फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   रासुका के जरिए उपद्रवियों पर प्रशासन का शिकंजा

रासुका के जरिए उपद्रवियों पर प्रशासन का शिकंजा

Sun, 10 Sep 2017 12:55 AM IST
Updated Sun, 10 Sep 2017 12:55 AM IST
विज्ञापन
रासुका के जरिए उपद्रवियों पर प्रशासन का शिकंजा
सहारनपुर। राष्ट्रीय सुरक्ष कानून (रासुका) की कार्रवाई के जरिए अब प्रशासन उपद्रवियों को सख्त संदेश देने की कोशिश में है। शब्बीरपुर हिंसा के बाद हुए उपद्रव में एक पक्ष के तीन लोगों पर रासुका की कार्रवाई से प्रशासन ने अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं। संभावना जताई जा रही है कि भीम आर्मी के संस्थापक और फरार चल रहे इनामियों पर भी रासुका के तहत शिकंजा कसा जाएगा। उपद्रव के करीब साढ़े तीन महीने बाद हुई इस सख्त कार्रवाई से हड़कंप मच गया। उधर, इस कार्रवाई से सियासत भी फिर गर्माने की पूरी संभावना है।
विज्ञापन

दरअसल, शब्बीरपुर प्रकरण के बाद नौ मई को भीम आर्मी ने पूरे जिले में उपद्रव किया था। इसके बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने 23 मई को शब्बीरपुर गांव में सभा की। उनकी सभा से लौटते लोगों पर हुए हमले के आरोपियों को प्रशासन ने रासुका के तहत निरुद्ध कर दिया है। ऐसे में इस बात की प्रबल संभावना है कि नौ मई की हिंसा के आरोपियों पर रासुका की कार्रवाई होगी। सबसे अहम बात यह है कि रासुका की कार्रवाई करने में प्रशासन ने सही समय का इंतजार किया। यही कारण है कि घटना के करीब साढ़े तीन महीने बाद गुपचुप तरीके से आरोपियों पर शिकंजा कस कर वह उपद्रवियों को संदेश देने की कोशिश में है। प्रशासनिक अफसरों को यह बात मालूम थी कि यदि उस समय ही इस तरह की सख्त कार्रवाई की गई तो राजनीतिक उबाल से जिले का माहौल गरमा सकता है। यही कारण है कि अब इस कार्रवाई से सियासत गरमा तो रही है मगर उस तरह के तेवर नहीं दिख रहे हैं।
विज्ञापन

-----------------------------
करीब डेढ़ महीने तक झुलसा था जिला
पांच मई को महाराणा प्रताप जयंती के उपलक्ष्य में निकलने वाले जूलुस के विरोध पर हुए पथराव के बाद दलितों की बस्ती में आग लगा दी गई थी। इसके बाद दलितों के हित में आवाज उठाने की सियासत शुरू हुई और नौ मई को भीम आर्मी ने जिले भर में उपद्रव किया और जमकर आगजनी की। इसके बाद दलितों के बीच सियासत और गरमा गई। इसी बीच 23 मई को बसपा सुप्रीमो मायावती ने शब्बीरपुर गांव में सभा की और वहां लौटते हुए उनके समर्थकों पर हमला हुआ। इसमें एक युवक की मौत हो गई थी। पूरी सरकार के लिए चुनौती बने इस हिंसा में तत्कालीन डीएम एनपी सिंह और एसएसपी सुभाष दूबे निलंबित कर दिए गए थे। महीनों बाद भीम आर्मी के संस्थापक को पुलिस ने गिरफ्तार किया और अब भी दो आरोपियों पर इनाम घोषित होने के बाद भी पुलिस पकड़ से दूर हैं। ऐसे में अब रासुका की कार्रवाई प्रशासन के कड़े संदेश के रुप में देखा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रासुका की कार्रवाई गलत: इमरान
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक इमरान मसूद ने रासुका की कार्रवाई को पूरी तरह से गलत करार दिया। उनका कहना है कि बड़ी मुश्किल से सहारनपुर में शांति व्यवस्था कायम हो पाई है। मगर, रासुका की कार्रवाई के जरिए फिर उसे हवा देने की कोशिश की जा रही है। तीन लोगों पर लगी रासुका और अन्य लोगों पर इस तरह की कार्रवाई अब नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed