{"_id":"5bb65c42867a5529516de567","slug":"31538677826-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शादी से पहले दुष्कर्म में पति को दस साल का सश्रम कारावास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शादी से पहले दुष्कर्म में पति को दस साल का सश्रम कारावास
Updated Fri, 05 Oct 2018 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। अदालत ने शादी से पहले अपहरण कर दुष्कर्म के मामले में पति को दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक पीड़ित महिला द्वारा बेहट कोतवाली में दर्ज कराए मुकदमे में बताया था कि उसका पति 23 जुलाई 2013 को किसी काम से बाहर गया हुआ था। उस दिन वह एक मेडिकल स्टोर पर दवाई लेने के लिए गई थी। उसी समय मोहल्ला कस्सावान निवासी इंतजार उसकी गैर मौजूदगी में शाम करीब साढ़े छह बजे उसके घर पहुंचा और उसकी नाबालिग पुत्री का तमंचे से आतंकित कर अपहरण कर ले गया। मोहल्ले के लोगों ने आरोपी को उसकी बेटी का अपहरण करते हुए देखा। दूसरे दिन सुबह सात बजे इंतजार के मामू असरार का फोन आया कि उसकी बेटी रईदगाह पर है। उसे ले जाओ। जब सभी लोग वहां पहुंचे तो उसकी बेटी एक बाग में मिली। उसकी बेटी ने बताया कि आरोपी इंतजार ने उसे पूरी रात बाग में रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। किसी को बताने पर उसे और उसके घरवालों को गोली से उड़ाने की धमकी दी।
पुलिस ने आरोपी पर अपहरण एवं दुष्कर्म तथा पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। लगभग पांच साल तक चले मुकदमे में अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सभाजीत यादव ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद दस साल का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा आरोपी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता रविन्द्र तोमर ने सुनवाई के दौरान यह तर्क भी दिया था कि आरोपी पीड़िता के साथ शादी कर उसके साथ रह रहा है। घर में कमाने वाला भी वह अकेला है, इसलिए उसे कम से कम सजा दी जाए। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को सही मानते हुए यह फैसला दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के मुताबिक पीड़ित महिला द्वारा बेहट कोतवाली में दर्ज कराए मुकदमे में बताया था कि उसका पति 23 जुलाई 2013 को किसी काम से बाहर गया हुआ था। उस दिन वह एक मेडिकल स्टोर पर दवाई लेने के लिए गई थी। उसी समय मोहल्ला कस्सावान निवासी इंतजार उसकी गैर मौजूदगी में शाम करीब साढ़े छह बजे उसके घर पहुंचा और उसकी नाबालिग पुत्री का तमंचे से आतंकित कर अपहरण कर ले गया। मोहल्ले के लोगों ने आरोपी को उसकी बेटी का अपहरण करते हुए देखा। दूसरे दिन सुबह सात बजे इंतजार के मामू असरार का फोन आया कि उसकी बेटी रईदगाह पर है। उसे ले जाओ। जब सभी लोग वहां पहुंचे तो उसकी बेटी एक बाग में मिली। उसकी बेटी ने बताया कि आरोपी इंतजार ने उसे पूरी रात बाग में रखा और उसके साथ दुष्कर्म किया। किसी को बताने पर उसे और उसके घरवालों को गोली से उड़ाने की धमकी दी।
विज्ञापन
पुलिस ने आरोपी पर अपहरण एवं दुष्कर्म तथा पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी। लगभग पांच साल तक चले मुकदमे में अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सभाजीत यादव ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद दस साल का सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा आरोपी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता रविन्द्र तोमर ने सुनवाई के दौरान यह तर्क भी दिया था कि आरोपी पीड़िता के साथ शादी कर उसके साथ रह रहा है। घर में कमाने वाला भी वह अकेला है, इसलिए उसे कम से कम सजा दी जाए। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को सही मानते हुए यह फैसला दिया है।
विज्ञापन