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न्यूनतम मूल्य पर भूमि अधिग्रहीत किए जाने का विरोध
Updated Sun, 23 Sep 2018 12:49 AM IST
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न्यूनतम मूल्य पर भूमि अधिग्रहीत किए जाने का विरोध
देवबंद। क्षेत्र के लोगों ने रेलवे द्वारा देवबंद-रुड़की रेल लाइन के निर्माण के लिए भूमि को न्यूनतम मूल्य पर अधिग्रहीत किए जाने का विरोध किया है। इस संबंध में भूमि मालिकों ने शनिवार को एसडीएम को ज्ञापन देकर 2017 की सर्किल मूल्यांकन सूची के हिसाब से भूमि का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
एसडीएम ऋतु पुनिया को प्रेषित ज्ञापन में भाजपा नेता डा. महेंद्र सैनी, नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन इनाम कुरैशी, फैजान खान, रविंदर सैनी आदि ने बताया कि उनके यहां अभी चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। चकों पर कब्जे की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन अभी तक अंतिम अभिलेख तैयार नहीं हुए हैं। ग्राम का धारा 52 प्रकाशन अभी तक नहीं हुआ है। चकबंदी प्रक्रिया में अर्जित भूमि को शामिल करते हुए आकार पत्र 23 दिए गए हैं। जिससे स्पष्ट है कि उक्त भूमि ग्रामीण क्षेत्र की है जिसे रेलवे विभाग देवबंद-रुड़की रेलवे लाइन के लिए अर्जित कर रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त भूमि को तहसीलदार की रिपोर्ट में बिना किसी आधार के नगरीय घोषित करके उसका एक गुणा मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि कृषि भूमि का मुआवजा रेलवे अधिनियम के अनुसार 4 गुना मिलना चाहिए। यदि उनकी भूमि को नगरीय माना जाता है तो 4200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए जो वर्ष 2017 की सर्किल रेट मूल्यांकन सूची के अनुसार है। लेकिन यदि भूमि को ग्रामीण क्षेत्र माना जाता है तो सर्किट रेट चार गुणा दिया जाना आवश्यक है। इस प्रकार तहसीलदार की रिपोर्ट अवैधानिक है जिसे खंडित करते हुए प्रतिकर ग्रामीण भूमि के आधार पर उचित सर्किल रेट दिया जाना चाहिए। ज्ञापन देने वालों में सुहैल मलिक, जियाउल्लाह खान, धर्मपाल सैनी, दीवान सैनी, सचिन सैनी, युनूस खां, सन्नवर खां, मौ. साजिद, खुर्शीद अंसारी, अनस मलिक, दीपक सैनी आदि मौजूद रहे।
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देवबंद। क्षेत्र के लोगों ने रेलवे द्वारा देवबंद-रुड़की रेल लाइन के निर्माण के लिए भूमि को न्यूनतम मूल्य पर अधिग्रहीत किए जाने का विरोध किया है। इस संबंध में भूमि मालिकों ने शनिवार को एसडीएम को ज्ञापन देकर 2017 की सर्किल मूल्यांकन सूची के हिसाब से भूमि का मुआवजा दिलाने की मांग की है।
एसडीएम ऋतु पुनिया को प्रेषित ज्ञापन में भाजपा नेता डा. महेंद्र सैनी, नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन इनाम कुरैशी, फैजान खान, रविंदर सैनी आदि ने बताया कि उनके यहां अभी चकबंदी की प्रक्रिया चल रही है। चकों पर कब्जे की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन अभी तक अंतिम अभिलेख तैयार नहीं हुए हैं। ग्राम का धारा 52 प्रकाशन अभी तक नहीं हुआ है। चकबंदी प्रक्रिया में अर्जित भूमि को शामिल करते हुए आकार पत्र 23 दिए गए हैं। जिससे स्पष्ट है कि उक्त भूमि ग्रामीण क्षेत्र की है जिसे रेलवे विभाग देवबंद-रुड़की रेलवे लाइन के लिए अर्जित कर रहा है। उन्होंने बताया कि उक्त भूमि को तहसीलदार की रिपोर्ट में बिना किसी आधार के नगरीय घोषित करके उसका एक गुणा मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि कृषि भूमि का मुआवजा रेलवे अधिनियम के अनुसार 4 गुना मिलना चाहिए। यदि उनकी भूमि को नगरीय माना जाता है तो 4200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए जो वर्ष 2017 की सर्किल रेट मूल्यांकन सूची के अनुसार है। लेकिन यदि भूमि को ग्रामीण क्षेत्र माना जाता है तो सर्किट रेट चार गुणा दिया जाना आवश्यक है। इस प्रकार तहसीलदार की रिपोर्ट अवैधानिक है जिसे खंडित करते हुए प्रतिकर ग्रामीण भूमि के आधार पर उचित सर्किल रेट दिया जाना चाहिए। ज्ञापन देने वालों में सुहैल मलिक, जियाउल्लाह खान, धर्मपाल सैनी, दीवान सैनी, सचिन सैनी, युनूस खां, सन्नवर खां, मौ. साजिद, खुर्शीद अंसारी, अनस मलिक, दीपक सैनी आदि मौजूद रहे।
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