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हजरत कुतबे आलम का उर्स आज से, तैयारियां पूरीं

Wed, 27 Feb 2019 12:25 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Feb 2019 12:25 AM IST
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हजरत कुतबे आलम का उर्स आज से, तैयारियां पूरीं
हजरत कुतबे आलम का उर्स आज से, तैयारियां पूरीं
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गंगोह (सहारनपुर)। सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक संत बाबा हरिदास के समकालीन हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल्ल कुद्दुस का उर्स आज से आरंभ हो रहा है। इसकी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। रूहानियत के रिश्ते में बंधे हजरत कुतुबे आलम और संत बाबा हरिदास ने करीब 13 वर्ष एक साथ गुजारे। सूफी संतों के अनेक तबर्रूकात यहां संग्रहित हैं। हुमायुं, इब्राहिम लोदी और बाबर जैसे बादशाह भी यहां हाजिरी देने आते थे। बताते है कि हुमायुं ने ही हजरत कुतुबे आलम की दरगाह बनवाई थी। हजरत कुतुबे आलम का जन्म 860 हिजरी सन 1439 ई. में बाराबंकी के रादौली गांव में हुआ था। 33 वर्ष वहां रहकर वह 38 वर्ष शाहबाद हरियाणा में रहे और 14 वर्ष गंगोह में बिताए। हजरत कुतुबे आलम बचपन से ही काफी धार्मिक थे और हजरत मखदूम साबिर कलियरी के जलाल को जमाल में बदलना इनका बड़ा कारनामा था। हजरत ने मखदूमजहां के पास मजार को एक एक ईंट पर कुरान-ए-पाक को दम करके खुद बनाया था। उन्होंने चालीस साल एक ही गुदडी में व्यतीत किए। वह उसमें हर साल एक टुक्की लगाया करते थे।

समाज के उत्थान के लिए बादशाहों को लिखे थे पत्र
गंगोह।हजरत कुतुबे आलम अपने दौर के माने हुए अदीब भी थे। हजरत कुतुबे आलम सिलसिला साबरिया चिश्तियां के मशहूर सूफिया-ए-कराम में से है। उन्होने उर्दु, अरबी, फारसी और हिंदी में साहित्य लिखकर साम्प्रदायिक सोहार्द और भाईचारें की अलख जगाई। हजरत ने बहुत सी किताबें लिखीं। इनमें अनवारूल आरफीन, रिसाला कदसिया, गराईबुल अवाइद प्रमुख हैं। मजहरूल अजायब एवं रशद नामा इनका प्रारंभिक साहित्य बताया जाता है। शेख जलालुददीन थानेसरी और शेख अब्दुल सत्तार सहारनपुरी इनके खास मुरीदों में से थे, जो बाद में खलीफा बने। हजरत ने समाज के उत्थान के लिए अपने दौर के अमीरों, बादशाहों को पत्र भी लिखे थे। इनके पत्रों को बाद में मकतूबात-ए-कुददूसी के नाम से संकलित किया गया।
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यह रहेगा उर्स की रस्मों रवायतों का सिलसिला
गंगोह।दरगाह मामू आलाबख्श पर 27 फरवरी की शाम गुस्सल का आयोजन होगा। सज्जादानशीं हाजी इरशाद रब्बानी की अगुवाई में सरकारी चादर चढ़ाने के बाद रात में महफिलें कव्वाली सजेगी। 27 फरवरी की रात में ही शाह अता मंजिल में कुल शरीफ का आयोजन होगा और महफिले कव्वाली सजेगी। दरगाहों पर रोशनी की जाएगी। 28 फरवरी को सज्जादानशीं दरगाह शेख सादिक हकीम जफर कुद्दुसी के जेरे साया जुलूस चादर शरीफ निकाला जाएगा। रात में दरगाह में बड़ी रोशनी और कव्वालियों का आयोजन होगा। एक मार्च को जुलूस झुब्बा शरीफ निकलेगा। इसमें जायरीन हजरत कुतबे आलम द्वारा वर्षों जेबतन फरमाई गई गुद्डी पहने दरगाह पिरान कलियर के सज्जादानशीं मंसूर एजाज साबरी का दीदार करेंगे। दो मार्च को सज्जादानशीं शाह मेहताब आलम हजरत कुतबे आलम के मुबारक हाथों से लिखी गई कुरान मजीद के साथ ही संग्रहित तब्बकुर्रात की जियारत कराएंगे। तीन मार्च को सलातो-सलाम एवं मुल्क में अमन और खुशहाली की दुआओं के साथ उर्स का समापन हो जाएगा।
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