{"_id":"5a074f544f1c1bce408b612a","slug":"161510428500-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जो इल्म दूसरों को ना दे वह मुर्दे के समान है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जो इल्म दूसरों को ना दे वह मुर्दे के समान है
Updated Sun, 12 Nov 2017 01:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर। छोटा इमामबाड़ा मोहल्ला अंसारियान में असगर मैहदी काजमी के 40वें के मौके पर बजम-ए-कुरआन की महफिल व कुरआन खानी की गई।
कुरआन खानी के बाद मरसिया खानी हुई। मरसिया पढ़ने वालों में शबीहुल हसन, सलीस हैदर काजमी, खुवाजा हसन मोहम्मद शामिल रहे। मजालिस को खिताब करते हुये लंदन से आए हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मो. हसन मारूफी कहा कि चलता फिरता इंसान, जो इल्म हासिल करने के बाद भी अपना इल्म दूसरों को ना दे, वह मुर्दे के समान है, जो इंसान इल्म को बांटता है। वह अपने इल्म की वजह से हमेशा जिंदा रहता है। असगर मैहदी काजमी एक इंजीनियर थे। उन्होंने अपनी जिंदगी कौम के बच्चों को सुधारने के लिये वक्फ कर दी थी। आज भी असगर मैहदी काजमी हमारे दरमियान कुरआन हदीस के इल्म की वजह से जिंदा है। उनके इल्म से जो रोशनी दिख रही है, वह उनके जिंदा होने की अलामत है। कहा कि रुके हुए हुआ पानी में कीड़े पैदा हो जाते हैं, चलते हुए पानी में कभी कीड़े पैदा नहीं होते। इसलिए हमें अपनी जिंदगी में कुछ ऐसा काम करना चाहिए, जिससे हम चलते फिरते दिखाई दें। मजलिस में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का फलसफा ब्यान किया गया। जलाल उमर, शाहिद जुबैरी, मौलाना मेहराज मैहदी, मौलाना मंजर, सादिक आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कुरआन खानी के बाद मरसिया खानी हुई। मरसिया पढ़ने वालों में शबीहुल हसन, सलीस हैदर काजमी, खुवाजा हसन मोहम्मद शामिल रहे। मजालिस को खिताब करते हुये लंदन से आए हुज्जतुल इस्लाम मौलाना मो. हसन मारूफी कहा कि चलता फिरता इंसान, जो इल्म हासिल करने के बाद भी अपना इल्म दूसरों को ना दे, वह मुर्दे के समान है, जो इंसान इल्म को बांटता है। वह अपने इल्म की वजह से हमेशा जिंदा रहता है। असगर मैहदी काजमी एक इंजीनियर थे। उन्होंने अपनी जिंदगी कौम के बच्चों को सुधारने के लिये वक्फ कर दी थी। आज भी असगर मैहदी काजमी हमारे दरमियान कुरआन हदीस के इल्म की वजह से जिंदा है। उनके इल्म से जो रोशनी दिख रही है, वह उनके जिंदा होने की अलामत है। कहा कि रुके हुए हुआ पानी में कीड़े पैदा हो जाते हैं, चलते हुए पानी में कभी कीड़े पैदा नहीं होते। इसलिए हमें अपनी जिंदगी में कुछ ऐसा काम करना चाहिए, जिससे हम चलते फिरते दिखाई दें। मजलिस में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का फलसफा ब्यान किया गया। जलाल उमर, शाहिद जुबैरी, मौलाना मेहराज मैहदी, मौलाना मंजर, सादिक आदि मौजूद रहे।