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चकबंदी पर विवाद
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चकबंदी पर दो फाड़ हुए ग्रामीण, विरोध पर टीम लौटी
नकुड़ (सहारनपुर)। चकबंदी को लेकर गांव रामगढ़ में ग्रामीण दो फाड़ हो गए हैं। कुछ ग्रामीण चकबंदी के पक्ष में नजर आए, वहीं कुछ लोगों ने इसका विरोध करते हुए जमकर हंगामा किया। मामला बढ़ता देख अधिकारी बिना किसी निर्णय के वापस चले गए।
मंगलवार को एसडीएम पीएस राणा के नेतृत्व में चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने गांव रामगढ़ में खुली बैठक का आयोजन कर लोगों की राय जानी। जिस पर कुछ लोगों ने चकबंदी का विरोध करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। जबकि कुछ लोग चकबंदी कराने की मांग कर रहे थे। बताया जाता है कि अधिकारियों के सामने ही दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मामला बढ़ते देख एसडीएम ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर किसी तरह शांत किया। जिसके बाद अधिकारी बिना किसी निर्णय के ही वापस लौट गए।
पांच दिन पूर्व गांव टाबर में भी चकबंदी सीओ गुरदीप सिंह ने चकबंदी को लेकर गांव में खुली बैठक का आयोजन कर लोगों की राय जानी थी। जिसमें अधिकतर लोगों ने चकबंदी के विरोध में हस्ताक्षर किए थे। जबकि कुछ लोग वहां भी चकबंदी के पक्ष में थे। गौरतलब है कि तहसील क्षेत्र के कई गांवों में कृषि भूमि का बंदोबस्त करने की प्रक्रिया विचाराधीन है। लेकिन अब इन गांवों के अधिकतर किसान चकबंदी नहीं चाहते हैं। एसडीएम ने बताया कि रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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नकुड़ (सहारनपुर)। चकबंदी को लेकर गांव रामगढ़ में ग्रामीण दो फाड़ हो गए हैं। कुछ ग्रामीण चकबंदी के पक्ष में नजर आए, वहीं कुछ लोगों ने इसका विरोध करते हुए जमकर हंगामा किया। मामला बढ़ता देख अधिकारी बिना किसी निर्णय के वापस चले गए।
मंगलवार को एसडीएम पीएस राणा के नेतृत्व में चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने गांव रामगढ़ में खुली बैठक का आयोजन कर लोगों की राय जानी। जिस पर कुछ लोगों ने चकबंदी का विरोध करते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। जबकि कुछ लोग चकबंदी कराने की मांग कर रहे थे। बताया जाता है कि अधिकारियों के सामने ही दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मामला बढ़ते देख एसडीएम ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर किसी तरह शांत किया। जिसके बाद अधिकारी बिना किसी निर्णय के ही वापस लौट गए।
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पांच दिन पूर्व गांव टाबर में भी चकबंदी सीओ गुरदीप सिंह ने चकबंदी को लेकर गांव में खुली बैठक का आयोजन कर लोगों की राय जानी थी। जिसमें अधिकतर लोगों ने चकबंदी के विरोध में हस्ताक्षर किए थे। जबकि कुछ लोग वहां भी चकबंदी के पक्ष में थे। गौरतलब है कि तहसील क्षेत्र के कई गांवों में कृषि भूमि का बंदोबस्त करने की प्रक्रिया विचाराधीन है। लेकिन अब इन गांवों के अधिकतर किसान चकबंदी नहीं चाहते हैं। एसडीएम ने बताया कि रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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