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कांग्रेस में जिलाध्यक्ष पद को लेकर खींचतान
Updated Mon, 22 Jan 2018 12:37 AM IST
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सहारनपुर। कांग्रेस में जिलाध्यक्ष पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। महापौर का चुनाव लड़े शशी वालिया ने चुनाव खत्म होने के बाद जिलाध्यक्ष के तौर पर कमान संभाल ली है, जबकि चुनाव के दौरान कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बनाए गए जावेद साबरी भी जिलाध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं। पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद भी वर्तमान में जावेद साबरी के साथ हैं। ऐसे में पार्टी में जिला स्तर पर नया विवाद खड़ा हो गया है।
निकाय चुनाव में महापौर पद के टिकट को लेकर कांग्रेस में तत्कालीन जिलाध्यक्ष शशी वालिया और जावेद साबरी दावेदार थे। पार्टी ने जिलाध्यक्ष शशी वालिया को महापौर का चुनाव लड़ाया था, जबकि जावेद साबरी को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। जिलाध्यक्ष बनने की शर्त पर ही उन्होंने टिकट की जिद छोड़ी थी। महापौर सीट के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शशी वालिया तीसरे नंबर पर रहे। तब से जावेद साबरी पार्टी में जिलाध्यक्ष की हैसियत से काम करते आ रहे हैं। मगर दूसरी ओर शशी वालिया भी खुद को जिलाध्यक्ष बता रहे हैं। जिलाध्यक्ष के तौर पर उन्होंने सड़क हादसे में मारे गए दो किशोरों के परिजनों से रविवार को मुलाकात की। साथ ही बैठक भी की। उनका कहना है कि उन्हें प्रदेशाध्यक्ष राज बब्बर ने जिले में जाकर काम करने को कहा है। राज बब्बर ने ही मृतक किशोरों के परिजनों से मिलने को कहा है। उन्होंने बताया कि जावेद साबरी भी जिलाध्यक्ष हैं मगर वह कार्यवाहक हैं। जब तक अगली व्यवस्था नहीं हो जाती यानी नया जिलाध्यक्ष नहीं बन जाता, तब तक मैं जिलाध्यक्ष और जावेद साबरी कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बने रहेंगे। पार्टी का संविधान भी यही कहता है। उधर, जावेद साबरी ने इस मामले में चुप्पी साध ली है। उनका कहना है कि उन्हें इमरान मसूद ने जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में इमरान मसूद ही जवाब देंगे।
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मेरी नजर में अब केवल जावेद साबरी ही जिलाध्यक्ष हैं। इसी शर्त पर मैंने महापौर का टिकट शशी वालिया को दिलवाया था। यह भी सच है कि जावेद साबरी को कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बनाया गया था, मगर अभी कार्यकारिणी का पुनर्गठन नहीं हुआ है। कोई बैठक ऐसी नहीं हुई है, जिसमें शशी वालिया को पुन: जिम्मेदारी दे दी गई हो। किसी भी पद को लेकर पार्टी में इस तरह का माहौल अच्छी बात नहीं है। इस संबंध में दोनों से बात की जाएगी।
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इमरान मसूद, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस।
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निकाय चुनाव में महापौर पद के टिकट को लेकर कांग्रेस में तत्कालीन जिलाध्यक्ष शशी वालिया और जावेद साबरी दावेदार थे। पार्टी ने जिलाध्यक्ष शशी वालिया को महापौर का चुनाव लड़ाया था, जबकि जावेद साबरी को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। जिलाध्यक्ष बनने की शर्त पर ही उन्होंने टिकट की जिद छोड़ी थी। महापौर सीट के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी शशी वालिया तीसरे नंबर पर रहे। तब से जावेद साबरी पार्टी में जिलाध्यक्ष की हैसियत से काम करते आ रहे हैं। मगर दूसरी ओर शशी वालिया भी खुद को जिलाध्यक्ष बता रहे हैं। जिलाध्यक्ष के तौर पर उन्होंने सड़क हादसे में मारे गए दो किशोरों के परिजनों से रविवार को मुलाकात की। साथ ही बैठक भी की। उनका कहना है कि उन्हें प्रदेशाध्यक्ष राज बब्बर ने जिले में जाकर काम करने को कहा है। राज बब्बर ने ही मृतक किशोरों के परिजनों से मिलने को कहा है। उन्होंने बताया कि जावेद साबरी भी जिलाध्यक्ष हैं मगर वह कार्यवाहक हैं। जब तक अगली व्यवस्था नहीं हो जाती यानी नया जिलाध्यक्ष नहीं बन जाता, तब तक मैं जिलाध्यक्ष और जावेद साबरी कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बने रहेंगे। पार्टी का संविधान भी यही कहता है। उधर, जावेद साबरी ने इस मामले में चुप्पी साध ली है। उनका कहना है कि उन्हें इमरान मसूद ने जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में इमरान मसूद ही जवाब देंगे।
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मेरी नजर में अब केवल जावेद साबरी ही जिलाध्यक्ष हैं। इसी शर्त पर मैंने महापौर का टिकट शशी वालिया को दिलवाया था। यह भी सच है कि जावेद साबरी को कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बनाया गया था, मगर अभी कार्यकारिणी का पुनर्गठन नहीं हुआ है। कोई बैठक ऐसी नहीं हुई है, जिसमें शशी वालिया को पुन: जिम्मेदारी दे दी गई हो। किसी भी पद को लेकर पार्टी में इस तरह का माहौल अच्छी बात नहीं है। इस संबंध में दोनों से बात की जाएगी।
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इमरान मसूद, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस।