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खुशी की हालत गंभीर, परिजनों ने लगाई मदद की गुहार
Updated Mon, 19 Jun 2017 12:20 AM IST
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खुशी की हालत गंभीर, परिजनों ने लगाई मदद की गुहार
सहारनपुर। किडनी खराब होने की वजह से जिंदगी और मौत के बीच फंसी नौ वर्षीय खुशी की हालत लगातार बिगड़ रही है। चार दिन से वह दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती है। लगातार दवाइयों के शरीर में जाने और बीमारी की वजह से फेफड़ों को भी इंफेक्शन ने जकड़ लिया है। घर की हालत ठीक नहीं है। ऐसे में परिजनों ने लोगों से मदद की गुहार लगाई है।
खुशी के पिता मनोज कुमार परचून की दुकान पर काम करते हैं, जहां से मिलने वाले पारिश्रमिक से घर का गुजारा तक चला पाना मुश्किल है। ऐसे में बेटी के महंगे इलाज को कराने में वह सक्षम नहीं है। अमर उजाला ने खुशी और उसके परिवार के दर्द को 29 मई के संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद कुछ लोग मदद के लिए आगे आए थे। मगर मदद का पैसा कब का खत्म हो चुका है। खुशी की हालत लगातार बिगड़ रही है। पिछले चार दिन से वह दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। बेटी के इलाज के कारण कर्ज में डूबते जा रहे पिता मनोज और मां ममता को बेटी के इलाज के लिए मदद की दरकार है।
मदद की सरकारी प्रक्रिया लंबी
अमर उजाला में प्रकाशित हुए खुशी से जुड़े समाचार का शासन ने संज्ञान लिया है। इस संबंध में जिला प्रबोशन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। जिला प्रोबेशन विभाग ने खुशी के परिजनों से खुशी के इलाज से संबंधित तमाम कागज इकट्ठा कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। बताया जा रहा है कि शासन खुशी के इलाज का पूरा खर्च उठाएगा। मगर उससे पहले रिपोर्ट कंपलीट होना जरूरी है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट पर डीएम, सीडीओ और सीएमओ के हस्ताक्षर होना जरूरी है। उसके बाद ही रिपोर्ट शासन को भेजी जा सकेगी।
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सहारनपुर। किडनी खराब होने की वजह से जिंदगी और मौत के बीच फंसी नौ वर्षीय खुशी की हालत लगातार बिगड़ रही है। चार दिन से वह दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती है। लगातार दवाइयों के शरीर में जाने और बीमारी की वजह से फेफड़ों को भी इंफेक्शन ने जकड़ लिया है। घर की हालत ठीक नहीं है। ऐसे में परिजनों ने लोगों से मदद की गुहार लगाई है।
खुशी के पिता मनोज कुमार परचून की दुकान पर काम करते हैं, जहां से मिलने वाले पारिश्रमिक से घर का गुजारा तक चला पाना मुश्किल है। ऐसे में बेटी के महंगे इलाज को कराने में वह सक्षम नहीं है। अमर उजाला ने खुशी और उसके परिवार के दर्द को 29 मई के संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद कुछ लोग मदद के लिए आगे आए थे। मगर मदद का पैसा कब का खत्म हो चुका है। खुशी की हालत लगातार बिगड़ रही है। पिछले चार दिन से वह दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। बेटी के इलाज के कारण कर्ज में डूबते जा रहे पिता मनोज और मां ममता को बेटी के इलाज के लिए मदद की दरकार है।
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मदद की सरकारी प्रक्रिया लंबी
अमर उजाला में प्रकाशित हुए खुशी से जुड़े समाचार का शासन ने संज्ञान लिया है। इस संबंध में जिला प्रबोशन अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है। जिला प्रोबेशन विभाग ने खुशी के परिजनों से खुशी के इलाज से संबंधित तमाम कागज इकट्ठा कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। बताया जा रहा है कि शासन खुशी के इलाज का पूरा खर्च उठाएगा। मगर उससे पहले रिपोर्ट कंपलीट होना जरूरी है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट पर डीएम, सीडीओ और सीएमओ के हस्ताक्षर होना जरूरी है। उसके बाद ही रिपोर्ट शासन को भेजी जा सकेगी।
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