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20 अवैध निर्माणों पर कसेगा विकास प्राधिकरण का शिकंजा
Updated Thu, 07 Dec 2017 12:18 AM IST
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सहारनपुर। कागजों में वैध और मौके पर अवैध रूप से हुए निर्माणों पर विकास प्राधिकरण सख्ती के मूड में है। पिछले एक महीने से हुई जांच में प्राथमिक स्तर पर 20 अवैध निर्माणों के खिलाफ विकास प्राधिकरण ने कार्रवाई की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। इसके अलावा पांच वर्ष में स्वीकृत मानचित्र के बाद हुए निर्माणों की जांच की जा रह रही है।
शहर में चौतरफा अवैध निर्माणों की बाढ़ सी आई हुई है। कई अवैध निर्माणों में प्राधिकरण के अभियंताओं और कर्मचारियों की नीयत पर भी सवाल उठ चुके हैं। अभियंताओं की अलमारियों के ताले तोड़कर उनमें से फाइलें जब्त करने की कार्रवाई तक हो चुकी है। पिछले कुछ समय से कमिश्नर दीपक अग्रवाल सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिसके बाद से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में कुछ बदलाव नजर आने लगा है। इन दिनों सहारनपुर विकास प्राधिकरण अवैध निर्माणों पर शिकंजा कसने की कवायद में जुटा है। दरअसल अधिकांश लोगों ने प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराकर भवनों का निर्माण मनमर्जी से कर लिया है। इसके चलते एसडीए ऐसे भवनों की फाइलें खंगाल रहा है, जिनके मानचित्र पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत हुए हैं। ऐसे व्यावसायिक भवन या फिर स्कूल कालेज की बिल्डिंग या फिर आवासीय भवनों की जांच की जा रही है। इसके लिए बाकायदा टीम गठित की जा रही है। प्राधिकरण के अनुसार पांच वर्षों में 3 हजार से अधिक भवनों के मानचित्र स्वीकृत हुए हैं। इनमें से तीन दर्जन लोगों ने ही प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाणपत्र (कंपलीशन सर्टिफिकेट) लिया है, बाकी किसी ने भी पूर्णता प्रमाणपत्र नहीं लिया है। अधिकांश लोगों ने मानचित्र तो स्वीकृत करा लिए हैं मगर निर्माण उनके अनुरूप नहीं किया है।
स्कूल व व्यवसायिक निर्माण पर तिरछी नजर
एसडीए की व्यवसायिक निर्माणों पर तिरछी नजर है। इस बार प्राधिकरण ऐसी शिक्षण संस्थाओं पर भी कार्रवाई करने की तैयारी में है, जिन्होंने बिना मानचित्र पास कराए या मानचित्र से इतर बड़े-बड़े भवनों का निर्माण करा लिया है। विभागीय अभियंताओं ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में शहर में अधिकांश मानचित्र व्यवसायिक भवनों के स्वीकृत हुए हैं। इनमें शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं। इनके मानचित्र तो स्वीकृत हैं मगर, नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य किया गया है। अधिकांश में सेटबैक भी नहीं छोड़ा गया है, यदि सर्वे किया जाए तो ऐसे भवनों की संख्या कुछेक ही होगी, जिनमें सेटबैक छोड़कर निर्माण किया गया है। खासकर स्कूलों व शिक्षण संस्थानों में तो बच्चों की जिंदगी से भी खिलवाड़ करते हुए निर्माण किए गए हैं।
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पूरे शहर में केवल छह के पास पूर्णता प्रमाण पत्र
अवैध निर्माण करने की छूट देने के लिए प्राधिकरण के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। नियमानुसार मानचित्र के तहत भवन निर्माण हुआ है या नहीं। इसके लिए प्राधिकरण को पूर्णता प्रमाण पत्र यानी कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी करना होता है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को मौके पर जाकर भवन का भौतिक सत्यापन करना होता है। मगर एसडीए के अधिकारियों और अभियंताओं ने कभी भी किसी भवन को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है। जानकार हैरानी होगी कि पिछले 20 साल में हुए हजारों निर्माण में से मात्र छह भवनों को यह सर्टिफिकेट जारी किया गया है। विभाग की इस शिथिलता की वजह से ही लोग मानचित्र पास कराकर अपनी मनमर्जी से निर्माण कराते चले आ रहे हैं। मगर अब विभाग इसे लेकर गंभीर नजर आ रहा है। वीसी मनोज सिंह का कहना है कि अब सभी भवनों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यदि कोई निर्माण मानचित्र से अलग हुआ है तो उसे ध्वस्त भी कराया जाएगा।
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शहर में चौतरफा अवैध निर्माणों की बाढ़ सी आई हुई है। कई अवैध निर्माणों में प्राधिकरण के अभियंताओं और कर्मचारियों की नीयत पर भी सवाल उठ चुके हैं। अभियंताओं की अलमारियों के ताले तोड़कर उनमें से फाइलें जब्त करने की कार्रवाई तक हो चुकी है। पिछले कुछ समय से कमिश्नर दीपक अग्रवाल सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जिसके बाद से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली में कुछ बदलाव नजर आने लगा है। इन दिनों सहारनपुर विकास प्राधिकरण अवैध निर्माणों पर शिकंजा कसने की कवायद में जुटा है। दरअसल अधिकांश लोगों ने प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराकर भवनों का निर्माण मनमर्जी से कर लिया है। इसके चलते एसडीए ऐसे भवनों की फाइलें खंगाल रहा है, जिनके मानचित्र पिछले पांच वर्षों में स्वीकृत हुए हैं। ऐसे व्यावसायिक भवन या फिर स्कूल कालेज की बिल्डिंग या फिर आवासीय भवनों की जांच की जा रही है। इसके लिए बाकायदा टीम गठित की जा रही है। प्राधिकरण के अनुसार पांच वर्षों में 3 हजार से अधिक भवनों के मानचित्र स्वीकृत हुए हैं। इनमें से तीन दर्जन लोगों ने ही प्राधिकरण से पूर्णता प्रमाणपत्र (कंपलीशन सर्टिफिकेट) लिया है, बाकी किसी ने भी पूर्णता प्रमाणपत्र नहीं लिया है। अधिकांश लोगों ने मानचित्र तो स्वीकृत करा लिए हैं मगर निर्माण उनके अनुरूप नहीं किया है।
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स्कूल व व्यवसायिक निर्माण पर तिरछी नजर
एसडीए की व्यवसायिक निर्माणों पर तिरछी नजर है। इस बार प्राधिकरण ऐसी शिक्षण संस्थाओं पर भी कार्रवाई करने की तैयारी में है, जिन्होंने बिना मानचित्र पास कराए या मानचित्र से इतर बड़े-बड़े भवनों का निर्माण करा लिया है। विभागीय अभियंताओं ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में शहर में अधिकांश मानचित्र व्यवसायिक भवनों के स्वीकृत हुए हैं। इनमें शिक्षण संस्थान भी शामिल हैं। इनके मानचित्र तो स्वीकृत हैं मगर, नियमों की अनदेखी कर निर्माण कार्य किया गया है। अधिकांश में सेटबैक भी नहीं छोड़ा गया है, यदि सर्वे किया जाए तो ऐसे भवनों की संख्या कुछेक ही होगी, जिनमें सेटबैक छोड़कर निर्माण किया गया है। खासकर स्कूलों व शिक्षण संस्थानों में तो बच्चों की जिंदगी से भी खिलवाड़ करते हुए निर्माण किए गए हैं।
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पूरे शहर में केवल छह के पास पूर्णता प्रमाण पत्र
अवैध निर्माण करने की छूट देने के लिए प्राधिकरण के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। नियमानुसार मानचित्र के तहत भवन निर्माण हुआ है या नहीं। इसके लिए प्राधिकरण को पूर्णता प्रमाण पत्र यानी कंपलीशन सर्टिफिकेट जारी करना होता है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को मौके पर जाकर भवन का भौतिक सत्यापन करना होता है। मगर एसडीए के अधिकारियों और अभियंताओं ने कभी भी किसी भवन को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है। जानकार हैरानी होगी कि पिछले 20 साल में हुए हजारों निर्माण में से मात्र छह भवनों को यह सर्टिफिकेट जारी किया गया है। विभाग की इस शिथिलता की वजह से ही लोग मानचित्र पास कराकर अपनी मनमर्जी से निर्माण कराते चले आ रहे हैं। मगर अब विभाग इसे लेकर गंभीर नजर आ रहा है। वीसी मनोज सिंह का कहना है कि अब सभी भवनों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। यदि कोई निर्माण मानचित्र से अलग हुआ है तो उसे ध्वस्त भी कराया जाएगा।