{"_id":"5974e72b4f1c1b36548b464d","slug":"51500833579-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो दिन से गांव में नहीं जले चूल्हे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो दिन से गांव में नहीं जले चूल्हे
Updated Sun, 23 Jul 2017 11:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दो दिन से गांव में नहीं जले चूल्हें
बड़गांव (सहारनपुर)। भगवानपुर के लाल के शहीद होने पर गांव में शोक की लहर है। गांव के अधिकांश घरों में दो दिन से चूल्हा तक नहीं जला है।
ग्राम भगवानपुर के लोगों को जयद्रथ से काफी लगाव था। चाचा मंगत बताते हैं कि गांव के बुजुर्गों का इतना सम्मान करता था कि दिन में चाहे जितनी भी बार मिले, हर बार राम-राम करके ही आगे कदम बढ़ाता था। हर किसी के पैर छूना उसकी आदत हो चुका था। जब भी छुट्टी पर आता था, गांव के हर व्यक्ति से मिलता था और जो नजर नहीं आता था तो उसके घर जाकर पूछता था कि वह कहां है, उसे मिलना है, नहीं तो वह फिर ड्यूटी पर चला जाएगा।
जब जयद्रथ की शहादत पर हर कोई गमगीन है। हर किसी के चेहरे पर उदासी के साथ आंखें नम है। पिछले दो दिनों से गांव में घर में चूल्हा तक नहीं जल पाया है। हर किसी को जयद्रथ के जाने का गम है।
भीड़ काबू करने में पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत
बड़गांव। शहीद जयद्रथ का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही मौके पर पहले से ही इंतजार में खड़ी भीड़ शहीद के ताबूत के साथ ही पीछे पीछे शहीद के घर और आंगन में घुस गई कोई मकान की छत पर खड़ा तो कोई आंगन के कोने में रखे ताबूत में रखे शहीद जयद्रथ के अंतिम दर्शन चाह रहा था। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर खड़े एसएसपी और डीएम भी भीड़ को हटवाते नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन
बड़गांव (सहारनपुर)। भगवानपुर के लाल के शहीद होने पर गांव में शोक की लहर है। गांव के अधिकांश घरों में दो दिन से चूल्हा तक नहीं जला है।
ग्राम भगवानपुर के लोगों को जयद्रथ से काफी लगाव था। चाचा मंगत बताते हैं कि गांव के बुजुर्गों का इतना सम्मान करता था कि दिन में चाहे जितनी भी बार मिले, हर बार राम-राम करके ही आगे कदम बढ़ाता था। हर किसी के पैर छूना उसकी आदत हो चुका था। जब भी छुट्टी पर आता था, गांव के हर व्यक्ति से मिलता था और जो नजर नहीं आता था तो उसके घर जाकर पूछता था कि वह कहां है, उसे मिलना है, नहीं तो वह फिर ड्यूटी पर चला जाएगा।
जब जयद्रथ की शहादत पर हर कोई गमगीन है। हर किसी के चेहरे पर उदासी के साथ आंखें नम है। पिछले दो दिनों से गांव में घर में चूल्हा तक नहीं जल पाया है। हर किसी को जयद्रथ के जाने का गम है।
विज्ञापन
भीड़ काबू करने में पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत
बड़गांव। शहीद जयद्रथ का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही मौके पर पहले से ही इंतजार में खड़ी भीड़ शहीद के ताबूत के साथ ही पीछे पीछे शहीद के घर और आंगन में घुस गई कोई मकान की छत पर खड़ा तो कोई आंगन के कोने में रखे ताबूत में रखे शहीद जयद्रथ के अंतिम दर्शन चाह रहा था। पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। मौके पर खड़े एसएसपी और डीएम भी भीड़ को हटवाते नजर आए।
विज्ञापन