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22 दिनों में सिर्फ 66 क्रय केंद्रों पर ही हुई गेहूं खरीद
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य प्राप्त करना इस बार काफी मुश्किल साबित होगा। पिछले 22 दिनों में जनपद के 92 क्रय केंद्रों में से सिर्फ 66 क्रय केंद्रों पर ही गेहूं आया है। एक अप्रैल से अब तक जनपद में मात्र 1886.728 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हो सकी है। जबकि गत सीजन में इसी अवधि में 8178.09 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। इसका बड़ी वजह बाजार में गेहूं के बेहतर भाव होना माना जा रहा है।
किसानों को बिचौलियों से बचाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के उद्देश्य से सरकार गेहूं की सरकारी खरीद कराती है। इसके लिए जनपद में 92 सरकारी गेहूं क्रय केंद्र खोले गए हैं। इस बार सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। लेकिन बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक है। इस समय 2040 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मंडी में है। इसके चलते जनपद में पिछले 22 दिनों में लक्ष्य का मात्र 1.6 प्रतिशत ही गेहूं खरीद हो सकी है। 26 क्रय केंद्र ऐसे हैं, जहां पर अभी तक बोहनी भी नहीं हो पाई है। मंडी सचिव अशोक गुप्ता का कहना है कि मंडी में इस बार गत वर्ष से अधिक गेहूं की आवक है। इसकी वजह मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक भाव का होना है।
लक्ष्य पूरा करना चुनौती
न्यूनतम समर्थन मूल्य से बाजार भाव अधिक होने का असर गेहूं की सरकारी खरीद पर पड़ रहा है। अब तक 92 क्रय केंद्रों में से सिर्फ 66 पर ही गेहूं खरीद हो सकी है। ऐसे में गेहूं खरीद का लक्ष्य प्राप्त करना बड़ी चुनौती है। - संजीव राय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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एक नजर में गेहूूं की सरकारी खरीद
क्रय केंद्र 92
खरीद करने वाले केंद्र 66
गेहूं खरीद का लक्ष्य 113500 मीट्रिक टन
अब तक खरीदा गया गेहूं 1886.728 मीट्रिक टन
गत वर्ष इसी अवधि में हुई खरीद 8178.09 मीट्रिक टन
नोट: खाद्य विपणन विभाग के 22 अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार।
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सहारनपुर। गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य प्राप्त करना इस बार काफी मुश्किल साबित होगा। पिछले 22 दिनों में जनपद के 92 क्रय केंद्रों में से सिर्फ 66 क्रय केंद्रों पर ही गेहूं आया है। एक अप्रैल से अब तक जनपद में मात्र 1886.728 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हो सकी है। जबकि गत सीजन में इसी अवधि में 8178.09 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था। इसका बड़ी वजह बाजार में गेहूं के बेहतर भाव होना माना जा रहा है।
किसानों को बिचौलियों से बचाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने के उद्देश्य से सरकार गेहूं की सरकारी खरीद कराती है। इसके लिए जनपद में 92 सरकारी गेहूं क्रय केंद्र खोले गए हैं। इस बार सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। लेकिन बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक है। इस समय 2040 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मंडी में है। इसके चलते जनपद में पिछले 22 दिनों में लक्ष्य का मात्र 1.6 प्रतिशत ही गेहूं खरीद हो सकी है। 26 क्रय केंद्र ऐसे हैं, जहां पर अभी तक बोहनी भी नहीं हो पाई है। मंडी सचिव अशोक गुप्ता का कहना है कि मंडी में इस बार गत वर्ष से अधिक गेहूं की आवक है। इसकी वजह मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक भाव का होना है।
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लक्ष्य पूरा करना चुनौती
न्यूनतम समर्थन मूल्य से बाजार भाव अधिक होने का असर गेहूं की सरकारी खरीद पर पड़ रहा है। अब तक 92 क्रय केंद्रों में से सिर्फ 66 पर ही गेहूं खरीद हो सकी है। ऐसे में गेहूं खरीद का लक्ष्य प्राप्त करना बड़ी चुनौती है। - संजीव राय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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एक नजर में गेहूूं की सरकारी खरीद
क्रय केंद्र 92
खरीद करने वाले केंद्र 66
गेहूं खरीद का लक्ष्य 113500 मीट्रिक टन
अब तक खरीदा गया गेहूं 1886.728 मीट्रिक टन
गत वर्ष इसी अवधि में हुई खरीद 8178.09 मीट्रिक टन
नोट: खाद्य विपणन विभाग के 22 अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार।