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कुत्तों ने परिवार की खुशी छीनी
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बेहट। दयालपुर गांव में आदमखोर हो चुके कुत्तों के झुंड ने तीन दिन में दो मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। दो बच्चों की मौत से ग्रामीण दहशत में हैं। ओमकरण के यहां छह बेटियों के बाद बेटा हुआ था जिसे कुत्तों ने अपना शिकार बना लिया।
गांव की दलित बस्ती में शुक्रवार को ओमकरण के 28 दिन के मासूम बच्चे को कुत्तों ने घर से उठाकर मार डाला। ओमकरण के यहां 6 पुत्रियों के बाद लड़का हुआ था। 28 दिन पहले जब उसकी पत्नी अमरेशो ने लड़के को जन्म दिया, तो उसके परिवार में उत्सव सा माहौल था। बेटा होने की खुशी में लोगों को भोज भी कराया था, लेकिन आदमखोर कुत्तों ने बड़ी मन्नतों के बाद पैदा हुए उनके जिगर के टुकड़े को उनसे छीन लिया। यह सदमा मृतक की दादी सुमित्रा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और बार-बार अपने पोते के शव की तरफ देखकर फूट-फूट कर रोते हुए बेहोश हो रही थी। पिता ओमकरण गुम था और मकान की सीढ़ियों पर बैठा बेबस निगाहों से देख रहा था। अमरेशो भी गुमसुम सी बैठी थी। हर कोई इस परिवार के साथ हुई घटना से सदमे में था। तीन दिन पहले इसी बस्ती में इन आदमखोर कुत्तों ने रजनीश के परिवार के इकलौते चिराग को बुझा दिया था।
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गांव की दलित बस्ती में शुक्रवार को ओमकरण के 28 दिन के मासूम बच्चे को कुत्तों ने घर से उठाकर मार डाला। ओमकरण के यहां 6 पुत्रियों के बाद लड़का हुआ था। 28 दिन पहले जब उसकी पत्नी अमरेशो ने लड़के को जन्म दिया, तो उसके परिवार में उत्सव सा माहौल था। बेटा होने की खुशी में लोगों को भोज भी कराया था, लेकिन आदमखोर कुत्तों ने बड़ी मन्नतों के बाद पैदा हुए उनके जिगर के टुकड़े को उनसे छीन लिया। यह सदमा मृतक की दादी सुमित्रा बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और बार-बार अपने पोते के शव की तरफ देखकर फूट-फूट कर रोते हुए बेहोश हो रही थी। पिता ओमकरण गुम था और मकान की सीढ़ियों पर बैठा बेबस निगाहों से देख रहा था। अमरेशो भी गुमसुम सी बैठी थी। हर कोई इस परिवार के साथ हुई घटना से सदमे में था। तीन दिन पहले इसी बस्ती में इन आदमखोर कुत्तों ने रजनीश के परिवार के इकलौते चिराग को बुझा दिया था।
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