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पुलिस ने अपने ही दरोगा को उत्पीड़न के मुकदमे में लपेटा
Updated Thu, 13 Sep 2018 12:28 AM IST
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छुटमलपुर (सहारनपुर)। खेल करने में माहिर पुलिस ने अपने ही एक सेवानिवृत्त पुलिस उपनिरीक्षक को अवैध हिरासत में उत्पीड़न के आरोप में दर्ज हुए मुकदमे में लपेट दिया। हैरत की बात तो यह है कि जिस थाने की हवालात में युवक के साथ उत्पीड़न की घटना दर्शाई गई है, उस थाने में तो दूर की बात उपनिरीक्षक पूरे जिले में भी कहीं अपने सेवाकाल के दौरान तैनात नहीं रहा है। अब सेवानिवृत्त हो चुके पीड़ित उप निरीक्षक ने सीएम और डीजीपी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
फतेहपुर भादो गांव निवासी पुलिस विभाग से एसआई के पद से सेवानिवृत्त हुए महेंद्र सिंह शर्मा पुत्र चमनलाल शर्मा ने सीएम को भेजे प्रार्थना पत्र में अवगत कराया कि थाना छपरौली बागपत निवासी महावीर के बेटे उपेंद्र को जून 1999 में थाना खेकड़ा और बागपत की हवालातों में अवैध रूप से रखकर मारपीट के मामले में मानवाधिकार आयोग की टीम की संस्तुति पर थाना बागपत में खेकड़ा के पांच और बागपत के छह पुलिसकर्मियों पर 16 जून को मुकदमा दर्ज हुआ था। इस रिपोर्ट में उनका नाम नहीं था। शासन के आदेश पर इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी। निरीक्षक वेनी सिंह वर्मा द्वारा विवेचना शुरू करने के बाद निरीक्षक माता प्रसाद शुक्ला और उसके बाद निरीक्षक आरपी शर्मा द्वारा 20 नवंबर 2004 तक केस डायरी में उनका नाम नहीं था, लेकिन आरोप है कि 22 नवंबर 2004 को दूसरे निरीक्षक द्वारा मुकदमे से एक एसआई का नाम हटाकर अगली विवेचना में हटाए गए पुलिसकर्मी की जगह उनका नाम शामिल कर दिया गया। जबकि इससे पूर्व किसी भी विवेचक ने उनका नाम नहीं दर्ज किया था। ना ही वादी द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में उनका नाम है।
पीड़ित महेंद्र शर्मा का कहना है कि मुकदमे में साजिशन उनका नाम आने से वे मानसिक रुप से परेशान है। उन्हें अपनी जमानत करानी पड़ी। वे अपने पूरे सेवाकाल के दौरान कभी भी बागपत जिले में तैनात नहीं रहे हैं। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई अपने तैनाती स्थलों का ब्यौरा भी सीएम को भेजा है। उन्होंने बताया कि वे 68 वर्ष के है जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से कई प्रकार की बीमारियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच करा कर उनका नाम फर्जी रूप से रिपोर्ट में बदलने वाले निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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फतेहपुर भादो गांव निवासी पुलिस विभाग से एसआई के पद से सेवानिवृत्त हुए महेंद्र सिंह शर्मा पुत्र चमनलाल शर्मा ने सीएम को भेजे प्रार्थना पत्र में अवगत कराया कि थाना छपरौली बागपत निवासी महावीर के बेटे उपेंद्र को जून 1999 में थाना खेकड़ा और बागपत की हवालातों में अवैध रूप से रखकर मारपीट के मामले में मानवाधिकार आयोग की टीम की संस्तुति पर थाना बागपत में खेकड़ा के पांच और बागपत के छह पुलिसकर्मियों पर 16 जून को मुकदमा दर्ज हुआ था। इस रिपोर्ट में उनका नाम नहीं था। शासन के आदेश पर इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी। निरीक्षक वेनी सिंह वर्मा द्वारा विवेचना शुरू करने के बाद निरीक्षक माता प्रसाद शुक्ला और उसके बाद निरीक्षक आरपी शर्मा द्वारा 20 नवंबर 2004 तक केस डायरी में उनका नाम नहीं था, लेकिन आरोप है कि 22 नवंबर 2004 को दूसरे निरीक्षक द्वारा मुकदमे से एक एसआई का नाम हटाकर अगली विवेचना में हटाए गए पुलिसकर्मी की जगह उनका नाम शामिल कर दिया गया। जबकि इससे पूर्व किसी भी विवेचक ने उनका नाम नहीं दर्ज किया था। ना ही वादी द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे में उनका नाम है।
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पीड़ित महेंद्र शर्मा का कहना है कि मुकदमे में साजिशन उनका नाम आने से वे मानसिक रुप से परेशान है। उन्हें अपनी जमानत करानी पड़ी। वे अपने पूरे सेवाकाल के दौरान कभी भी बागपत जिले में तैनात नहीं रहे हैं। उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई अपने तैनाती स्थलों का ब्यौरा भी सीएम को भेजा है। उन्होंने बताया कि वे 68 वर्ष के है जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से कई प्रकार की बीमारियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच करा कर उनका नाम फर्जी रूप से रिपोर्ट में बदलने वाले निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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