{"_id":"59f7743a4f1c1b69678b82c5","slug":"41509389370-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विशेष समुदाय और मदरसों को जान बूझकर टारगेट कर रही योगी सरकार: उलमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विशेष समुदाय और मदरसों को जान बूझकर टारगेट कर रही योगी सरकार: उलमा
Updated Tue, 31 Oct 2017 12:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवबंद (सहारनपुर)। प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों का सिलेबस बदलने की तैयारी के मामले पर देवबंदी उलमा का कहना है कि योगी सरकार विशेष समुदाय और मदरसों को जान बूझकर टारगेट कर रही है। इसलिए वह सरकार के हर रोज आने वाले नये फैसलों से सहमत नहीं हैं।
सोमवार को दारुल उलूम अशरिफा के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी का कहना है कि योगी सरकार मदरसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश देती है तो कभी मदरसों को ऑनलाइन करने तो कभी उनमें झंडा फहराने के आदेश दे रही है। हर रोज मदरसों को लेकर नए नए फरमान जारी किए जा रहे हैं। जिससे वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मदरसों को छोड़कर प्राइमरी स्कूलों पर ध्यान दें तो ज्यादा बेहतर होगा। क्योंकि प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए बैठने तक का इंतजाम नहीं है। बच्चे फटी हुई चटाइयों पर बैठकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। जबकि शिक्षक स्कूल पहुंचेंगे इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। मौलाना सालिम अशरफ ने कहा कि मुख्यमंत्री सरकारी बजट को प्राइमरी स्कूलों पर खर्च करें ताकि हमारा बुनियादी ढांचा मजबूत हो सके। साथ ही कहा कि कौम के जो दस्तूर हैं हम उनका पालन करते हैं और आगे भी करते रहेंगे, लेकिन जबरन कोई भी फैसला थोपा जाता है तो ये अच्छी बात नहीं है और यह देश के भाईचारा को भंग करने वाला अमल है। इसलिए सरकार को इससे बचना चाहिए।
विज्ञापन
सोमवार को दारुल उलूम अशरिफा के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी का कहना है कि योगी सरकार मदरसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश देती है तो कभी मदरसों को ऑनलाइन करने तो कभी उनमें झंडा फहराने के आदेश दे रही है। हर रोज मदरसों को लेकर नए नए फरमान जारी किए जा रहे हैं। जिससे वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मदरसों को छोड़कर प्राइमरी स्कूलों पर ध्यान दें तो ज्यादा बेहतर होगा। क्योंकि प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के लिए बैठने तक का इंतजाम नहीं है। बच्चे फटी हुई चटाइयों पर बैठकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। जबकि शिक्षक स्कूल पहुंचेंगे इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। मौलाना सालिम अशरफ ने कहा कि मुख्यमंत्री सरकारी बजट को प्राइमरी स्कूलों पर खर्च करें ताकि हमारा बुनियादी ढांचा मजबूत हो सके। साथ ही कहा कि कौम के जो दस्तूर हैं हम उनका पालन करते हैं और आगे भी करते रहेंगे, लेकिन जबरन कोई भी फैसला थोपा जाता है तो ये अच्छी बात नहीं है और यह देश के भाईचारा को भंग करने वाला अमल है। इसलिए सरकार को इससे बचना चाहिए।
विज्ञापन