{"_id":"5a3418164f1c1bee688c1ef9","slug":"61513363478-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुख्यमंत्री और डीएम की कार्रवाई पर न्यायालय का स्थगन-MUZAFFARNAGAR","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुख्यमंत्री और डीएम की कार्रवाई पर न्यायालय का स्थगन-MUZAFFARNAGAR
Updated Sat, 16 Dec 2017 12:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री और डीएम की कार्रवाई पर हाईकोर्ट का स्टे
सहारनपुर। शाकंभरी देवी मंदिर मामले में न्यायालय ने मुख्यमंत्री कार्यालय और डीएम की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इस मामले में राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही अग्रिम आदेशों तक मुख्यमंत्री कार्यालय और जिलाधिकारी के मंदिर परिसर में राजकीय मेला लगाने पर रोक लगा दी है।
शाकंभरी देवी मंदिर और उसकी जमीन को ट्रस्ट बनाकर विकास कराने का मामला तूल पकड़े हुए है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक मंचों से शाकुंभरी मंदिर के विकास की घोषणा कर चुके हैं और मुख्यमंत्री कार्यालय ने 18 सितंबर 2017 को मंदिर परिसर में लगने वाले मेले को प्रशासन की देखरेख में लगाने का आदेश जारी किया। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने भी 17 नवंबर 2017 को आदेश दिया था। मंदिर की भूमि पर वन विभाग के मालिकाना हक संबंधित जांच भी की जा रही है। मंदिर के संचालक आदित्य राणा ने न्यायालय में परिवाद दर्ज किया और बताया कि यह 200 वर्ष पुराना पारिवारिक मंदिर है। यह पूरा क्षेत्र निजी संपत्ति है। मगर, पिछले कुछ समय से प्रशासन इसमें हस्तक्षेप कर रहा है। न्यायालय ने दोनों मामलों को एकसाथ जोड़ते हुए मुुख्यमंत्री कार्यालय और डीएम के आदेश पर रोक लगा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 10 जनवरी 2018 नियत की है। इससे पहले प्रशासन को अपना जवाब दाखिल करना होगा। उधर, एसडीएम डीपी सिंह ने स्टे की जानकारी होने से इनकार किया है। मंदिर के केयरटेकर आदित्य राणा का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी नोटिस के ही मंदिर की संपत्ति में हस्तक्षेप की कोशिश की है और मौके पर जाकर पैमाइश भी की। न्यायालय ने अक्तूबर 2013 में मंदिर के संचालन में किसी तरह के हस्तक्षेप नहीं करने का आदेश दिया था। मगर, प्रशासन ने रोक संबंधित की अवमानना की है। इसके बाद न्यायालय में अपना पक्ष रखते वक्त कहा कि श्रद्धालुओं की बुनियादी सुविधाओं को देखने के लिए अधिकारी गए थे। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित करार दिया।
विज्ञापन
सहारनपुर। शाकंभरी देवी मंदिर मामले में न्यायालय ने मुख्यमंत्री कार्यालय और डीएम की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इस मामले में राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही अग्रिम आदेशों तक मुख्यमंत्री कार्यालय और जिलाधिकारी के मंदिर परिसर में राजकीय मेला लगाने पर रोक लगा दी है।
शाकंभरी देवी मंदिर और उसकी जमीन को ट्रस्ट बनाकर विकास कराने का मामला तूल पकड़े हुए है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सार्वजनिक मंचों से शाकुंभरी मंदिर के विकास की घोषणा कर चुके हैं और मुख्यमंत्री कार्यालय ने 18 सितंबर 2017 को मंदिर परिसर में लगने वाले मेले को प्रशासन की देखरेख में लगाने का आदेश जारी किया। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने भी 17 नवंबर 2017 को आदेश दिया था। मंदिर की भूमि पर वन विभाग के मालिकाना हक संबंधित जांच भी की जा रही है। मंदिर के संचालक आदित्य राणा ने न्यायालय में परिवाद दर्ज किया और बताया कि यह 200 वर्ष पुराना पारिवारिक मंदिर है। यह पूरा क्षेत्र निजी संपत्ति है। मगर, पिछले कुछ समय से प्रशासन इसमें हस्तक्षेप कर रहा है। न्यायालय ने दोनों मामलों को एकसाथ जोड़ते हुए मुुख्यमंत्री कार्यालय और डीएम के आदेश पर रोक लगा दी है। इस मामले में अगली सुनवाई 10 जनवरी 2018 नियत की है। इससे पहले प्रशासन को अपना जवाब दाखिल करना होगा। उधर, एसडीएम डीपी सिंह ने स्टे की जानकारी होने से इनकार किया है। मंदिर के केयरटेकर आदित्य राणा का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी नोटिस के ही मंदिर की संपत्ति में हस्तक्षेप की कोशिश की है और मौके पर जाकर पैमाइश भी की। न्यायालय ने अक्तूबर 2013 में मंदिर के संचालन में किसी तरह के हस्तक्षेप नहीं करने का आदेश दिया था। मगर, प्रशासन ने रोक संबंधित की अवमानना की है। इसके बाद न्यायालय में अपना पक्ष रखते वक्त कहा कि श्रद्धालुओं की बुनियादी सुविधाओं को देखने के लिए अधिकारी गए थे। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित करार दिया।
विज्ञापन