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पूछो परवाने से, क्या सुख मिलता है, जलकर मर जाने पर
Updated Tue, 15 May 2018 12:17 AM IST
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सहारनपुर। विभावरी साहित्यिक संस्कृति संस्था द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
विष्णुधाम कॉलोनी में आयोजित काव्य गोष्ठी मुख्य विषय मातृ दिवस रहा। मुुख्य अतिथि के रूप में पंकज गर्ग, विशिष्ट अतिथि महावीर सिंह रहे। पंकज गर्ग ने कहा कि गम की बारिश में तन्हा न था, साथ मेरे नहाई गजल। महावीर सिंह वीर ने कहा कि भले ही बात गम की हो, मगर गम कौन करता है, किसी की मौत पर यहां आंखें नम कौन करता है। डा. विजेंद्र पाल शर्मा ने कहा कि आओ अच्छा बुरा है क्या ढूंढे, अपने दिल की किताब खोलकर। डा. आरपी सारस्वत ने कहा कि पूछो परवाने से, क्या सुख मिलता है, जलकर मर जाने पर। हरिराम पथिक, डा. इरशाद सागर, विनोद भृंग, नरेंद्र मस्ताना ने भी अपनी प्रस्तुति दी। अनीता गोयल, वीणा सारस्वत, कांता शर्मा, शिवदेवी आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता सुशांत सिंघल और संचालन डा. विजेंद्र पाल शर्मा ने किया।
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विष्णुधाम कॉलोनी में आयोजित काव्य गोष्ठी मुख्य विषय मातृ दिवस रहा। मुुख्य अतिथि के रूप में पंकज गर्ग, विशिष्ट अतिथि महावीर सिंह रहे। पंकज गर्ग ने कहा कि गम की बारिश में तन्हा न था, साथ मेरे नहाई गजल। महावीर सिंह वीर ने कहा कि भले ही बात गम की हो, मगर गम कौन करता है, किसी की मौत पर यहां आंखें नम कौन करता है। डा. विजेंद्र पाल शर्मा ने कहा कि आओ अच्छा बुरा है क्या ढूंढे, अपने दिल की किताब खोलकर। डा. आरपी सारस्वत ने कहा कि पूछो परवाने से, क्या सुख मिलता है, जलकर मर जाने पर। हरिराम पथिक, डा. इरशाद सागर, विनोद भृंग, नरेंद्र मस्ताना ने भी अपनी प्रस्तुति दी। अनीता गोयल, वीणा सारस्वत, कांता शर्मा, शिवदेवी आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता सुशांत सिंघल और संचालन डा. विजेंद्र पाल शर्मा ने किया।