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व्यापारियों ने सांसद को ज्ञापन दिया
Updated Mon, 26 Feb 2018 11:57 PM IST
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व्यापारियों ने सांसद को ज्ञापन दिया
सहारनपुर। ई-वे बिल की विसंगतियों को दूर करने और निर्यातकों का रिफंड तत्काल दिलाने सहित अन्य मांगों को लेकर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने सांसद राघव लखनपाल शर्मा को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी द्वारा किए जाने वाले सर्वे पर भी रोक लगाने की मांग की।
सोमवार को सांसद को सौंपे ज्ञापन में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने कहा कि ट्रायल पर चल रहे केंद्रीय ई वे बिल होने के बाद प्रदेश और राज्य से बाहर अन्य प्रदेशों के ई वे बिल को मान्यता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश में लागू बहती व्यवस्था पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब व्यापारी के पास सभी वैध प्रपत्रों के साथ ई-वे फार्म है तो ऐसे में बहती का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि जीएसटी नियमों के अनुसार सप्लायर द्वारा जारी ई-वे बिल को वैधानिक घोषित किया जाए।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय ई-वे बिल होने के बावजूद व्यापारियों और उद्यमियों से प्रदेश में वसूल की गई पेनल्टी और जमानत राशि को तत्काल वापस किया जाए। व्यापारियों ने कहा कि प्रदेश से इंस्पेक्टरराज को समाप्त करने के लिए पंजीकृत व्यापारी के यहां छापे पर रोक लगाई जाए। उन्होंने एसआईबी द्वारा किए जाने वाले सर्वे एवं छापे पर रोक लगाने के साथ ही इसमें अधिकारियों की जवाबदेही तय करने सहित अन्य मांग की। वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विमल विरमानी, प्रेमसागर ग्रोवर, पंकज कालडा, हर्ष डाबर, अश्वनी अरोड़ा, अनित गर्ग, सिराज हसन फारूखी, प्रवीण गोयल, सरदार गुरमेहर सिंह, रजत मित्तल, रमन वर्मा, पंकज बजाज, मनोज चितकारा आदि रहे।
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सहारनपुर। ई-वे बिल की विसंगतियों को दूर करने और निर्यातकों का रिफंड तत्काल दिलाने सहित अन्य मांगों को लेकर अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने सांसद राघव लखनपाल शर्मा को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी द्वारा किए जाने वाले सर्वे पर भी रोक लगाने की मांग की।
सोमवार को सांसद को सौंपे ज्ञापन में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने कहा कि ट्रायल पर चल रहे केंद्रीय ई वे बिल होने के बाद प्रदेश और राज्य से बाहर अन्य प्रदेशों के ई वे बिल को मान्यता नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश में लागू बहती व्यवस्था पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब व्यापारी के पास सभी वैध प्रपत्रों के साथ ई-वे फार्म है तो ऐसे में बहती का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि जीएसटी नियमों के अनुसार सप्लायर द्वारा जारी ई-वे बिल को वैधानिक घोषित किया जाए।
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उन्होंने कहा कि केंद्रीय ई-वे बिल होने के बावजूद व्यापारियों और उद्यमियों से प्रदेश में वसूल की गई पेनल्टी और जमानत राशि को तत्काल वापस किया जाए। व्यापारियों ने कहा कि प्रदेश से इंस्पेक्टरराज को समाप्त करने के लिए पंजीकृत व्यापारी के यहां छापे पर रोक लगाई जाए। उन्होंने एसआईबी द्वारा किए जाने वाले सर्वे एवं छापे पर रोक लगाने के साथ ही इसमें अधिकारियों की जवाबदेही तय करने सहित अन्य मांग की। वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विमल विरमानी, प्रेमसागर ग्रोवर, पंकज कालडा, हर्ष डाबर, अश्वनी अरोड़ा, अनित गर्ग, सिराज हसन फारूखी, प्रवीण गोयल, सरदार गुरमेहर सिंह, रजत मित्तल, रमन वर्मा, पंकज बजाज, मनोज चितकारा आदि रहे।
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