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‘...फासलों से इश्क लेकिन और गहरा हो गया’
Updated Tue, 03 Jul 2018 12:13 AM IST
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‘...फासलों से इश्क लेकिन और गहरा हो गया’
देवबंद (सहारनपुर)। मोहल्ला बड़ी खानकाह में रविवार रात दिल्ली के शायरों के सम्मान में महफिल मुशायरा आयोजित किया गया। इसमें शायरों ने अपने मनपसंद कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
मुशायरे का आगाज जुहेर अहमद की नाते पाक से हुआ। अब्दुल्ला राही ने पढ़ा- ‘जिसको अपने मिटने का कोई गम नहीं होता, जालिमों की ताकत से सर वो खम नहीं होता’ शमीम किरतपुरी ने कहा ‘वो छोटी उम्र में इस वास्ते रिक्शा चलाता है, कमाई करके खुद घर बार का खर्चा चलाता है’ जुहेर अहमद ने पढ़ा-‘इतने पत्थर मिजाज लोगों में, कितना मुश्किल है आइना होना।’
कमर अब्बास देहलवी ने कहा ‘इसका नहीं मिलाल किसी और के हुए’ नाजिर वहीद बिजनौरी ने कहा-‘पढने वाला भी तो करता है किसी के मनसूब, सारे किरदार कहानी के नहीं होते हैं’ इम्तियाज खान ने कहा ‘तू नहीं होगा मगर यह सिलसिला रह जाएगा, तेरे होने का तसव्वुर जा बजा रह जाएगा’ जकी अंकी ने पढ़ा- ‘अजीब शख्स है धागे से कील काटता है, वह अपने झूठ से मेरी दलील काटता है. वली वक्कास ने फरमाया-‘दिल के गम को शेर बनाकर जख्मों को नासूर किया, गजलों को बाजार में लाए यूं खुद को मशहूर किया’। डा. काशिफ अख्तर ने पढ़ा- ‘इसी ख्याल से देखा तेजी सेहली को, कि तेरे हिज्र में कब तक उदास बैठूंगा’ अब्दुरर्हमान सैफ ने कहा- ‘हमने सोचा दूर रहकर भूल जाएंगे तुम्हें, फासलों से इश्क लेकिन और गहरा हो गया’। कार्यक्रम में कमर अब्बास, इम्तियाज खान, नाजिर वहीद, शमीम किरतपुरी, जुहेर अहमद, अब्दुल्ला राही और जकी अंजुम को इरफाम सिद्दीकी एवार्ड देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर उसामा मलिक, हाफिज अशरफ, मुनव्वर सलीम, साइम उस्मानी, कमल देवबंदी, नजम उस्मानी, उजैर अनवर आदि मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। मोहल्ला बड़ी खानकाह में रविवार रात दिल्ली के शायरों के सम्मान में महफिल मुशायरा आयोजित किया गया। इसमें शायरों ने अपने मनपसंद कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
मुशायरे का आगाज जुहेर अहमद की नाते पाक से हुआ। अब्दुल्ला राही ने पढ़ा- ‘जिसको अपने मिटने का कोई गम नहीं होता, जालिमों की ताकत से सर वो खम नहीं होता’ शमीम किरतपुरी ने कहा ‘वो छोटी उम्र में इस वास्ते रिक्शा चलाता है, कमाई करके खुद घर बार का खर्चा चलाता है’ जुहेर अहमद ने पढ़ा-‘इतने पत्थर मिजाज लोगों में, कितना मुश्किल है आइना होना।’
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कमर अब्बास देहलवी ने कहा ‘इसका नहीं मिलाल किसी और के हुए’ नाजिर वहीद बिजनौरी ने कहा-‘पढने वाला भी तो करता है किसी के मनसूब, सारे किरदार कहानी के नहीं होते हैं’ इम्तियाज खान ने कहा ‘तू नहीं होगा मगर यह सिलसिला रह जाएगा, तेरे होने का तसव्वुर जा बजा रह जाएगा’ जकी अंकी ने पढ़ा- ‘अजीब शख्स है धागे से कील काटता है, वह अपने झूठ से मेरी दलील काटता है. वली वक्कास ने फरमाया-‘दिल के गम को शेर बनाकर जख्मों को नासूर किया, गजलों को बाजार में लाए यूं खुद को मशहूर किया’। डा. काशिफ अख्तर ने पढ़ा- ‘इसी ख्याल से देखा तेजी सेहली को, कि तेरे हिज्र में कब तक उदास बैठूंगा’ अब्दुरर्हमान सैफ ने कहा- ‘हमने सोचा दूर रहकर भूल जाएंगे तुम्हें, फासलों से इश्क लेकिन और गहरा हो गया’। कार्यक्रम में कमर अब्बास, इम्तियाज खान, नाजिर वहीद, शमीम किरतपुरी, जुहेर अहमद, अब्दुल्ला राही और जकी अंजुम को इरफाम सिद्दीकी एवार्ड देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर उसामा मलिक, हाफिज अशरफ, मुनव्वर सलीम, साइम उस्मानी, कमल देवबंदी, नजम उस्मानी, उजैर अनवर आदि मौजूद रहे।
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