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त्रिदिवसीय अथर्ववेद परायण यज्ञ पूर्णाहुति व भंडारे के साथ संपन्न
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त्रिदिवसीय अथर्ववेद परायण यज्ञ पूर्णाहुति व भंडारे के साथ संपन्न
गंगोह (सहारनपुर)। आर्य विद्वान आचार्य डॉ. विजेंद्र शास्त्री वेदालंकार ने कहा है कि कुलवंता पत्नी और सुसंस्कारी आज्ञाकारी पुत्र जिस परिवार में होता है, वहां ईश्वर की कृपा लगातार बरसती है। इसके विपरीत कलह प्रिय नार और बदकार पुत्र वाले घरों से संपन्नता व खुशहाली दूर भागती है।
गांव रंगैल में आर्य नेता फूल सिंह नंदा की स्मृति में आयोजित अथर्ववेद परायण यज्ञ के समापन के अवसर पर आचार्य डॉ. विजेंद्र शास्त्री वेदालंकार ने कहा कि बच्चों को जन्म से ही सुसंस्कारित बनाने की आवश्यकता है, उन्होंने कहा कि शुरुआत में संतान का पालन करने के साथ ही तरुणावस्था में उस पर पैनी निगाह रखने और जवान होने पर मित्रवत व्यवहार किये जाने की आवश्यकता है। अपने गीत जहां वेद पढ़ा जाये और हवन किया जाये, ऐसे परिवार को ही स्वर्ग कहा जाता है। स्वामी अभयानंद ने यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म बताते हुए कहा कि यज्ञ से न केवल वातावरण प्रदूषित होता है। अथर्ववेद परायण यज्ञ के तीसरे दिन भी मुख्य यजमान राजकुमार सैनी व उनकी धर्मपत्नी ब्रजेश देवी और ब्रह्मा आचार्य डॉ. विजेंद्र शास्त्री वेदालंकार रहे। इनके अलावा जगपाल सिंह सैनी, चौ. नक्षत्रपाल सिंह, संजय आर्य, डॉ. गुरदेश गोयल, ब्रहमसिंह सैनी, बासोराम, मनीष कुमार, प्रशांत, देवीचंद, कर्मवीर, आर्यबंधु राजेश, मा. योगेंद्र आर्य, मदनपाल, आर्य रणवीर राणा, नरसिंह , रघुनंदन गोयल, नाथीराम, सतपाल, मोनिका, रेखा, मनीषा, नव्या सहित अनेक महिला पुरुष व बच्चों ने पूर्णाहुति दी। समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ।
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गंगोह (सहारनपुर)। आर्य विद्वान आचार्य डॉ. विजेंद्र शास्त्री वेदालंकार ने कहा है कि कुलवंता पत्नी और सुसंस्कारी आज्ञाकारी पुत्र जिस परिवार में होता है, वहां ईश्वर की कृपा लगातार बरसती है। इसके विपरीत कलह प्रिय नार और बदकार पुत्र वाले घरों से संपन्नता व खुशहाली दूर भागती है।
गांव रंगैल में आर्य नेता फूल सिंह नंदा की स्मृति में आयोजित अथर्ववेद परायण यज्ञ के समापन के अवसर पर आचार्य डॉ. विजेंद्र शास्त्री वेदालंकार ने कहा कि बच्चों को जन्म से ही सुसंस्कारित बनाने की आवश्यकता है, उन्होंने कहा कि शुरुआत में संतान का पालन करने के साथ ही तरुणावस्था में उस पर पैनी निगाह रखने और जवान होने पर मित्रवत व्यवहार किये जाने की आवश्यकता है। अपने गीत जहां वेद पढ़ा जाये और हवन किया जाये, ऐसे परिवार को ही स्वर्ग कहा जाता है। स्वामी अभयानंद ने यज्ञ को श्रेष्ठतम कर्म बताते हुए कहा कि यज्ञ से न केवल वातावरण प्रदूषित होता है। अथर्ववेद परायण यज्ञ के तीसरे दिन भी मुख्य यजमान राजकुमार सैनी व उनकी धर्मपत्नी ब्रजेश देवी और ब्रह्मा आचार्य डॉ. विजेंद्र शास्त्री वेदालंकार रहे। इनके अलावा जगपाल सिंह सैनी, चौ. नक्षत्रपाल सिंह, संजय आर्य, डॉ. गुरदेश गोयल, ब्रहमसिंह सैनी, बासोराम, मनीष कुमार, प्रशांत, देवीचंद, कर्मवीर, आर्यबंधु राजेश, मा. योगेंद्र आर्य, मदनपाल, आर्य रणवीर राणा, नरसिंह , रघुनंदन गोयल, नाथीराम, सतपाल, मोनिका, रेखा, मनीषा, नव्या सहित अनेक महिला पुरुष व बच्चों ने पूर्णाहुति दी। समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ।
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