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जिले में नहीं है रफ्तार मांपने का यंत्र
Updated Thu, 01 Mar 2018 11:04 PM IST
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सहारनपुर। जिले की पुलिस सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए गंभीर नहीं है। फर्राटा भरते वाहनों का चालान काटने का आधार स्पीडोमीटर तक सहारनपुर पुलिस के पास नहीं है। आज तक तेज गति से वाहन चलाने के मामले का एक भी चालान यातायात पुलिस नहीं कर सकी है।
बिगड़ी हुई यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर पुलिस के पास कोई योजना तो है नहीं, दुर्घटनाओं को रोकने की भी कोई व्यवस्था भी नहीं हैं। न तो शहर में ट्रैफिक लाइट ही है और न ही ऐसे यंत्र ही हैं, जिससे गति के बारे में पता किया जा सके। अधिकांश दुर्घटनाएं तेज गति से वाहन चलाने से हो रही हैं। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी युवा अपनी बाइकों को तेज गति से चलाकर न सिर्फ अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी खतरा बन रहे हैं। दिसंबर माह में हुई 202 मौतों में 180 मौतें पुरुषों की रहीं। इनमें से 120 मौतें युवाओं की थीं। इनमें से भी मृतक 90 युवाओं में सिर्फ बाइक सवार रहे। इनमें कुछ तो बाइक की टक्कर लगने से मौत के मुंह में समा गए। इनकी मौत का कारण मोटरसाइकिल की रफ्तार बनी। जनवरी में मंगलनगर चौक पर रात में तेज गति ही दो किशोरों की मौत का कारण बनी। तेज रफ्तार के चलते बाइक से संतुलन बिगड़ गया और खंभे में बाइक जा टकराई। उसके बाद दोनों युवक नाले में जा गिरे और उनकी मौत हो गई। तीन राज्यों की सीमाओं से जुड़े सहारनपुर में वाहनों का काफी संख्या में आवागमन रहता है। लेकिन उनकी गति को लेकर यातायात पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पाती है। आज तक एक भी वाहन का चालान गति के चलते नहीं हो सका है। स्पीडोमीटर होता तो रफ्तार से दौड़ते वाहनों पर शिकंजा कसा जा सकता था।
--। जल्दी ही गति मापने के 10 यंत्र मिलेंगे
यातायात पुलिस अधीक्षक विनीत भटनागर का कहना है कि शहर में तो गति मापने के यंत्रों की आवश्यकता नहीं होती। हाईवे पर इसकी जरूरत होती है। शीघ्र ही सहारनपुर के लिए 10 यंत्र मिलने जा रहे हैं। जिससे वाहनों की गति को माप कर कार्रवाई की जा सके।
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बिगड़ी हुई यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर पुलिस के पास कोई योजना तो है नहीं, दुर्घटनाओं को रोकने की भी कोई व्यवस्था भी नहीं हैं। न तो शहर में ट्रैफिक लाइट ही है और न ही ऐसे यंत्र ही हैं, जिससे गति के बारे में पता किया जा सके। अधिकांश दुर्घटनाएं तेज गति से वाहन चलाने से हो रही हैं। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में भी युवा अपनी बाइकों को तेज गति से चलाकर न सिर्फ अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी खतरा बन रहे हैं। दिसंबर माह में हुई 202 मौतों में 180 मौतें पुरुषों की रहीं। इनमें से 120 मौतें युवाओं की थीं। इनमें से भी मृतक 90 युवाओं में सिर्फ बाइक सवार रहे। इनमें कुछ तो बाइक की टक्कर लगने से मौत के मुंह में समा गए। इनकी मौत का कारण मोटरसाइकिल की रफ्तार बनी। जनवरी में मंगलनगर चौक पर रात में तेज गति ही दो किशोरों की मौत का कारण बनी। तेज रफ्तार के चलते बाइक से संतुलन बिगड़ गया और खंभे में बाइक जा टकराई। उसके बाद दोनों युवक नाले में जा गिरे और उनकी मौत हो गई। तीन राज्यों की सीमाओं से जुड़े सहारनपुर में वाहनों का काफी संख्या में आवागमन रहता है। लेकिन उनकी गति को लेकर यातायात पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पाती है। आज तक एक भी वाहन का चालान गति के चलते नहीं हो सका है। स्पीडोमीटर होता तो रफ्तार से दौड़ते वाहनों पर शिकंजा कसा जा सकता था।
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--। जल्दी ही गति मापने के 10 यंत्र मिलेंगे
यातायात पुलिस अधीक्षक विनीत भटनागर का कहना है कि शहर में तो गति मापने के यंत्रों की आवश्यकता नहीं होती। हाईवे पर इसकी जरूरत होती है। शीघ्र ही सहारनपुर के लिए 10 यंत्र मिलने जा रहे हैं। जिससे वाहनों की गति को माप कर कार्रवाई की जा सके।
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