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हजरत मुहम्मद अलैहिस्सलाम की शहादत को किया याद
Updated Wed, 27 Sep 2017 01:07 AM IST
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सहारनपुर। नगर के विभिन्न इमाम बारगाहों में मोहर्रम की चार तारीख पर आयोजित मजलिस में मुस्लिम धार्मिक विद्वानों ने हजरत मुहम्मद अलैहिस्सलाम की शहादत पर रोशनी डाली।
पहली मजलिस में इमाम बारगाह सामानियान मोहल्ला कायस्थान में सुलतानपुर से आए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना मकातिब अली खान ने, दूसरी मजलिस बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज में लखनऊ से आए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना शेख इब्राहिम कुम्मी, तीसरी मजलिस छोटी इमाम बारगाह में बिजनौर से आए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना जहूर मेहंदी ने खिताब फरमाया। इमाम बारगाह सामानियान में हजरत कासिम अलैहिस्सलाम, जो हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के भतीजे व दामाद थे, उन्हीं की याद में मजलिस का आयोजन किया। इसमें हजरत कासिम अलैहिस्सलाम की शहदात पर फलसफा बयान किया गया। इसके बाद हजरत कासिम अलैहिस्सलाम की याद में हर साल की तरह जुलूसे अलम निकाला गया। जुलूस मोहल्ला कायस्थान से शुरू होकर पुरानी जामा मस्जिद, गौरी शंकर बाजार, चूड़ी बाजार, मोहल्ला संज्ञान, बड़तला, अंसारियान से होता हुआ छोटी इमाम बारगाह अंसारियन में पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में अकीदत मंदो ने हाथ से अपने शरीर पर मातम किया। हजरत कासिम अलैहिस्सलाम का गम उनके दिलो दिमाग पर छाया हुआ था। सभी गमजदा लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और नंगे पैर मातम करते हुए चल रहे थे। अकीदत मंद या हुसैन, या अली, या अब्बा, हाय सकीना , हाय प्यास की आवाज बुलंद कर रहे थे।
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पहली मजलिस में इमाम बारगाह सामानियान मोहल्ला कायस्थान में सुलतानपुर से आए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना मकातिब अली खान ने, दूसरी मजलिस बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज में लखनऊ से आए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना शेख इब्राहिम कुम्मी, तीसरी मजलिस छोटी इमाम बारगाह में बिजनौर से आए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना जहूर मेहंदी ने खिताब फरमाया। इमाम बारगाह सामानियान में हजरत कासिम अलैहिस्सलाम, जो हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के भतीजे व दामाद थे, उन्हीं की याद में मजलिस का आयोजन किया। इसमें हजरत कासिम अलैहिस्सलाम की शहदात पर फलसफा बयान किया गया। इसके बाद हजरत कासिम अलैहिस्सलाम की याद में हर साल की तरह जुलूसे अलम निकाला गया। जुलूस मोहल्ला कायस्थान से शुरू होकर पुरानी जामा मस्जिद, गौरी शंकर बाजार, चूड़ी बाजार, मोहल्ला संज्ञान, बड़तला, अंसारियान से होता हुआ छोटी इमाम बारगाह अंसारियन में पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में अकीदत मंदो ने हाथ से अपने शरीर पर मातम किया। हजरत कासिम अलैहिस्सलाम का गम उनके दिलो दिमाग पर छाया हुआ था। सभी गमजदा लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और नंगे पैर मातम करते हुए चल रहे थे। अकीदत मंद या हुसैन, या अली, या अब्बा, हाय सकीना , हाय प्यास की आवाज बुलंद कर रहे थे।
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