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जहान-ए-अदब एकेडमी ने कराया महफिल-ए-मुशायरा

Tue, 16 Apr 2019 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Apr 2019 11:48 PM IST
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जहान-ए-अदब एकेडमी ने कराया महफिल-ए-मुशायरा
देवबंद (सहारनपुर)। बैरुन कोटला स्थित उर्दू घर में जहान-ए-अदब एकेडमी की ओर से महफिल-ए-मुशायरा आयोजित किया गया। जिसमें शायरों के कलाम सुनकर श्रोता झूम उठे।
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कार्यक्रम का उद्घाटन शायर डा. सलीम फारूकी ने फीता काटकर किया, जबकि शमा रोशन इकराम अंसारी, माहिर हसन और फहाद मसूदी द्वारा की गई। इसके बाद शायरों ने अपने कलाम पढ़ने शुरू किए। तनवीर अजमल ने पढ़ा फिर घड़ी का चलना भी ना गवार होता है, जब किसी का शिद्दत से इंतजार होता है। डा. दिलशाद खुश्तर ने कहा खुश्तर यह लग रहा है करीब इंतखाब है, वो फिर मीठी बातें बनाने आ गए। डा. सलीम फारूकी ने पढ़ा बरकते खुदा बा खुद घर में आएगी, बेकसों को जरा आसरा दीजिए। अब्दुल्लाह राही ने कहा फूलों की जुस्तजू में जो कांटों से मिले हैं, वह जख्म किसने देखे हैं तितली के पांव में। डा. अदनान अनवर ने पढ़ा जिसका खुलूस मेरे लिए एक मिसाल था, मिलता है मुझसे हाथ में पत्थर लिए हुए। डा. शमीम देवबंदी ने कहा हमेशा है जिसको फूल लिखा, उसी ने यारों बाबूल लिखा। जकी अंजुम ने पढ़ा सियासी पेड़ पर फल मुश्किलों से आते हैं, यहां फरेब का मौसम लगाना पड़ता है। नफीस अहमद ने कहा भले लोग उसको बुरा जानते हैं, बहुत बोलना होशियारी नहीं है। इनके अलावा सलीम तन्हा, वली वकास, चांद देवबंदी, जुगाड़ देवबंदी, अनवर हुसैन और सुहेल देवबंदी ने भी अपने कलाम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। इस मौके पर कातिब अहसान इलाही, मो. गाजी, नबील मसूदी, मो. जिया, अफजल गौड़, आरिफ कुरैशी आदि रहे।
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