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दलितों पर वर्चस्व की सियासी जंग होगी तेज

Wed, 04 Apr 2018 12:12 AM IST
Updated Wed, 04 Apr 2018 12:12 AM IST
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दलितों पर वर्चस्व की सियासी जंग होगी तेज
सहारनपुर। वेस्ट यूपी में सोमवार को हुई हिंसक घटनाओं के बाद दलितों पर वर्चस्व को लेकर सियासी जंग तेज होने के आसार बन गए हैं। लोक सभा चुनाव में छिटके वोट बैंक की गोलबंदी में बसपा जहां कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी, वहीं भाजपा को विरोध के उठे स्वरों के बीच नए सिरे से रणनीति तैयार करनी होगी। भीम आर्मी कितना ही राजनीति से दूर रहने की बात कहे, मगर दलितों को सामाजिक क्रांति के नाम पर जोड़कर वह भी नई लीडरशिप का ख्वाब रखती है। कांग्रेस की दलितों की पुराने घर वापसी की बेताबी भी किसी से छिपी नहीं है।
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सहारनपुर लंबे समय तक बसपा का गढ़ रहा है। बसपा के संस्थापक कांशीराम यहां से लोक सभा का चुनाव लड़े थे। वह बात अलग है कि उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। पार्टी सुप्रीमो और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी हरोड़ा सीट से विधायक रह चुकी हैं। एक समय था जब वेस्ट यूपी के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ लोक सभा सीटों पर बसपा का कब्जा था। सहारनपुर जिले में ही कुल सात विधान सभा में से कम से कम चार सीटों पर बसपा का परचम लहराता था। पिछले लोक सभा चुनाव में दलित वोट बैंक बसपा के पाले से निकलकर भाजपा के पक्ष में जा खड़ा हुआ था। एक साल पहले हुए विधान सभा चुनाव में भी बसपा को जिले में एक भी सीट नसीब नहीं हुई थी। हाल में हुए निकाय चुनावों में जरूर बसपा ने जोरदार उपस्थिति दर्ज कराई है। चार नगरीय निकायों में बसपा ने अपना कब्जा जमाया है। पांच ब्लॉक प्रमुख के अलावा जिला पंचायत की कुर्सी पर भी बसपा के पास है।
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एससी/एसटी एक्ट में संशोधन को लेकर सोमवार को सड़कों पर उतरे दलित समाज में भाजपा के खिलाफ ज्यादा आक्रोश नजर आया। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जमकर जहर उगला गया। दलितों के इस विरोध को कैश करने के लिए तमाम सियासी दल सक्रिय हो गए हैं। बसपा नेताओं ने आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर यही संदेश देने की कोशिश की। बसपा राज में ही उनका हित सुरक्षित है। भीम आर्मी भी दलित वर्ग पर एकाधिकार कर नई लीडरशिप पैदा करने की फिराक में है। हालांकि अभी भीम आर्मी गैर राजनीतिक संगठन होने का दावा कर रही है । बरसों तक दलित वोट बैंक पर काबिज रहने वाली कांग्रेस भी इस मौके पर चूकना नहीं चाहती है। बंद के दौरान हुई हिंसा को लेकर तमाम राजनीतिक दल भाजपा की घेराबंदी में जुट गए हैं। जाहिर है कि आने वाले दिनों में दलितों पर वर्चस्व को लेकर सियासी जंग तेज होने वाली है।
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