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रिहाई के इंतजार में कहीं टूट न जाए सांसों की डोर
Updated Sun, 22 Apr 2018 12:44 AM IST
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रिहाई के इंतजार में टूट रही सांसों की डोर
सहारनपुर। उम्र के अंतिम पड़ाव में जेल के सीखचों से बाहर आने की चाहत में बुजुर्ग कैदियों की सांसों की डोर टूट रही है। जिला कारागार में अपनी रिहाई का इंतजार कर रहे 19 कैदियों में से दो की मौत हो चुकी है, लेकिन मेडिकल बोर्ड की संस्तुति के बावजूद भी शासन से रिहाई का परवाना नहीं आ रहा है। 17 कैदी आज भी उस परवाने के इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं।
जिला कारागार में 70 से अधिक उम्र के सजायाफ्ता 19 कैदियों की रिहाई के लिए दिसंबर 2017 में मेडिकल बोर्ड ने सेहत और उम्र को देखते हुए रिहाई की संस्तुति कर दी थी। जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते तीन महीने तक रिहाई की यह फाइल जिला स्तर से ऊपर नहीं पहुंच सकी। जब कैदियों की हालत बिगड़नी शुरू हो गई तो इसे आगे बढ़ाया गया और कारागार के मुख्यालय भेजा गया, लेकिन अभी तक उससे आगे फाइल नहीं बढ़ी। मेडिकल बोर्ड की संस्तुति के बाद उम्र के अंतिम पड़ाव में चल रहे कैदियों को अपने परिजनों के सामने सांसें टूटने की उम्मीद जगी। कैदी शासन से फाइल पर कार्रवाई के बाद परवाना आने की आस लगाए बैठे हैं। इस इंतजार में दो कैदियों की सांसों की डोर टूट चुकी है, जबकि कुछ अन्य भी गंभीर बीमारी के शिकार हैं।
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--। इन कैदियों की होनी है रिहाई
इसम सिंह पुत्र हरलाल (77), फतेहयाब उर्फ पल्टू पुत्र मंगत (75), अकरम खान पुत्र युनुस खान (73), इमानुल्ला पुत्र शाह मोहम्मद (73), इरशाद खान पुत्र शरीफ (74), सुल्तान पुत्र इस्माईल(76), जरीफ पुत्र मंगता(73), अलीहसन पुत्र नूर मोहम्मद (71), इसम सिंह पुत्र दाताराम (76), बालकिशन पुत्र नत्थू (72), शकील पुत्र सराजु (70), मक्कड़ पुत्र आशाराम(70), कौसर पुत्र कासिम(81), शकील अहमद पुत्र कासिम(88), सुक्कड़ पुत्र फुल्लू (90), रूकसाना पत्नी आसिफ (61) और सुदेशना पत्नी सुरेंद्र त्यागी(61) हैं। जबकि दो कैदी जमशेद (78) तथा दिलावर (75) की मौत हो गई। दिलावर की मौत 30 दिसंबर 2017 में हुई थी। जबकि जमशेद की मौत तीन दिन पूर्व 19 अप्रैल को हुई।
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--। सुल्तान की नहीं दिलावर की हुई थी 30 दिसंबर को मौत
जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहा सुल्तान जीवित है, जबकि दिलावर की 30 दिसंबर 2017 को मौत हो गई थी। उन्हें नाम में गलतफहमी हो गई थी। इसलिए उन्होंने सुल्तान का नाम बताया था।
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--। दऊद खां, छुन्नू खां समेत चार हत्याओं के आरोपी था जमशेद
सहारनपुर। पुलिस के अनुसार वर्ष 1089 में दो परिवारों में जमीन की रंजिश और एक महिला के तलाक को लेकर रंजिश हो गई थी। जिसमें दाऊद खां के पक्ष पर जमशेद पक्ष के मुसर्रफ की हत्या का आरोप लगा। जबकि जमशेद पक्ष पर दाऊद, छुन्नू खां समेत चार लोगों की हत्या किए जाने का आरोप था। जिसमें कोर्ट ने छह लोगों सुल्तान, जमशेद, अमानुल्ला, अकरम, इरशाद तथा दिलावर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इनमें से अब तक दिलावर और जमशेद की मौत हो चुकी है।
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सहारनपुर। उम्र के अंतिम पड़ाव में जेल के सीखचों से बाहर आने की चाहत में बुजुर्ग कैदियों की सांसों की डोर टूट रही है। जिला कारागार में अपनी रिहाई का इंतजार कर रहे 19 कैदियों में से दो की मौत हो चुकी है, लेकिन मेडिकल बोर्ड की संस्तुति के बावजूद भी शासन से रिहाई का परवाना नहीं आ रहा है। 17 कैदी आज भी उस परवाने के इंतजार में टकटकी लगाए हुए हैं।
जिला कारागार में 70 से अधिक उम्र के सजायाफ्ता 19 कैदियों की रिहाई के लिए दिसंबर 2017 में मेडिकल बोर्ड ने सेहत और उम्र को देखते हुए रिहाई की संस्तुति कर दी थी। जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते तीन महीने तक रिहाई की यह फाइल जिला स्तर से ऊपर नहीं पहुंच सकी। जब कैदियों की हालत बिगड़नी शुरू हो गई तो इसे आगे बढ़ाया गया और कारागार के मुख्यालय भेजा गया, लेकिन अभी तक उससे आगे फाइल नहीं बढ़ी। मेडिकल बोर्ड की संस्तुति के बाद उम्र के अंतिम पड़ाव में चल रहे कैदियों को अपने परिजनों के सामने सांसें टूटने की उम्मीद जगी। कैदी शासन से फाइल पर कार्रवाई के बाद परवाना आने की आस लगाए बैठे हैं। इस इंतजार में दो कैदियों की सांसों की डोर टूट चुकी है, जबकि कुछ अन्य भी गंभीर बीमारी के शिकार हैं।
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--। इन कैदियों की होनी है रिहाई
इसम सिंह पुत्र हरलाल (77), फतेहयाब उर्फ पल्टू पुत्र मंगत (75), अकरम खान पुत्र युनुस खान (73), इमानुल्ला पुत्र शाह मोहम्मद (73), इरशाद खान पुत्र शरीफ (74), सुल्तान पुत्र इस्माईल(76), जरीफ पुत्र मंगता(73), अलीहसन पुत्र नूर मोहम्मद (71), इसम सिंह पुत्र दाताराम (76), बालकिशन पुत्र नत्थू (72), शकील पुत्र सराजु (70), मक्कड़ पुत्र आशाराम(70), कौसर पुत्र कासिम(81), शकील अहमद पुत्र कासिम(88), सुक्कड़ पुत्र फुल्लू (90), रूकसाना पत्नी आसिफ (61) और सुदेशना पत्नी सुरेंद्र त्यागी(61) हैं। जबकि दो कैदी जमशेद (78) तथा दिलावर (75) की मौत हो गई। दिलावर की मौत 30 दिसंबर 2017 में हुई थी। जबकि जमशेद की मौत तीन दिन पूर्व 19 अप्रैल को हुई।
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--। सुल्तान की नहीं दिलावर की हुई थी 30 दिसंबर को मौत
जेल अधीक्षक डाक्टर वीरेश राज शर्मा ने बताया कि हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहा सुल्तान जीवित है, जबकि दिलावर की 30 दिसंबर 2017 को मौत हो गई थी। उन्हें नाम में गलतफहमी हो गई थी। इसलिए उन्होंने सुल्तान का नाम बताया था।
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--। दऊद खां, छुन्नू खां समेत चार हत्याओं के आरोपी था जमशेद
सहारनपुर। पुलिस के अनुसार वर्ष 1089 में दो परिवारों में जमीन की रंजिश और एक महिला के तलाक को लेकर रंजिश हो गई थी। जिसमें दाऊद खां के पक्ष पर जमशेद पक्ष के मुसर्रफ की हत्या का आरोप लगा। जबकि जमशेद पक्ष पर दाऊद, छुन्नू खां समेत चार लोगों की हत्या किए जाने का आरोप था। जिसमें कोर्ट ने छह लोगों सुल्तान, जमशेद, अमानुल्ला, अकरम, इरशाद तथा दिलावर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इनमें से अब तक दिलावर और जमशेद की मौत हो चुकी है।