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पूजा कर उतम अकिंचन धर्म को अंगीकार किया
Updated Sun, 23 Sep 2018 12:33 AM IST
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पूजा कर उत्तम अकिंचन धर्म को अंगीकार किया
सरसावा। जैन धर्म के अनुयायियों ने दशलक्षण पर्व के नौवें दिन उत्तम अकिंचन धर्म की पूजा की। इसके बाद जैन विद्वान ने अकिंचन धर्म की व्याख्या की।
शनिवार को जैन समाज द्वारा सराफा बाजार स्थित पंचायती जैन मंदिर में उत्तम अंकिचन धर्म की पूजा की तथा पाठ किया। इस मौके पर जैन शास्त्रों के विद्वान सतीश चंद जैन के अंकिचन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि आत्म केंद्रित होकर धर्म के मार्ग पर चलना अकिंचन है। उन्होंने सरल शब्दों में समझाया कि जिस प्रकार पहाड़ पर चढ़ने के लिये बोझ को हल्का रखा जाता है। उसी प्रकार मोक्ष मार्ग गामी होने के लिए आत्मा पर कर्मों का बोझ नहीं होना चाहिए। केवल बाहरी तत्वों का त्याग कर अकिंचन धर्म का पालन नहीं किया जा सकता है उसके लिये मन की व्याकुलता, आकुलता, अंशाति को त्यागना पड़ेगा। जिस समय मन में शांति का भाव उत्पन्न हो जाएगा तो समझो आपने अकिंचन धर्म के मार्ग पर चलना आरंभ कर दिया है और सतत प्रयासों ने मनुष्य मोक्षगामी हो सकता है। रात्रि में मंदिर में धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
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सरसावा। जैन धर्म के अनुयायियों ने दशलक्षण पर्व के नौवें दिन उत्तम अकिंचन धर्म की पूजा की। इसके बाद जैन विद्वान ने अकिंचन धर्म की व्याख्या की।
शनिवार को जैन समाज द्वारा सराफा बाजार स्थित पंचायती जैन मंदिर में उत्तम अंकिचन धर्म की पूजा की तथा पाठ किया। इस मौके पर जैन शास्त्रों के विद्वान सतीश चंद जैन के अंकिचन धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि आत्म केंद्रित होकर धर्म के मार्ग पर चलना अकिंचन है। उन्होंने सरल शब्दों में समझाया कि जिस प्रकार पहाड़ पर चढ़ने के लिये बोझ को हल्का रखा जाता है। उसी प्रकार मोक्ष मार्ग गामी होने के लिए आत्मा पर कर्मों का बोझ नहीं होना चाहिए। केवल बाहरी तत्वों का त्याग कर अकिंचन धर्म का पालन नहीं किया जा सकता है उसके लिये मन की व्याकुलता, आकुलता, अंशाति को त्यागना पड़ेगा। जिस समय मन में शांति का भाव उत्पन्न हो जाएगा तो समझो आपने अकिंचन धर्म के मार्ग पर चलना आरंभ कर दिया है और सतत प्रयासों ने मनुष्य मोक्षगामी हो सकता है। रात्रि में मंदिर में धार्मिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।