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शरई अदालतें खोले जाने वाले प्रस्ताव का मुस्लिम महिलाओं ने किया स्वागत
Updated Tue, 10 Jul 2018 12:33 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा देश के हर जिले में शरई अदालतें (दारुलकजा) खोले जाने वाले प्रस्ताव का मुस्लिम महिलाओं ने स्वागत करते हुए कहा कि इससे अदालतों का बोझ भी कम होगा और महिलाओं को शरीयत की रोशनी में जल्द से जल्द इंसाफ भी मिलेगा।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य खुर्शीदा खातून ने कहा कि शरई अदालतों की तादाद बढ़ने से एक ओर जहां अदालतों पर तलाक और पारिवारिक मामलों का बोझ कम होगा। वहीं इससे मुस्लिम महिलाओं के किसी भी मसले का हल शरीयत की रोशनी में होगा और उसमें वक्त भी कम लगेगा। खुर्शीदा खातून ने दोहराया कि भाजपा सरकार तीन तलाक हो या फिर हलाला इनको लेकर चाहे जितने भी कानून बना ले, लेकिन तमाम मुस्लिम महिलाएं शरीयत को मानेगी। उन्होंने कहा कि जीना है तो शरीयत पर और मरना है तो भी शरीयत पर ही। पब्लिक गर्ल्स इंटर कालेज की प्रधानाचार्य सबा हसीब सिद्दीकी ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड का यह अच्छा कदम है। हर जिले में दारुलकजा होगी तो मुस्लिम महिलाओं को कोर्ट कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें शरीयत की रोशनी में अपनी हर समस्या का समाधान मिलेगा। शिक्षिका रुबीना शहजाद ने भी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि दारुलकजा खुलने से शरीयती मामलों में किए जा रहे राजनीतिक हस्तक्षेप में भी कमी आएगी। क्योंकि जब शरीयत से जुड़े मामले कोर्ट तक नहीं पहुंचेंगे तो इस पर किसी को राजनीति करने का मौका भी नहीं मिलेगा। साथ ही कहा कि बोर्ड को जल्द से जल्द इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाना चाहिए।
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य खुर्शीदा खातून ने कहा कि शरई अदालतों की तादाद बढ़ने से एक ओर जहां अदालतों पर तलाक और पारिवारिक मामलों का बोझ कम होगा। वहीं इससे मुस्लिम महिलाओं के किसी भी मसले का हल शरीयत की रोशनी में होगा और उसमें वक्त भी कम लगेगा। खुर्शीदा खातून ने दोहराया कि भाजपा सरकार तीन तलाक हो या फिर हलाला इनको लेकर चाहे जितने भी कानून बना ले, लेकिन तमाम मुस्लिम महिलाएं शरीयत को मानेगी। उन्होंने कहा कि जीना है तो शरीयत पर और मरना है तो भी शरीयत पर ही। पब्लिक गर्ल्स इंटर कालेज की प्रधानाचार्य सबा हसीब सिद्दीकी ने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड का यह अच्छा कदम है। हर जिले में दारुलकजा होगी तो मुस्लिम महिलाओं को कोर्ट कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और उन्हें शरीयत की रोशनी में अपनी हर समस्या का समाधान मिलेगा। शिक्षिका रुबीना शहजाद ने भी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि दारुलकजा खुलने से शरीयती मामलों में किए जा रहे राजनीतिक हस्तक्षेप में भी कमी आएगी। क्योंकि जब शरीयत से जुड़े मामले कोर्ट तक नहीं पहुंचेंगे तो इस पर किसी को राजनीति करने का मौका भी नहीं मिलेगा। साथ ही कहा कि बोर्ड को जल्द से जल्द इस प्रस्ताव को अमलीजामा पहनाना चाहिए।
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