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जातीय गुणा भाग में जुटे प्रत्याशी और राजनीतिक दल
Updated Mon, 20 Nov 2017 12:38 AM IST
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जातीय गुणा भाग में जुटे प्रत्याशी और राजनीतिक दल
सहारनपुर। जनपद में होने जा रहे निकाय चुनाव में सबसे अधिक जोर पहली बार हो रहे मेयर सीट के चुनाव पर है। तमाम राजनीतिक दल जातीय समीकरण के आधार पर अपनी-अपनी जीत तलाश रहे हैं। सबसे अधिक संख्या में मुस्लिम मतदाता है, जिनपर भाजपा को छोड़कर सभी दलों की नजर है। नगर में कुल पांच लाख 34 हजार 236 मतदाता हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या मुस्लिम मतदाताओं की है, जिनके बाद दूसरे नंबर पर पंजाबी समाज आता है। यह दोनों समाज के मतदाताओं का रुझान ही मेयर प्रत्याशी की हार और जीत तय करेगा। यही वजह है कि भाजपा को छोड़कर सपा, बसपा और कांग्रेस की नजर मुस्लिम मतदाताओं पर है। तीनों दलों ने मुस्लिम इलाकों में सबसे अधिक सभाएं और जनसंपर्क अभी तक किया है। उधर, भाजपा का जोर सबसे अधिक पंजाबी समाज, वैश्य समाज और सवर्णों पर है, जो उसका वोट बैंक भी है। इसके अलावा वह दलित मतों में भी सेंध लगाना चाहती है। इसके अलावा गुर्जर, सैनी, जाट और अन्य वर्गों के मतदाताओं पर भी उसकी नजर है। कांग्रेस मुस्लिम और दलित के साथ ही सामान्य मतदाताओं को अपनी ओर करने का प्रयास कर रही है। बसपा की बात करें तो बसपा मुस्लिम और दलित मतदाताओं के साथ ही सामान्य वर्ग के मतों में सेंधमारी करने में जुटी है। सपा मुस्लिम के साथ ही वैश्य समाज के मतों को अपना सबसे मजबूत वोट बैंक मान रही है। अन्य के मतों को वह बोनस के रूप में देख रही है। अब देखना यह है कि किस राजनीतिक दल का गणित सटीक बैठता है और कौन नगर का पहला मेयर बनता है।
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सहारनपुर। जनपद में होने जा रहे निकाय चुनाव में सबसे अधिक जोर पहली बार हो रहे मेयर सीट के चुनाव पर है। तमाम राजनीतिक दल जातीय समीकरण के आधार पर अपनी-अपनी जीत तलाश रहे हैं। सबसे अधिक संख्या में मुस्लिम मतदाता है, जिनपर भाजपा को छोड़कर सभी दलों की नजर है। नगर में कुल पांच लाख 34 हजार 236 मतदाता हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या मुस्लिम मतदाताओं की है, जिनके बाद दूसरे नंबर पर पंजाबी समाज आता है। यह दोनों समाज के मतदाताओं का रुझान ही मेयर प्रत्याशी की हार और जीत तय करेगा। यही वजह है कि भाजपा को छोड़कर सपा, बसपा और कांग्रेस की नजर मुस्लिम मतदाताओं पर है। तीनों दलों ने मुस्लिम इलाकों में सबसे अधिक सभाएं और जनसंपर्क अभी तक किया है। उधर, भाजपा का जोर सबसे अधिक पंजाबी समाज, वैश्य समाज और सवर्णों पर है, जो उसका वोट बैंक भी है। इसके अलावा वह दलित मतों में भी सेंध लगाना चाहती है। इसके अलावा गुर्जर, सैनी, जाट और अन्य वर्गों के मतदाताओं पर भी उसकी नजर है। कांग्रेस मुस्लिम और दलित के साथ ही सामान्य मतदाताओं को अपनी ओर करने का प्रयास कर रही है। बसपा की बात करें तो बसपा मुस्लिम और दलित मतदाताओं के साथ ही सामान्य वर्ग के मतों में सेंधमारी करने में जुटी है। सपा मुस्लिम के साथ ही वैश्य समाज के मतों को अपना सबसे मजबूत वोट बैंक मान रही है। अन्य के मतों को वह बोनस के रूप में देख रही है। अब देखना यह है कि किस राजनीतिक दल का गणित सटीक बैठता है और कौन नगर का पहला मेयर बनता है।