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रहणा और नुनियारी घाट पटटे जल्द चलने की उम्मीद
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सहारनपुर। डीएम आलोक कुमार पांडेय की सख्ती के बाद जिले के नीलाम हुए पांच घाटों में से दो पर जल्द खनन शुरू होने की उम्मीद है। रहणा और नुनियारी घाट के ठेकेदारों ने पर्यावरण विभाग से एनओसी लेने के बाद अनुबंध की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके चलते शीघ्र ही इन पट्टों से खनन शुरू होने की संभावना है।
जनपद में गत वर्ष मार्च में खनन के पांच पट्टों की ऑनलाइन नीलामी हुई थी। इनमें नुनियारी, रहणा, ढिक्का कलां, दरिया बरामद और कालूवाला पहाड़ीपुर पट्टे शामिल हैं। इनमें से कालूवाला पहाड़ीपुर का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ढिक्का कलां और दरिया बरामद पट्टों की सुनवाई हो चुकी है, लेकिन उन्हें अभी तक पर्यावरण विभाग से एनओसी नहीं मिल सकी है। जबकि रहणा और नुनियारी पट्टों को गत वर्ष नवंबर में ही पर्यावरण का अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल गया था। इसके बाद भी दोनों पट्टा धारक अनुबंध कराने में देरी कर रहे थे। जिसके बारे में जिला खान अधिकारी ने उन्हें पत्र लिखकर जल्द अनुबंध नहीं कराने पर पट्टा निरस्त करने की चेतावनी दी थी। इनमें से रहणा का पट्टा 20 करोड़ और नुनियारी का पट्टा 35 करोड़ रुपये वार्षिक में हुआ था। जिला खान अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि रहणा और नुनियारी घाट को नवंबर में पर्यावरण का अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल गया था। इसके बाद भी दोनों पट्टाधारक अनुबंध कराने में देरी कर रहे थे। जिसे लेकर उन्हें पत्र भी लिखे गए थे। अब जिलाधिकारी की सख्ती के बाद दोनों पट्टाधारक अनुबंध कराने की प्रक्रिया में जुट गए हैं। उम्मीद है जल्द ही वहां खनन शुरू हो जाएगा।
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जनपद में गत वर्ष मार्च में खनन के पांच पट्टों की ऑनलाइन नीलामी हुई थी। इनमें नुनियारी, रहणा, ढिक्का कलां, दरिया बरामद और कालूवाला पहाड़ीपुर पट्टे शामिल हैं। इनमें से कालूवाला पहाड़ीपुर का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। ढिक्का कलां और दरिया बरामद पट्टों की सुनवाई हो चुकी है, लेकिन उन्हें अभी तक पर्यावरण विभाग से एनओसी नहीं मिल सकी है। जबकि रहणा और नुनियारी पट्टों को गत वर्ष नवंबर में ही पर्यावरण का अनापत्ति प्रमाणपत्र मिल गया था। इसके बाद भी दोनों पट्टा धारक अनुबंध कराने में देरी कर रहे थे। जिसके बारे में जिला खान अधिकारी ने उन्हें पत्र लिखकर जल्द अनुबंध नहीं कराने पर पट्टा निरस्त करने की चेतावनी दी थी। इनमें से रहणा का पट्टा 20 करोड़ और नुनियारी का पट्टा 35 करोड़ रुपये वार्षिक में हुआ था। जिला खान अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि रहणा और नुनियारी घाट को नवंबर में पर्यावरण का अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल गया था। इसके बाद भी दोनों पट्टाधारक अनुबंध कराने में देरी कर रहे थे। जिसे लेकर उन्हें पत्र भी लिखे गए थे। अब जिलाधिकारी की सख्ती के बाद दोनों पट्टाधारक अनुबंध कराने की प्रक्रिया में जुट गए हैं। उम्मीद है जल्द ही वहां खनन शुरू हो जाएगा।
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