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रिपोर्ट की सियासत
Updated Tue, 13 Jun 2017 12:47 AM IST
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सहारनपुर हिंसा पर सरकार की रिपोर्ट से बैकफुट पर विपक्ष
सहारनपुर। जातीय हिंसा की लपटों में झुलस रहे सहारनपुर पर तैयार गृह विभाग की रिपोर्ट ने सियासत को गरमा दिया है। हालांकि इस रिपोर्ट में सांसद की भूमिका पर सवाल उठाकर आक्रामक हो रहे विपक्ष को बैकफुट पर कर दिया गया है। बावजूद इसके इस रिपोर्ट पर अब धीरे-धीरे सियासी सरगर्मी तेज होगी। आने वाले निकाय चुनाव में यह रिपोर्ट भी राजनीतिक दलों के मुद्दे में शामिल होगी।
दरअसल, प्रमुख सचिव गृह ने सहारनपुर हिंसा पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में सियासी भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इसमें भाजपा सांसद और बसपा के अलावा मुस्लिम नेताओं की भूमिका पर संदेह जताया है। रिपोर्ट के बाद सहारनपुर की सियासत धीरे-धीरे गरमा रही है। मगर, सांसद की घेराबंदी होने से विपक्ष के पास ज्यादा आक्रामक होना का मुद्दा नहीं है। यह माना जा रहा है कि गृह विभाग की रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार भी सहमति होगी। ऐसे में प्रदेश सरकार की इस रिपोर्ट के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। कानून के राज का दावा करने वाले प्रदेश सरकार ने सांसद की भूमिका पर सवाल उठाकर इसका संदेश भी देने की कोशिश की है। यही कारण है कि हिंसा के बाद आक्रामक हो रहे विपक्ष भी इस रिपोर्ट के बाद सरकार पर ज्यादा सवाल नहीं उठा पाएगा। आपको बता दें कि इससे पहले भी सड़क दूधली प्रकरण में सांसद और सत्ताधारी पार्टी के विधायकों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद विपक्ष ज्यादा हमलावर नहीं हो पाया था। उधर, इस गृह विभाग की रिपोर्ट के बाद सांसद खेमा भी अब अगली रणनीति बनाने में जुटा है।
सहारनपुर हिंसा में दलितों पर अत्याचार हुआ है। इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे। सांसद की भूमिका पर सवाल नहीं, बल्कि कार्रवाई की जाए। अगर प्रदेश सरकार निष्पक्ष कार्रवाई करना चाहती है तो सबसे पहले पीड़ितों को मुआवजा दे और हिंसा के मुख्य आरोपी सांसद पर कार्रवाई करे।
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नरेश सैनी, विधायक
भाजपा ने हमेशा बंटवारे की राजनीति की है। समाजवादी पार्टी सहारनपुर हिंसा में पीड़ितों के साथ है। आगामी निकाय चुनाव में हम जनता के बीच प्रदेश सरकार की इस असफलता को लेकर जाएंगे।
जगपाल सिंह गुर्जर, जिलाध्यक्ष सपा
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सहारनपुर। जातीय हिंसा की लपटों में झुलस रहे सहारनपुर पर तैयार गृह विभाग की रिपोर्ट ने सियासत को गरमा दिया है। हालांकि इस रिपोर्ट में सांसद की भूमिका पर सवाल उठाकर आक्रामक हो रहे विपक्ष को बैकफुट पर कर दिया गया है। बावजूद इसके इस रिपोर्ट पर अब धीरे-धीरे सियासी सरगर्मी तेज होगी। आने वाले निकाय चुनाव में यह रिपोर्ट भी राजनीतिक दलों के मुद्दे में शामिल होगी।
दरअसल, प्रमुख सचिव गृह ने सहारनपुर हिंसा पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में सियासी भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। इसमें भाजपा सांसद और बसपा के अलावा मुस्लिम नेताओं की भूमिका पर संदेह जताया है। रिपोर्ट के बाद सहारनपुर की सियासत धीरे-धीरे गरमा रही है। मगर, सांसद की घेराबंदी होने से विपक्ष के पास ज्यादा आक्रामक होना का मुद्दा नहीं है। यह माना जा रहा है कि गृह विभाग की रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार भी सहमति होगी। ऐसे में प्रदेश सरकार की इस रिपोर्ट के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। कानून के राज का दावा करने वाले प्रदेश सरकार ने सांसद की भूमिका पर सवाल उठाकर इसका संदेश भी देने की कोशिश की है। यही कारण है कि हिंसा के बाद आक्रामक हो रहे विपक्ष भी इस रिपोर्ट के बाद सरकार पर ज्यादा सवाल नहीं उठा पाएगा। आपको बता दें कि इससे पहले भी सड़क दूधली प्रकरण में सांसद और सत्ताधारी पार्टी के विधायकों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद विपक्ष ज्यादा हमलावर नहीं हो पाया था। उधर, इस गृह विभाग की रिपोर्ट के बाद सांसद खेमा भी अब अगली रणनीति बनाने में जुटा है।
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सहारनपुर हिंसा में दलितों पर अत्याचार हुआ है। इस मुद्दे को सदन में उठाएंगे। सांसद की भूमिका पर सवाल नहीं, बल्कि कार्रवाई की जाए। अगर प्रदेश सरकार निष्पक्ष कार्रवाई करना चाहती है तो सबसे पहले पीड़ितों को मुआवजा दे और हिंसा के मुख्य आरोपी सांसद पर कार्रवाई करे।
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नरेश सैनी, विधायक
भाजपा ने हमेशा बंटवारे की राजनीति की है। समाजवादी पार्टी सहारनपुर हिंसा में पीड़ितों के साथ है। आगामी निकाय चुनाव में हम जनता के बीच प्रदेश सरकार की इस असफलता को लेकर जाएंगे।
जगपाल सिंह गुर्जर, जिलाध्यक्ष सपा