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महाशिवरात्रि पर आर्य समाज ने ऋषि बोधोत्सव मनाया
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महाशिवरात्रि पर आर्य समाज ने ऋषि बोधोत्सव मनाया
अंबेहटा। आर्य समाज की ओर से महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में ऋषि बोधोत्सव मनाया गया। यज्ञ कराने के साथ ही विद्वानों ने पर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। यजमान सुबोध सिंघल रहे। यज्ञ के बाद आर्य समाज के प्रचारक स्वामी अरण्य मुनि ने कहा कि किसी भी चीज को जानना और मानना दो अलग अलग विषय है। बिना जाने किसी भी चीज को मान लेने के कोई मायने नहीं है। बताया कि बिना जाने मान ली गई वस्तु कष्टदाई होती है। स्वामी जी ने कहा कि आज लोगों ने विद्वानों की संगत करना छोड़ दिया है। इसी कारण लोग गलत और सही में फर्क नहीं कर पा रहे हैं। बताया कि तर्क वितर्क से ज्ञान बढ़ता है जो व्यक्ति शंका समाधान नहीं करता उसके ज्ञान में कभी भी बढ़ोतरी नहीं हो सकती। बताया कि महाशिवरात्रि के दिन स्वामी दयानंद सरस्वती ने सच्चे शिव की तलाश करने का संकल्प लेकर ऋषि मुनियों की संगत की तथा वेदों के वास्तविक स्वरूप से लोगों को रूबरू कराया।
स्वामी जी ने कहा कि वेद ईश्वरीय ज्ञान है वेदानुसार जीवन यापन करने वाले लोग हमेशा सुखी रहते है जबकि वेद विपरीत जीवन जीने वाले लोगों को हमेशा कष्ट घेरे रखते है। स्वामी जी ने आहवान किया कि वैदिक संस्कृति का प्रचार प्रसार कर नवयुवकों को इससे परिचित कराए ताकि भारतीय संस्कृति और सभ्यता को जिंदा रखा जा सके। आर्य समाज के प्रधान श्रीराम शर्मा, मंत्री प्रेमचंद सैनी, मनोज आर्य, निशांत मित्तल, अश्वनी आर्य, सुखबीर सिंह, सुबोध सिंघल, डॉ. संजय मित्तल, सरदार सिंह, अनुज आर्य, शुभम, आनंद पाल, श्रुति सिंघल, तनीषा सिंघल आदि उपस्थित रहे।
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अंबेहटा। आर्य समाज की ओर से महाशिवरात्रि पर्व के उपलक्ष्य में ऋषि बोधोत्सव मनाया गया। यज्ञ कराने के साथ ही विद्वानों ने पर्व की महत्ता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञ से हुआ। यजमान सुबोध सिंघल रहे। यज्ञ के बाद आर्य समाज के प्रचारक स्वामी अरण्य मुनि ने कहा कि किसी भी चीज को जानना और मानना दो अलग अलग विषय है। बिना जाने किसी भी चीज को मान लेने के कोई मायने नहीं है। बताया कि बिना जाने मान ली गई वस्तु कष्टदाई होती है। स्वामी जी ने कहा कि आज लोगों ने विद्वानों की संगत करना छोड़ दिया है। इसी कारण लोग गलत और सही में फर्क नहीं कर पा रहे हैं। बताया कि तर्क वितर्क से ज्ञान बढ़ता है जो व्यक्ति शंका समाधान नहीं करता उसके ज्ञान में कभी भी बढ़ोतरी नहीं हो सकती। बताया कि महाशिवरात्रि के दिन स्वामी दयानंद सरस्वती ने सच्चे शिव की तलाश करने का संकल्प लेकर ऋषि मुनियों की संगत की तथा वेदों के वास्तविक स्वरूप से लोगों को रूबरू कराया।
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स्वामी जी ने कहा कि वेद ईश्वरीय ज्ञान है वेदानुसार जीवन यापन करने वाले लोग हमेशा सुखी रहते है जबकि वेद विपरीत जीवन जीने वाले लोगों को हमेशा कष्ट घेरे रखते है। स्वामी जी ने आहवान किया कि वैदिक संस्कृति का प्रचार प्रसार कर नवयुवकों को इससे परिचित कराए ताकि भारतीय संस्कृति और सभ्यता को जिंदा रखा जा सके। आर्य समाज के प्रधान श्रीराम शर्मा, मंत्री प्रेमचंद सैनी, मनोज आर्य, निशांत मित्तल, अश्वनी आर्य, सुखबीर सिंह, सुबोध सिंघल, डॉ. संजय मित्तल, सरदार सिंह, अनुज आर्य, शुभम, आनंद पाल, श्रुति सिंघल, तनीषा सिंघल आदि उपस्थित रहे।
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