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अभियान के नाम पर उत्पीड़न का आरोप
Updated Fri, 09 Feb 2018 11:50 PM IST
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अभियान के नाम पर उत्पीड़न का आरोप
देवबंद (सहारनपुर)। नगर में प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे अभियान के नाम पर कुछ भू-स्वामियों ने उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ भूखंडों को सरकारी और अवैध कब्जा बताकर हटाने का दबाव बनाया जा रह है। जबकि वह उनकी निजी संपत्ति है। देवी कुंड मेला गेट के समीप सिनेमा हाल, मंदिर, प्लाट और दुकानें आदि बने हैं। इनके स्वामी गगन मेहता, नवीन मित्तल, राममूर्ति, सोनिया, अरुण कुमार, प्रदीप गर्ग, महेंद्र कुमार, आलोक कुमार, घनश्याम आदि ने बताया कि उनके पास जमीन संबंधी सभी कागजात मौजूद हैं। जबकि नागेश्वर मंदिर का एक कुआं है जो पुरानी खतौनी में दर्ज है। इसलिए यहां पर सरकारी भूमि होने का कोई औचित्य नहीं है। इस कुएं को लोक निर्माण विभाग, उपसा और एपको कंपनी के अधिकारी देख चुके हैं। किंतु इसे नजर अंदाज करके यहां के निर्माण कार्य को अवैध बताकर बलपूर्वक हटाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कारण सभी लोग मानसिक रूप से परेशान हैं। इन लोगों का कहना है कि यदि सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि की आवश्यकता है तो अधिकारी उनसे बातचीत करके पारस्परिक समझौते के उचित मुआवजा दें तो वह भूमि देने को तैयार है। यदि बलपूर्वक कार्रवाई होगी तो वह अनुचित होगी जिसका विरोध किया जाएगा।
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देवबंद (सहारनपुर)। नगर में प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे अभियान के नाम पर कुछ भू-स्वामियों ने उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कुछ भूखंडों को सरकारी और अवैध कब्जा बताकर हटाने का दबाव बनाया जा रह है। जबकि वह उनकी निजी संपत्ति है। देवी कुंड मेला गेट के समीप सिनेमा हाल, मंदिर, प्लाट और दुकानें आदि बने हैं। इनके स्वामी गगन मेहता, नवीन मित्तल, राममूर्ति, सोनिया, अरुण कुमार, प्रदीप गर्ग, महेंद्र कुमार, आलोक कुमार, घनश्याम आदि ने बताया कि उनके पास जमीन संबंधी सभी कागजात मौजूद हैं। जबकि नागेश्वर मंदिर का एक कुआं है जो पुरानी खतौनी में दर्ज है। इसलिए यहां पर सरकारी भूमि होने का कोई औचित्य नहीं है। इस कुएं को लोक निर्माण विभाग, उपसा और एपको कंपनी के अधिकारी देख चुके हैं। किंतु इसे नजर अंदाज करके यहां के निर्माण कार्य को अवैध बताकर बलपूर्वक हटाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कारण सभी लोग मानसिक रूप से परेशान हैं। इन लोगों का कहना है कि यदि सड़क चौड़ीकरण के लिए भूमि की आवश्यकता है तो अधिकारी उनसे बातचीत करके पारस्परिक समझौते के उचित मुआवजा दें तो वह भूमि देने को तैयार है। यदि बलपूर्वक कार्रवाई होगी तो वह अनुचित होगी जिसका विरोध किया जाएगा।