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जिले में और भी हैं तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाने वाली आतिया
Updated Thu, 24 Aug 2017 12:59 AM IST
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तीन तलाक का दंश झेल रही महिलाओं को अब न्याय की उम्मीद
सहारनपुर। आतिया साबरी ने तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाकर सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक निर्णय पाकर अन्य ऐसी महिलाओं को लड़ने का हौसला दिया है। जो तीन तलाक को लेकर लगातार अधिकारियों और कोर्ट के चक्कर लगा रहीं हैं।
सहारनपुर में आतिया की तरह और भी ऐसी मुस्लिम महिलाएं हैं जिनकी जिंदगी तीन तलाक ने बर्बाद कर डाली। उन्होंने भी आतिया की तरह आवाज उठाई, अधिकारियों के यहां पहुंचीं, कोर्ट में भी न्याय के लिए अपील की, लेकिन समाज के दबाव के चलते आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। उनमें से कुछ आतिया अभी भी अपने हक के लिए लड़ रहीं हैं।
बेहट के मोहल्ला गायत्री विहार निवासी रेशमा का निकाह 2011 में देहरादून के शिवपुरी निवासी इश्तेखार के साथ हुआ था। एक साल बाद ही दहेज के लिए मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया। जब वह घर आ गई तो उसे फोन करके तीन बार तलाक कह एक ही झटके में बर्बाद कर डाला। एक फोन से रेशमा का संसार उजाड़ डाला, उसके सपनों को चकनाचूर कर डाला। वह काफी रोती, बिलखती रही, लेकिन समाज ने उसकी एक नहीं सुनी। उसने मुकदमा किया, कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाए, अब कोर्ट में कार्रवाई चल रही है।
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मोहल्ला नवाबगंज निवासी नेहा का निकाह 2013 में सहारनपुर के ही फहीम के साथ हुआ था। तीन साल तक दहेज के लिए प्रताड़ना दी गई, फिर एक दिन उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। बाद में उसे फोन कर बताया गया कि उसे तीन तलाक लिखकर एक कागज भेज दिया गया है। हालांकि वह आज भी मना कर रही है कि उसे कोई कागज नहीं मिला, लेकिन अब फहीम सऊदी चला गया और समाज ने उसका तलाक मान लिया। उसने आरोपी पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों को शिकायत की, एफआईआर दर्ज कराई। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
बेहट रोड निवासी नानौता की शगुफ्ता, सहारनपुर की शाइना परवीन, देवबंद की शहनाज बानो भी आतिया के बाद तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठा रहीं थीं। उन्होंने तीन तलाक कहने वाले पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। अधिकांश मामले अब कोर्ट में ही चल रहे हैं। शाइना, शहनाज, शगुफ्ता का कहना है कि तीन तलाक पर रोक फैसला तो आना ही था। यह गलत है कि किसी ने गुस्से में आकर तलाक, तलाक, तलाक बोल दिया और सब कुछ खत्म हो गया। यह तो काफी पहले ही खत्म हो जाना चाहिए था। उनके जैसी न जाने कितनों की जिंदगी शायद बच जाती।
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सहारनपुर। आतिया साबरी ने तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठाकर सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक निर्णय पाकर अन्य ऐसी महिलाओं को लड़ने का हौसला दिया है। जो तीन तलाक को लेकर लगातार अधिकारियों और कोर्ट के चक्कर लगा रहीं हैं।
सहारनपुर में आतिया की तरह और भी ऐसी मुस्लिम महिलाएं हैं जिनकी जिंदगी तीन तलाक ने बर्बाद कर डाली। उन्होंने भी आतिया की तरह आवाज उठाई, अधिकारियों के यहां पहुंचीं, कोर्ट में भी न्याय के लिए अपील की, लेकिन समाज के दबाव के चलते आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा सकीं। उनमें से कुछ आतिया अभी भी अपने हक के लिए लड़ रहीं हैं।
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बेहट के मोहल्ला गायत्री विहार निवासी रेशमा का निकाह 2011 में देहरादून के शिवपुरी निवासी इश्तेखार के साथ हुआ था। एक साल बाद ही दहेज के लिए मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया। जब वह घर आ गई तो उसे फोन करके तीन बार तलाक कह एक ही झटके में बर्बाद कर डाला। एक फोन से रेशमा का संसार उजाड़ डाला, उसके सपनों को चकनाचूर कर डाला। वह काफी रोती, बिलखती रही, लेकिन समाज ने उसकी एक नहीं सुनी। उसने मुकदमा किया, कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाए, अब कोर्ट में कार्रवाई चल रही है।
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मोहल्ला नवाबगंज निवासी नेहा का निकाह 2013 में सहारनपुर के ही फहीम के साथ हुआ था। तीन साल तक दहेज के लिए प्रताड़ना दी गई, फिर एक दिन उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। बाद में उसे फोन कर बताया गया कि उसे तीन तलाक लिखकर एक कागज भेज दिया गया है। हालांकि वह आज भी मना कर रही है कि उसे कोई कागज नहीं मिला, लेकिन अब फहीम सऊदी चला गया और समाज ने उसका तलाक मान लिया। उसने आरोपी पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों को शिकायत की, एफआईआर दर्ज कराई। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
बेहट रोड निवासी नानौता की शगुफ्ता, सहारनपुर की शाइना परवीन, देवबंद की शहनाज बानो भी आतिया के बाद तीन तलाक के खिलाफ आवाज उठा रहीं थीं। उन्होंने तीन तलाक कहने वाले पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। अधिकांश मामले अब कोर्ट में ही चल रहे हैं। शाइना, शहनाज, शगुफ्ता का कहना है कि तीन तलाक पर रोक फैसला तो आना ही था। यह गलत है कि किसी ने गुस्से में आकर तलाक, तलाक, तलाक बोल दिया और सब कुछ खत्म हो गया। यह तो काफी पहले ही खत्म हो जाना चाहिए था। उनके जैसी न जाने कितनों की जिंदगी शायद बच जाती।