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डॉक्टर कर रहे अरुण की हालत में मामूली सुधार का दावा
Updated Sun, 17 Sep 2017 01:15 AM IST
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डॉक्टर कर रहे अरुण की हालत में मामूली सुधार का दावा
सहारनपुर। सड़क हादसे के कारण एक साल से कोमा में चल रहे अरुण को दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद प्रशासन हरकत में आया है। कमिश्नर और डीएम खुद अस्पताल पहुंचे और अरुण की हालत के बारे में चिकित्सक से मुलाकात की। डॉक्टर का दावा है कि चार दिन से भर्ती अरुण की हालत में हल्का सा सुधार है, जो अच्छी बात है।
गंगोह के गांव अलीपुरा निवासी अरुण के साथ एक साल पहले मिर्जापुर के पास सड़क हादसा हुआ था, जिसमें बुरी तरह घायल होने की वजह से वह कोमा में चला गया था। पीजीआई चंडीगढ़ समेत अनेक अस्पतालों में इलाज पर पूरी जमा पूंजी खर्च होने के बाद अरुण का परिवार आर्थिक संकट में है, जिसके पास पेट भरने तक के पैसे नहीं हैं। पिता के कोमा में पड़े होने और परिवार की आर्थिक तंगी से परेशान अरुण की मासूम बेटी इशु ने पिता की फोटो के साथ एक प्रार्थना पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया था। पत्र के माध्यम से इशु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने पिता का इलाज कराने की गुहार लगाई थी। परिवार की बिगड़ती हालत को देखते हुए ग्रामीणों ने कुछ पैसा इकट्ठा कर अरुण को दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। उधर, सोशल मीडिया पर वायरल हुई इशु की मासूम अपील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय तक पहुंची। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जिला प्रशासन हरकत में आया। शुक्रवार को कमिश्नर दीपक अग्रवाल और डीएम पीके पांडेय अरुण को देखने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अरुण का इलाज कर रहे डॉ. राजीव तिवारी से अरुण की हालत के बारे में जानकारी ली। डीएम ने डॉ. तिवारी को अरुण के परिजनों से इलाज का कोई पैसा न लेने की बात कही। आश्वासन दिया कि अरुण के इलाज का खर्च मुख्यमंत्री राहत कोष से दिलाया जाएगा। उधर, डॉ. राजीव तिवारी का दावा है कि चार दिन से भर्ती अरुण की हालत में मामूली सुधार नजर आ रहा है। आंखें खोलने के साथ ही अरुण की गर्दन में हल्का सा मूवमेंट आ रहा है। बताया कि ऐसे मरीजों के ठीक होने की उम्मीद कम ही होती है, मगर उनका प्रयास और लोगों की दुआएं कबूल हुईं तो अरुण निश्चित रूप से ठीक होंगे।
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सहारनपुर। सड़क हादसे के कारण एक साल से कोमा में चल रहे अरुण को दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद प्रशासन हरकत में आया है। कमिश्नर और डीएम खुद अस्पताल पहुंचे और अरुण की हालत के बारे में चिकित्सक से मुलाकात की। डॉक्टर का दावा है कि चार दिन से भर्ती अरुण की हालत में हल्का सा सुधार है, जो अच्छी बात है।
गंगोह के गांव अलीपुरा निवासी अरुण के साथ एक साल पहले मिर्जापुर के पास सड़क हादसा हुआ था, जिसमें बुरी तरह घायल होने की वजह से वह कोमा में चला गया था। पीजीआई चंडीगढ़ समेत अनेक अस्पतालों में इलाज पर पूरी जमा पूंजी खर्च होने के बाद अरुण का परिवार आर्थिक संकट में है, जिसके पास पेट भरने तक के पैसे नहीं हैं। पिता के कोमा में पड़े होने और परिवार की आर्थिक तंगी से परेशान अरुण की मासूम बेटी इशु ने पिता की फोटो के साथ एक प्रार्थना पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया था। पत्र के माध्यम से इशु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने पिता का इलाज कराने की गुहार लगाई थी। परिवार की बिगड़ती हालत को देखते हुए ग्रामीणों ने कुछ पैसा इकट्ठा कर अरुण को दिल्ली रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। उधर, सोशल मीडिया पर वायरल हुई इशु की मासूम अपील मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय तक पहुंची। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जिला प्रशासन हरकत में आया। शुक्रवार को कमिश्नर दीपक अग्रवाल और डीएम पीके पांडेय अरुण को देखने अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अरुण का इलाज कर रहे डॉ. राजीव तिवारी से अरुण की हालत के बारे में जानकारी ली। डीएम ने डॉ. तिवारी को अरुण के परिजनों से इलाज का कोई पैसा न लेने की बात कही। आश्वासन दिया कि अरुण के इलाज का खर्च मुख्यमंत्री राहत कोष से दिलाया जाएगा। उधर, डॉ. राजीव तिवारी का दावा है कि चार दिन से भर्ती अरुण की हालत में मामूली सुधार नजर आ रहा है। आंखें खोलने के साथ ही अरुण की गर्दन में हल्का सा मूवमेंट आ रहा है। बताया कि ऐसे मरीजों के ठीक होने की उम्मीद कम ही होती है, मगर उनका प्रयास और लोगों की दुआएं कबूल हुईं तो अरुण निश्चित रूप से ठीक होंगे।
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