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अधूरे अनुबंध पत्रों पर चल रहे निगम के सफाई ठेके
Updated Sat, 28 Jul 2018 12:45 AM IST
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सहारनपुर। नगर निगम में करीब साढ़े नौ से सफाई कर्मचारी ठेके पर रखे गए हैं। मगर जानकर हैरानी होगी कि ठेकेदारों के अनुबंध के कागज कंपलीट नहीं हैं, जिससे नगर निगम के अधिकारियों की लापरवाही साबित हो रही है। अनेक अनुबंध के कागजों में ठेकेदारों के नाम तक नहीं हैं। ऐसे में यदि कोई ठेकेदार गड़बड़ी कर या गबन कर भाग जाता है तो नगर निगम के पास कोई आधार नहीं है उसके विरुद्घ कार्रवाई करने का।
शहर के 70 वार्डों में सफाई के लिए ठेके पर सफाईकर्मी रखे गए हैं। पिछले वर्ष करीब 50 ठेके सफाई के लिए छोड़े गए थे। यह ठेके पौने दो लाख से सवा दो लाख रुपये तक के हैं। नियमानुसार ठेकेदारों से अनुबंध किया जाना था। जिन स्टांप पर अनुबंध किया गया है उनमें कहीं ठेकेदार का नाम तक नहीं है तो कहीं हस्ताक्षर नहीं हैं। सूत्रों ने बताया कि अनुबंध के कागज कंपलीट नहीं होने की वजह से लगातार मानदेय जारी करने में भी परेशानी आ रही है। सवाल यह है कि ठेकेदारों का अनुबंध खत्म होने को है, जिसमें मुश्किल से दो महीने बचे हैं। ऐसे में अनुबंध के कागज आज तक पूरे क्यों नहीं किए गए? विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि ठेकेदार कोई गड़बड़ी करता है तो अनुबंध के कागज पूरे नहीं होने की वजह से नगर निगम उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।
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अनुबंध लेटर पर ठेका संख्या और तमाम शर्तें होती हैं, जिस पर ठेकेदार के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में यदि अनुबंध लेटर पर ठेकेदार का नाम नहीं लिखा हो तो कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि हस्ताक्षर अपने आप में पर्याप्त है। ऐसे में अनुबंध पत्रों को अधूरा कहना ठीक नहीं है।
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डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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शहर के 70 वार्डों में सफाई के लिए ठेके पर सफाईकर्मी रखे गए हैं। पिछले वर्ष करीब 50 ठेके सफाई के लिए छोड़े गए थे। यह ठेके पौने दो लाख से सवा दो लाख रुपये तक के हैं। नियमानुसार ठेकेदारों से अनुबंध किया जाना था। जिन स्टांप पर अनुबंध किया गया है उनमें कहीं ठेकेदार का नाम तक नहीं है तो कहीं हस्ताक्षर नहीं हैं। सूत्रों ने बताया कि अनुबंध के कागज कंपलीट नहीं होने की वजह से लगातार मानदेय जारी करने में भी परेशानी आ रही है। सवाल यह है कि ठेकेदारों का अनुबंध खत्म होने को है, जिसमें मुश्किल से दो महीने बचे हैं। ऐसे में अनुबंध के कागज आज तक पूरे क्यों नहीं किए गए? विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि ठेकेदार कोई गड़बड़ी करता है तो अनुबंध के कागज पूरे नहीं होने की वजह से नगर निगम उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है।
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अनुबंध लेटर पर ठेका संख्या और तमाम शर्तें होती हैं, जिस पर ठेकेदार के हस्ताक्षर होते हैं। ऐसे में यदि अनुबंध लेटर पर ठेकेदार का नाम नहीं लिखा हो तो कोई बड़ी बात नहीं है, क्योंकि हस्ताक्षर अपने आप में पर्याप्त है। ऐसे में अनुबंध पत्रों को अधूरा कहना ठीक नहीं है।
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