो देवी के निधन के बाद बसपा ने ईलम सिंह के बेटे विश्वदयाल छोटन की बजाय
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रविंद्र कुमार मोल्हू को टिकट दे दिया था। जिस पर उन्होंने सपा में शामिल होकर टिकट हासिल कर लिया, लेकिन वह जीत नहीं सके। उन्होंने इस बार कांग्रेस के टिकट पर भाग्य आजमाया, लेकिन इस बार भी भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया। अब फिर वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को बसपा के साथ आगे बढ़ाने के लिए बसपा में शामिल हो गए। बसपा में शामिल होना उनकी वापसी माना जा रहा है। इससे बसपा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। उनको शामिल कराने में जोन कोआर्डिनेटर शमशुद्दीन राइन, एमएलसी सुरेश कश्यप, नरेश गौतम और चौधरी विनोद पंवार की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। उनके साथ जिला पंचायत सदस्य पहल सिंह, राशिद अली, चौधरी विकास, संजय धीमान, महीपाल प्रधान, अनार प्रधान, जगपाल सिंह, जसवीर सिंह भी शामिल हुए। इस मौके पर जिलाध्यक्ष जनेश्वर प्रसाद, पूर्व विधायक अनिल कुमार, महिपाल, संजय नैन, दीपचंद मौजूद रहे।
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सहारनपुर। रामपुर मनिहारन विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे विश्वदयाल छोटन ने कांग्रेस छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया है। मुजफ्फरनगर में हुए एक कार्यक्रम के दौरान छोटन ने अपने समर्थकों सहित बसपा में शामिल होने का ऐलान कर दिया है।
विश्वदयाल छोटन 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में रामपुर मनिहारन से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे थे। विधानसभा चुनावों से पूर्व ही वह कांग्रेस में शामिल हुए थे। उससे पूर्व के विधानसभा चुनावों में छोटन सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। क्षेत्र के कद्दावर नेता के रूप में छोटन की पहचान उनकी राजनीतिक विरासत मानी जा रही है। जिस कारण उनका बसपा में जाना कांग्रेस के लिए क्षति बताई जा रही है।
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छोटन के पिता इलम सिंह बसपा से ही तीन बार विधायक रहे थे। मां सत्तो देवी भी एक बार बसपा से विधायक रही थीं। ईलम सिंह पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के करीबियों में माने जाते थे, लेकिन ईलम सिंह और सत्तो देवी के निधन के बाद बसपा ने ईलम सिंह के बेटे विश्वदयाल छोटन की बजाय
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रविंद्र कुमार मोल्हू को टिकट दे दिया था। जिस पर उन्होंने सपा में शामिल होकर टिकट हासिल कर लिया, लेकिन वह जीत नहीं सके। उन्होंने इस बार कांग्रेस के टिकट पर भाग्य आजमाया, लेकिन इस बार भी भाग्य ने उनका साथ नहीं दिया। अब फिर वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को बसपा के साथ आगे बढ़ाने के लिए बसपा में शामिल हो गए। बसपा में शामिल होना उनकी वापसी माना जा रहा है। इससे बसपा को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। उनको शामिल कराने में जोन कोआर्डिनेटर शमशुद्दीन राइन, एमएलसी सुरेश कश्यप, नरेश गौतम और चौधरी विनोद पंवार की मुख्य भूमिका बताई जा रही है। उनके साथ जिला पंचायत सदस्य पहल सिंह, राशिद अली, चौधरी विकास, संजय धीमान, महीपाल प्रधान, अनार प्रधान, जगपाल सिंह, जसवीर सिंह भी शामिल हुए। इस मौके पर जिलाध्यक्ष जनेश्वर प्रसाद, पूर्व विधायक अनिल कुमार, महिपाल, संजय नैन, दीपचंद मौजूद रहे।