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कतारों में लगने से छूट रहे गर्भवती महिलाओं के पसीने

Thu, 27 Jun 2019 12:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 27 Jun 2019 12:54 AM IST
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कतारों में लगने से छूट रहे गर्भवती महिलाओं के पसीने
सहारनपुर। गर्भावस्था में जरा सी लापरवाही महिला के साथ ही उसके बच्चे पर भारी पड़ सकती है। चिकित्सक भी गर्भवती महिलाओं को जरूरी सावधानियों से अवगत कराते हैं, मगर अफसोस है कि जिला महिला चिकित्सालय में ही गर्भवती महिलाओं को लाइनों में लगने की पीड़ा सहना पड़ रहा है। लाइन भी एक नहीं, बल्कि कई स्तर पर लगती हैं, जहां गर्भवती महिलाएं खड़े रहकर इंतजार करती हैं।
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अमर उजाला टीम ने बुधवार को जिला महिला चिकित्सालय की लाइव कवरेज की, तो गर्भवती महिलाओं की पीड़ा उभरकर सामने आई। दरअसल, जिला महिला अस्पताल में एक दिन में एक हजार से अधिक महिलाएं इलाज कराने पहुंचती हैं, जिनमें बड़ी संख्या गर्भवती महिलाओं की होती है। जिनका पहले माह से इलाज चल रहा होता है। खुद चिकित्सक सलाह देते हैं कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए। घर में भारी भरकम कामकाज करने से बचने से लेकर ज्यादा देर तक खड़े न रहने, खानपान की सलाह भी दी जाती है। बावजूद इसके जिला महिला चिकित्सालय में महिलाओं को लाइन में लगकर परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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इस तरह झेलती हैं महिलाएं पीड़ा
पहले तो महिलाओं को पर्ची बनवाने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने के लिए कतार लगती है। यदि चिकित्सक जांच की सलाह देते हैं, तो अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच के लिए कतार में लगना पड़ता है। अंत में मेडिकल स्टोर से दवा लेने के लिए लाइन लगती है। पर्ची बनवाने को लाइन में लगी मंडी समिति रोड निवासी शमीना ने बताया कि वह आधे घंटे से लाइन में लगी है, तो अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लाइन में लगी शीला का कहना था कि पौन घंटा हो गया, अब तक नंबर नहीं आया है। इसी तरह अन्य महिलाओं ने भी अपनी समस्या बयां की।
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ओपीडी के सामने डाली गईं कुर्सियां हैं नाकाफी
अस्पताल प्रशासन की तरफ से महिला जिला चिकित्सालय में ओपीडी के सामने ही कुर्सियां लगवाई गई हैं, लेकिन जितनी संख्या में रोजाना महिलाएं पहुंचती हैं, उतनी कुर्सियां नहीं हैं। इस कारण कुछ महिलाएं बैठ जाती हैं, तो बाकी महिलाओं को खड़े रहना पड़ता है।
दवा वितरण का है सिर्फ एक काउंटर
हैरत की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के पहुंचने के बावजूद दवा के लिए एक ही काउंटर बना है। ऐसे में डेढ़ से दो घंटे तक लाइनों में लगने से गर्भवती महिलाओं के पसीने छूट रहे हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो गर्भवती महिलाओं को अधिक देर खड़े नहीं रहना चाहिए।
- अवकाश पर अल्ट्रासाउंड चिकित्सक
जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए लगी अल्ट्रासाउंड मशीन करीब एक माह से बंद पड़ी है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि अल्ट्रासाउंड करने वाले चिकित्सक लंबी छुट्टी पर हैं। ऐेसे में सामान्य मरीजों के साथ ही गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड के लिए पुरुष अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। दोनों अस्पतालों के मरीजों की वजह से अल्ट्रासाउंड के बाहर लंबी कतारें लग रही है। खास बात यह है कि अल्ट्रासाउंड करने के लिए पुरुष चिकित्सक है। साथ में स्टाफ भी पुरुष ही है। ऐसे में कई गर्भवती महिलाओं को असुविधा रहती है।


महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने वाला डॉक्टर बाहर गया हुआ है। ऐसे में महिला अस्पताल में पहुंचने वाली महिलाओं के अल्ट्रासाउंड जिला अस्पताल में कराए जा रहे हैं। अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर मांगा गया है। रही बात गर्भवती महिलाओं के कतार में खड़े रहने की तो अस्पताल में बैठने के लिए कुर्सियां हैं। गर्भवती महिलाओं की जगह परिजन भी लाइन में लगकर पर्ची बनवा सकते हैं या दवा ले सकते हैं।
डॉक्टर अनीता जोशी, सीएमएस महिला अस्पताल।
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