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चीनी मिलों पर किसानों का 570 करोड़ बकाया
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:20 AM IST
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चीनी मिलों पर किसानों का 570 करोड़ बकाया
सहारनपुर। सरकार की तमाम कवायद के बावजूद किसान बकाया गन्ना मूल्य पाने के लिए तरस रहे हैं। जिले की छह चीनी मिलें किसानों के लगभग 570 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। पेराई सत्र समाप्त होने के करीब तीन माह बाद भी किसान पूरा गन्ना मूल्य पाने की बाट जोह रहे हैं। इसके चलते किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।
तमाम दावों के बाद भी प्रदेश सरकार समय से गन्ना मूल्य भुगतान कराने में नाकाम साबित हो रही है। इस समय जब गन्ना सहित अन्य फसलों में लागत लगाई जाती है तब किसान खाली हाथ हैं। जिले की छह चीनी मिलों पर करीब 570 करोड़ रुपये बकाया गन्ना मूल्य है। गन्ना खरीद अधिनियम के तहत गन्ने के मिल में सप्लाई होने के 14 दिनों के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद भुगतान करने पर 15 प्रतिशत की दर से बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज दिए जाने का भी नियम है। लेकिन तमाम नियमों को धता बताते हुए चीनी मिलें समय से गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरतती हैं।
बता दें कि पहले चीनी मिलें पहले कम रेट का बहाना बना रहीं थीं। लेकिन अब बाजार में चीनी का दाम भी करीब 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक है। रेट को सही रखने के लिए केंद्र सरकार ने मिलों का चीनी बेचने का प्रति माह का कोटा तय किया है। हालांकि केन कमिश्नर ने चीनी बेचने का कोटा बढ़वाने के लिए भारत सरकार के साथ पत्र व्यवहार किया है ताकि जल्द से जल्द बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो सके।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि शुगर मिलें चीनी बेचकर बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर रहीं है। मिलों को भुगतान करने में तेजी लाने के लिए निर्देशित किया गया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाएगा।
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सहारनपुर। सरकार की तमाम कवायद के बावजूद किसान बकाया गन्ना मूल्य पाने के लिए तरस रहे हैं। जिले की छह चीनी मिलें किसानों के लगभग 570 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। पेराई सत्र समाप्त होने के करीब तीन माह बाद भी किसान पूरा गन्ना मूल्य पाने की बाट जोह रहे हैं। इसके चलते किसानों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।
तमाम दावों के बाद भी प्रदेश सरकार समय से गन्ना मूल्य भुगतान कराने में नाकाम साबित हो रही है। इस समय जब गन्ना सहित अन्य फसलों में लागत लगाई जाती है तब किसान खाली हाथ हैं। जिले की छह चीनी मिलों पर करीब 570 करोड़ रुपये बकाया गन्ना मूल्य है। गन्ना खरीद अधिनियम के तहत गन्ने के मिल में सप्लाई होने के 14 दिनों के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद भुगतान करने पर 15 प्रतिशत की दर से बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज दिए जाने का भी नियम है। लेकिन तमाम नियमों को धता बताते हुए चीनी मिलें समय से गन्ना मूल्य भुगतान करने में कोताही बरतती हैं।
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बता दें कि पहले चीनी मिलें पहले कम रेट का बहाना बना रहीं थीं। लेकिन अब बाजार में चीनी का दाम भी करीब 3200 रुपये प्रति क्विंटल तक है। रेट को सही रखने के लिए केंद्र सरकार ने मिलों का चीनी बेचने का प्रति माह का कोटा तय किया है। हालांकि केन कमिश्नर ने चीनी बेचने का कोटा बढ़वाने के लिए भारत सरकार के साथ पत्र व्यवहार किया है ताकि जल्द से जल्द बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो सके।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि शुगर मिलें चीनी बेचकर बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर रहीं है। मिलों को भुगतान करने में तेजी लाने के लिए निर्देशित किया गया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाएगा।