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छत पर पैदा कर रहे और्गेनिक सब्जियां
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:23 AM IST
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घर की छत पर उगा रखे टमाटर, मेथी, बैंगन और सरसों
सहारनपुर। शुद्ध और स्वच्छ सब्जियां और वह भी मकान की छत पर। चौंकने की जरूरत नहीं है। अब लोगों ने अपने मकानों की छत पर ऑर्गेनिक खाद के जरिये सब्जियां उगानी शुरू कर दी है। ऐसा करने से छोटे परिवार को उसकी जरूरत के मुताबिक ताजा, स्वच्छ और बगैर कीटनाशक वाली सब्जियां मिल रही हैं।
शहर के मोहल्ला पंतनगर निवासी प्रदीप कुमार मूलरूप से गांव दीवालहेड़ी के निवासी हैं। उनकी पत्नी सीमा शहर के मुन्नालाल डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर हैं। प्रोफेसर सीमा और प्रदीप कुमार ने बताया कि मकान की छत पर ऑर्गेनिक सब्जियाें की खेती कर रहे हैं। फिलहाल उन्होंने टमाटर, मेथी, बैंगन और सरसों उगा रखी हैं। जबकि इससे पहले उन्होंने तोरी, लोकी, कद्दू और मूली उगाई थी।
मुन्ना लाल डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर डॉक्टर पंकज छाबड़ा कॉलेज परिसर में ही आवासीय कालोनी में रहते हैं। वह भी मकान की छत पर सब्जियां उगा रहे हैं। उनका कहना है कि सब्जियां उगाने की इस विधि में बहुत ज्यादा खर्चा नहीं है। रसोई में जो सामान बेकार हो जाता है, उसी से ऑर्गेनिक खाद तैयार हो जाती है। क्यारीनुमा प्लेटफार्म बनाकर ही उसमें सब्जियां उगाई जा सकती हैं, जो दैनिक इस्तेमाल में आती हैं।
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कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग से होने वाली बीमारियों को देखते हुए जागरूक लोगों का रुख ऑर्गेनिक खेती की तरफ होने लगा है। इसके लिए कई किसानों ने गेहूं, धान सहित अन्य फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग बंद कर ऑर्गेनिक खेती शुरू कर दी है। ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए किसानों को बाजार में अच्छे भाव भी मिल रहे हैं। लेकिन सब्जियों की ऑर्गेनिक खेती की ओर अभी तक किसानों का ध्यान नहीं गया है।
ऐसे की छत पर ऑर्गेनिक सब्जियों की खेती
प्रदीप कुमार और डॉक्टर सीमा ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले प्लेटफॉर्म बनवाया और उसमें कम्पोस्ट, पत्तियों से बनी खाद और थोड़ा सा रेत मिलाकर करीब एक फुट डाल दिया। खास बात यह है कि कम्पोस्ट खाद, किचन वेस्ट और पत्तियों के खाद को मिलाकर बनाया गया है। इस कम्पोस्ट में सब्जियों की बिजाई कर दी जाती है। जिसमें हल्की सिंचाई प्रतिदिन करनी होती है। उन्होंने सितंबर में टमाटर के बीज को क्यारी में लगाया था, जिससे नवंबर के पहले सप्ताह से टमाटर मिलना शुरू हो गया था। एक पौधे से 150 से 200 टमाटर एक सीजन में उन्हें मिल जाते हैं। उसी समय गमले में लगाए गए बैंगन के पौधे पर भी फल आना शुरू हो गया है। जबकि सरसों और मेथी भी उन्हें मिल रही है।
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सहारनपुर। शुद्ध और स्वच्छ सब्जियां और वह भी मकान की छत पर। चौंकने की जरूरत नहीं है। अब लोगों ने अपने मकानों की छत पर ऑर्गेनिक खाद के जरिये सब्जियां उगानी शुरू कर दी है। ऐसा करने से छोटे परिवार को उसकी जरूरत के मुताबिक ताजा, स्वच्छ और बगैर कीटनाशक वाली सब्जियां मिल रही हैं।
शहर के मोहल्ला पंतनगर निवासी प्रदीप कुमार मूलरूप से गांव दीवालहेड़ी के निवासी हैं। उनकी पत्नी सीमा शहर के मुन्नालाल डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर हैं। प्रोफेसर सीमा और प्रदीप कुमार ने बताया कि मकान की छत पर ऑर्गेनिक सब्जियाें की खेती कर रहे हैं। फिलहाल उन्होंने टमाटर, मेथी, बैंगन और सरसों उगा रखी हैं। जबकि इससे पहले उन्होंने तोरी, लोकी, कद्दू और मूली उगाई थी।
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मुन्ना लाल डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर डॉक्टर पंकज छाबड़ा कॉलेज परिसर में ही आवासीय कालोनी में रहते हैं। वह भी मकान की छत पर सब्जियां उगा रहे हैं। उनका कहना है कि सब्जियां उगाने की इस विधि में बहुत ज्यादा खर्चा नहीं है। रसोई में जो सामान बेकार हो जाता है, उसी से ऑर्गेनिक खाद तैयार हो जाती है। क्यारीनुमा प्लेटफार्म बनाकर ही उसमें सब्जियां उगाई जा सकती हैं, जो दैनिक इस्तेमाल में आती हैं।
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कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग से होने वाली बीमारियों को देखते हुए जागरूक लोगों का रुख ऑर्गेनिक खेती की तरफ होने लगा है। इसके लिए कई किसानों ने गेहूं, धान सहित अन्य फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग बंद कर ऑर्गेनिक खेती शुरू कर दी है। ऑर्गेनिक उत्पादों के लिए किसानों को बाजार में अच्छे भाव भी मिल रहे हैं। लेकिन सब्जियों की ऑर्गेनिक खेती की ओर अभी तक किसानों का ध्यान नहीं गया है।
ऐसे की छत पर ऑर्गेनिक सब्जियों की खेती
प्रदीप कुमार और डॉक्टर सीमा ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले प्लेटफॉर्म बनवाया और उसमें कम्पोस्ट, पत्तियों से बनी खाद और थोड़ा सा रेत मिलाकर करीब एक फुट डाल दिया। खास बात यह है कि कम्पोस्ट खाद, किचन वेस्ट और पत्तियों के खाद को मिलाकर बनाया गया है। इस कम्पोस्ट में सब्जियों की बिजाई कर दी जाती है। जिसमें हल्की सिंचाई प्रतिदिन करनी होती है। उन्होंने सितंबर में टमाटर के बीज को क्यारी में लगाया था, जिससे नवंबर के पहले सप्ताह से टमाटर मिलना शुरू हो गया था। एक पौधे से 150 से 200 टमाटर एक सीजन में उन्हें मिल जाते हैं। उसी समय गमले में लगाए गए बैंगन के पौधे पर भी फल आना शुरू हो गया है। जबकि सरसों और मेथी भी उन्हें मिल रही है।