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सवर्णों को आरक्षण देने को गैर संवैधानिक बताया
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सवर्णों को आरक्षण देने को गैर संवैधानिक बताया
सहारनपुर। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की बैठक में सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर रोष जताया और इसे गैर संवैधानिक बताया गया। वक्ताआें ने कहा कि भाजपा ने संविधान के मूल ढांचे को आघात पहुंचाया है।
रेलवे स्टेशन स्थित वाल्मीकि मंदिर परिसर में हुई बैठक में भावाधस के प्रदेश उपाध्यक्ष वीर विनोद ने कहा कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था अनुसूचित जाति, जनजातियों के साथ पिछड़ी जातियों के लिए है, न कि उच्च जातियों के लिए। भाजपा सरकार का ऐसा कृत्य गैर संवैधानिक है। इससे संविधान की मूल भावना प्रभावित होती है। मंडल अध्यक्ष सोनू बिरला ने कहा कि केंद्र में आरक्षण व्यवस्था में एससी-एसटी को 21 प्रतिशत, ओबीसी को 27 प्रतिशत, दिव्यांगों को दो प्रतिशत, खेल कोटा दो प्रतिशत, पूर्व सैनिक दो प्रतिशत, स्वतंत्रता सेनानी दो प्रतिशत है। कुल आरक्षण 56 प्रतिशत ही था। शेष 44 प्रतिशत में उच्च जाति के लोग लाभ लेते हैं। एससी, एसटी एवं ओबीसी में 125 उपजातियां हैं, जबकि उच्च जाति में 36 हैं। भाजपा ने उच्च वर्ग को आरक्षण का लाभ देकर तुच्छ मानसिकता का परिचय दिया है। भावाधस के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि सवर्णों को दस प्रतिशत के आरक्षण के निर्णय को वापस नहीं लिया तो 2019 के चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा। बैठक में चौधरी तिलक राज, राजकुमार बिरला, बलबीर कांगड़ा, हुकुम चंद, पारस, अमर, भंवर सिंह, छोटे लाल, रमेश बिरला, हरीश बहोत, सावन बहोत, विजय सिंह, सूरज बबरीक, चुन्नी लाल, सोनू राजोरिया, अमन पुहाल, ममतेश, राखी कांगड़ा, रीटा कांगड़ा मौजूद रहे।
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सहारनपुर। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज की बैठक में सवर्णों को दस प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर रोष जताया और इसे गैर संवैधानिक बताया गया। वक्ताआें ने कहा कि भाजपा ने संविधान के मूल ढांचे को आघात पहुंचाया है।
रेलवे स्टेशन स्थित वाल्मीकि मंदिर परिसर में हुई बैठक में भावाधस के प्रदेश उपाध्यक्ष वीर विनोद ने कहा कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था अनुसूचित जाति, जनजातियों के साथ पिछड़ी जातियों के लिए है, न कि उच्च जातियों के लिए। भाजपा सरकार का ऐसा कृत्य गैर संवैधानिक है। इससे संविधान की मूल भावना प्रभावित होती है। मंडल अध्यक्ष सोनू बिरला ने कहा कि केंद्र में आरक्षण व्यवस्था में एससी-एसटी को 21 प्रतिशत, ओबीसी को 27 प्रतिशत, दिव्यांगों को दो प्रतिशत, खेल कोटा दो प्रतिशत, पूर्व सैनिक दो प्रतिशत, स्वतंत्रता सेनानी दो प्रतिशत है। कुल आरक्षण 56 प्रतिशत ही था। शेष 44 प्रतिशत में उच्च जाति के लोग लाभ लेते हैं। एससी, एसटी एवं ओबीसी में 125 उपजातियां हैं, जबकि उच्च जाति में 36 हैं। भाजपा ने उच्च वर्ग को आरक्षण का लाभ देकर तुच्छ मानसिकता का परिचय दिया है। भावाधस के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि सवर्णों को दस प्रतिशत के आरक्षण के निर्णय को वापस नहीं लिया तो 2019 के चुनाव में इसका जवाब दिया जाएगा। बैठक में चौधरी तिलक राज, राजकुमार बिरला, बलबीर कांगड़ा, हुकुम चंद, पारस, अमर, भंवर सिंह, छोटे लाल, रमेश बिरला, हरीश बहोत, सावन बहोत, विजय सिंह, सूरज बबरीक, चुन्नी लाल, सोनू राजोरिया, अमन पुहाल, ममतेश, राखी कांगड़ा, रीटा कांगड़ा मौजूद रहे।
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