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नोटा से भी पिछड़ गई आम आदमी पार्टी
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सहारनपुर। दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी सहारनपुर लोकसभा सीट पर नोटा से भी पिछड़ गई हैं। चुनाव में उसके प्रत्याशी योगेश दहिया को मात्र 1449 मत प्राप्त हुए, जबकि नोटा को 4277 मत मिले। निर्दलीय प्रत्याशी शबनम कुरैशी 4683 वोट लेकर आम आदमी पार्टी से आगे रहीं। हालांकि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी योगेश दहिया पिछले कई वर्षों से लगातार अपनी टीम के साथ जनता के बीच में सक्रिय हैं।
आम आदमी पार्टी जनता के बीच अपनी सक्रियता को वोटों में तब्दील करने में विफल साबित हुई है। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी योगेश दहिया मात्र 1449 पर ही सिमट गए जबकि पिछले आम चुनाव में उन्हें 3065 वोट प्राप्त हुए थे। 4277 वोट लेकर नोटा भी इनसे आगे रहा। आम आदमी पार्टी से अधिक वोट तो निर्दलीय प्रत्याशी शबनम कुरैशी को ही मिल गए। शबनम को 4683 मत प्राप्त हुए। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी योगेश दहिया दलगत राजनीति में सक्रिय होने से पहले फारमर्स फोरम के बैनर तले किसानों के विभिन्न मुद्दों पर संघर्ष करते रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ किसानों को भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा दिलाने की लड़ाई लड़ी बल्कि किसानों को बकाया गन्ना मूल्य और ब्याज दिलाने के लिए भी उन्होंने संघर्ष किया। फारमर्स फोरम ने किसानों की मांगों को लेकर कमिश्नर कार्यालय पर भी करीब दो माह तक धरना दिया था। पिछले लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद योगेश दहिया अपनी टीम के साथ फील्ड में सक्रिय रहे। लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने वाले तमाम प्रत्याशियों से पहले ही उन्होंने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी थी। इसके तहत उन्होंने न सिर्फ गांव गांव जाकर जनसंपर्क किया बल्कि शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रियता बनाए रखी। तमाम कोशिशों के बाद भी वे अपने संघर्ष और सक्रियता को वोटों में तब्दील नहीं कर सके।
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आम आदमी पार्टी जनता के बीच अपनी सक्रियता को वोटों में तब्दील करने में विफल साबित हुई है। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी योगेश दहिया मात्र 1449 पर ही सिमट गए जबकि पिछले आम चुनाव में उन्हें 3065 वोट प्राप्त हुए थे। 4277 वोट लेकर नोटा भी इनसे आगे रहा। आम आदमी पार्टी से अधिक वोट तो निर्दलीय प्रत्याशी शबनम कुरैशी को ही मिल गए। शबनम को 4683 मत प्राप्त हुए। आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी योगेश दहिया दलगत राजनीति में सक्रिय होने से पहले फारमर्स फोरम के बैनर तले किसानों के विभिन्न मुद्दों पर संघर्ष करते रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ किसानों को भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा दिलाने की लड़ाई लड़ी बल्कि किसानों को बकाया गन्ना मूल्य और ब्याज दिलाने के लिए भी उन्होंने संघर्ष किया। फारमर्स फोरम ने किसानों की मांगों को लेकर कमिश्नर कार्यालय पर भी करीब दो माह तक धरना दिया था। पिछले लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद योगेश दहिया अपनी टीम के साथ फील्ड में सक्रिय रहे। लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने वाले तमाम प्रत्याशियों से पहले ही उन्होंने अपनी चुनावी तैयारियां शुरू कर दी थी। इसके तहत उन्होंने न सिर्फ गांव गांव जाकर जनसंपर्क किया बल्कि शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रियता बनाए रखी। तमाम कोशिशों के बाद भी वे अपने संघर्ष और सक्रियता को वोटों में तब्दील नहीं कर सके।
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