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नगर निगम के पास नहीं टैक्स को मैनुअल रिकार्ड
Updated Mon, 04 Jun 2018 11:44 PM IST
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कर वसूली का रिकार्ड रखने में लापरवाही उजागर
सहारनपुर। नगर निगम द्वारा गृह कर, जल कर और सीवर कर की वसूली का रिकार्ड रखने में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। दरअसल, नगर निगम के अधिकारी तीन साल से जमा किए जा रहे टैक्स और बकायेदारों का मैनुअल रिकार्ड तैयार नहीं कर रहे हैं। केवल कंप्यूटर में रिकार्ड होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि तकनीकी खराबी की वजह से कंप्यूटर में फीड डाटा गायब हो जाएं तो क्या होगा।
टैक्स नगर निगम की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है। प्रतिदिन दो से ढाई लाख रुपये कर टैक्स वसूली होती है। नियमानुसार प्रतिदिन जमा होने वाले टैक्स को कंप्यूटर में दर्ज किया जाता है। इसके साथ ही साथ मैनुअल तौर पर भी रजिस्टर तैयार किया जाता है। इसमें टैक्स से हुई आय और बड़े बकायेदारों का हिसाब रखा जाता है। मैनुअल रिकार्ड तैयार करने का मकसद यह है कि यदि किन्हीं कारणों से कंप्यूटर से डाटा गायब हो जाए तो मैनुअल रजिस्टर से रिकवरी की जा सकती है। मगर हैरात की बात यह है कि नगर निगम के अधिकारी एक अप्रैल 2015 से मैनुअल रिकार्ड नहीं बना रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कंप्यूटर में पूरा रिकार्ड दर्ज है। नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह भी इसका पता लने के बाद से हैरान हैं। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पिछले तीन साल का मैनुअल रिकार्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
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बड़े बकाएदारों पर मेहरबान अधिकारी
नगर निगम का गृह कर की मोटी रकम बकाया है। सूत्रों ने बताया कि नगर के अनेक पब्लिक स्कूल और सरकारी विभाग सुचारु रूप से टैक्स जमा नहीं करा रहे हैं। इसके अलावा बड़े बकायेदारों में अनेक नेता और अन्य रसूखदार लोग भी शामिल हैं। इनसे वसूली करने में नगर निगम लगातार नाकाम रहा है। पिछले दिनों नगरायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को बड़े बकायेदारों के नाम सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे। मगर आज तक बकायेदारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सके हैं।
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वसूली में लगातार पिछड़ता रहा है निगम
टैक्स वसूली में भी नगर निगम लगाता पिछड़ता रहा है। गत वर्षों की बात करें तो लक्ष्य के सापेक्ष 30 से 35 फीसदी टैक्स की ही वसूली हुई है। नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी इसे लेकर बहस हो चुकी है। नगरायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को वार्डों में कैंप लगाकर वसूली बढ़ाने के निर्देश दिए थे। मगर आज तक कैंप नहीं लगाए जा सके हैं। इतना ही नहीं, पोर्टल में खराबी की वजह से पिछले तीन महीने से वसूली पूरी तरह बंद रही। अब ई-नगर सेवा पोर्टल शुरू होने के बाद वसूली शुरू की जा सकी है।
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यह सच है कि नगर निगम के पास एक अप्रैल 2015 के बाद का टैक्स संबंधित मैनुअल रिकार्ड नहीं है। यह बड़ी लापरवाही है क्योंकि कंप्यूटर में खराबी आने के बाद मैनुअल रिकार्ड ही बचता है, जिसके आधार पर रिकार्ड को पुन: दुरुस्त किया जा सकता है। नगरायुक्त से मैनुअल रिकार्ड तैयार करने के निर्देश मिले हैं।
विनय शर्मा, कर अधीक्षक, नगर निगम।
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सहारनपुर। नगर निगम द्वारा गृह कर, जल कर और सीवर कर की वसूली का रिकार्ड रखने में बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। दरअसल, नगर निगम के अधिकारी तीन साल से जमा किए जा रहे टैक्स और बकायेदारों का मैनुअल रिकार्ड तैयार नहीं कर रहे हैं। केवल कंप्यूटर में रिकार्ड होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि तकनीकी खराबी की वजह से कंप्यूटर में फीड डाटा गायब हो जाएं तो क्या होगा।
टैक्स नगर निगम की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है। प्रतिदिन दो से ढाई लाख रुपये कर टैक्स वसूली होती है। नियमानुसार प्रतिदिन जमा होने वाले टैक्स को कंप्यूटर में दर्ज किया जाता है। इसके साथ ही साथ मैनुअल तौर पर भी रजिस्टर तैयार किया जाता है। इसमें टैक्स से हुई आय और बड़े बकायेदारों का हिसाब रखा जाता है। मैनुअल रिकार्ड तैयार करने का मकसद यह है कि यदि किन्हीं कारणों से कंप्यूटर से डाटा गायब हो जाए तो मैनुअल रजिस्टर से रिकवरी की जा सकती है। मगर हैरात की बात यह है कि नगर निगम के अधिकारी एक अप्रैल 2015 से मैनुअल रिकार्ड नहीं बना रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि कंप्यूटर में पूरा रिकार्ड दर्ज है। नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह भी इसका पता लने के बाद से हैरान हैं। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पिछले तीन साल का मैनुअल रिकार्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
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बड़े बकाएदारों पर मेहरबान अधिकारी
नगर निगम का गृह कर की मोटी रकम बकाया है। सूत्रों ने बताया कि नगर के अनेक पब्लिक स्कूल और सरकारी विभाग सुचारु रूप से टैक्स जमा नहीं करा रहे हैं। इसके अलावा बड़े बकायेदारों में अनेक नेता और अन्य रसूखदार लोग भी शामिल हैं। इनसे वसूली करने में नगर निगम लगातार नाकाम रहा है। पिछले दिनों नगरायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को बड़े बकायेदारों के नाम सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे। मगर आज तक बकायेदारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जा सके हैं।
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वसूली में लगातार पिछड़ता रहा है निगम
टैक्स वसूली में भी नगर निगम लगाता पिछड़ता रहा है। गत वर्षों की बात करें तो लक्ष्य के सापेक्ष 30 से 35 फीसदी टैक्स की ही वसूली हुई है। नगर निगम बोर्ड की बैठक में भी इसे लेकर बहस हो चुकी है। नगरायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को वार्डों में कैंप लगाकर वसूली बढ़ाने के निर्देश दिए थे। मगर आज तक कैंप नहीं लगाए जा सके हैं। इतना ही नहीं, पोर्टल में खराबी की वजह से पिछले तीन महीने से वसूली पूरी तरह बंद रही। अब ई-नगर सेवा पोर्टल शुरू होने के बाद वसूली शुरू की जा सकी है।
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यह सच है कि नगर निगम के पास एक अप्रैल 2015 के बाद का टैक्स संबंधित मैनुअल रिकार्ड नहीं है। यह बड़ी लापरवाही है क्योंकि कंप्यूटर में खराबी आने के बाद मैनुअल रिकार्ड ही बचता है, जिसके आधार पर रिकार्ड को पुन: दुरुस्त किया जा सकता है। नगरायुक्त से मैनुअल रिकार्ड तैयार करने के निर्देश मिले हैं।
विनय शर्मा, कर अधीक्षक, नगर निगम।