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हवा-हवाई निकले शहर को अतिक्रमण मुक्त कराने के दावे
Updated Tue, 17 Apr 2018 12:24 AM IST
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सहारनपुर। 50 साल पुराने रिकार्ड के आधार पर शहर की सड़कों से अतिक्रमण हटाने के महापौर और नगरायुक्त के दावे अभी तक फेल साबित हुए हैं। इतना ही नहीं, डीएम के निर्देश पर नगर निगम द्वारा पिछले दिनों शुरू किया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान भी दो दिन चलाकर बंद कर दिया गया। अधिकारियों के लापरवाही भरे रवैये की वजह से सड़कों पर भारी अतिक्रमण है, जिसका खामियाजा शहर की आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। नगर निगम और प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली स्मार्ट सिटी पर पलीता लगा रही है।
अतिक्रमण शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। अंबाला हाइवे पर निर्माण के बाद दोनों ओर करीब 40 से 50 फुट तक जगह छोड़ी हुई है। इसका लाभ स्थानीय दुकानदार ले रहे हैं, जो दुकानों का सामान सड़क पर 20 से 30 फुट तक निकालकर रखते हैं। नगर निगम या प्रशासन ने आज तक इस मार्ग से अतिक्रमण हटाने में गंभीरता नहीं दिखाई है। घंटाघर से देहरादून रोड पर भी यही स्थिति है। पुल जोगियान से चकराता रोड पर कुष्ट आश्रम तक भारी अतिक्रमण है। सैकड़ों की संख्या में दुकानें सड़क पर चल रही हैं। डीआईओएस कार्यालय के बाहर नाले की पटरी पर पक्की दुकानें बना ली गई हैं। नवाब गंज से आगे निजी बसों का संचालन सड़क से हो रहा है। इसकी आड़ में लोग सड़क का इस्तेमाल अपने व्यावसायिक कार्यों के लिए कर रहे हैं। बेहट बस अड्डा पूरी तरह अतिक्रमण की जद में है। यहां दुकानदार दुकानों के बाहर रेहड़ियां लगवाकर उनसे प्रतिदिन पैसा वसूलते हैं। भारी अतिक्रमण की वजह से सड़क संकरी रहती है। इसकी वजह से यहां सड़क हादसों में कई लोगों की जान तक चली गई है। यही हालत कोर्ट रोड, दिल्ली रोड, चिलकाना रोड की भी है। स्मार्ट सिटी में चयन के बाद महापौर संजीव वालिया और नगरायुक्त गौरव मिश्रा ने शहर को अतिक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए बड़े बड़े दावे किए थे। मुख्यमंत्री के आदेश का हवाला देते हुए महापौर ने व्यापारियों की बैठक में साफ किया था की शहर से 50 साल पुराने रिकार्ड के आधार पर अतिक्रमण हटाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि लेखपाल शहर की सड़कों की पैमाइश करेंगे। व्यापारियों को थोड़े बहुत नुकसान के लिए तैयार रहना होगा। मगर बैठक के बाद कुछ नहीं हुआ। आलम यह है कि अतिक्रमण लगातार सड़कों को खत्म कर रहा है। इसकी वजह से राहगीरों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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होटल और हॉस्पिटल में नहीं पार्किंग
शहर के ज्यादातर होटलों और निजी अस्पतालों के पास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। घंटा घर और अंबाला रोड पर कई होटल ऐसे हैं, जो वर्षों से सड़क का इस्तेमाल पार्किंग के रूप में करते आ रहे हैं। इनकी वजह से वाहनों को निकलने में परेशानी रहती है। यही स्थिति निजी अस्पताल की भी है। लिंक रोड के साथ ही बाजोरिया रोड पर ज्यादातर हॉस्पिटल ने सड़कों पर पार्किंग बनाई हुई हैं। इसकी वजह से इस मार्ग पर दिन भर जाम रहता है। पास में ही जिला अस्पताल होने की वजह से कई बार एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहती है।
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ट्रांसफार्मर और पुलिस चौकियां भी बनी रोड़ा
विद्युत ट्रांसफार्मर और पुलिस चौकियां भी अतिक्रमण की बड़ी वजह हैं। विद्युत निगम ने ज्यादातर ट्रांसफार्मर सड़कों पर रखे हुए हैं। इनकी आड़ में कई रेहड़ी वाले और अन्य लोग सड़क पर अपनी दुकानें चला रहे हैं। ट्रांसफार्मर को सड़कों से हटाकर अलग रखने के लिए विद्युत निगम के पास शासन से पैसा भी आ चुका है। इसके बावजूद विद्युत निगम इस कार्य में गति नहीं ला रहा है। यही स्थिति पुलिस चौकियों और थानों की है। ज्यादातर पुलिस चौकियां और थाने सड़क पर बने हैं। जिनको हटाने की हिम्मत प्रशासन आज तक नहीं कर सका है।
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शहर की सड़कों से अतिक्रमण हटाने को लेकर हम पूरी तरह गंभीर हैं। इस दिशा में काम चल रहा है। एकदम से सख्ती नहीं की जा सकती। हम व्यापारियों और शहर के गण्यमान्य लोगों को साथ जोड़ रहे हैं, जिससे अतिक्रमण हटाने में कोई बाधा न आए।
- संजीव वालिया, महापौर।
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अतिक्रमण शहर की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। अंबाला हाइवे पर निर्माण के बाद दोनों ओर करीब 40 से 50 फुट तक जगह छोड़ी हुई है। इसका लाभ स्थानीय दुकानदार ले रहे हैं, जो दुकानों का सामान सड़क पर 20 से 30 फुट तक निकालकर रखते हैं। नगर निगम या प्रशासन ने आज तक इस मार्ग से अतिक्रमण हटाने में गंभीरता नहीं दिखाई है। घंटाघर से देहरादून रोड पर भी यही स्थिति है। पुल जोगियान से चकराता रोड पर कुष्ट आश्रम तक भारी अतिक्रमण है। सैकड़ों की संख्या में दुकानें सड़क पर चल रही हैं। डीआईओएस कार्यालय के बाहर नाले की पटरी पर पक्की दुकानें बना ली गई हैं। नवाब गंज से आगे निजी बसों का संचालन सड़क से हो रहा है। इसकी आड़ में लोग सड़क का इस्तेमाल अपने व्यावसायिक कार्यों के लिए कर रहे हैं। बेहट बस अड्डा पूरी तरह अतिक्रमण की जद में है। यहां दुकानदार दुकानों के बाहर रेहड़ियां लगवाकर उनसे प्रतिदिन पैसा वसूलते हैं। भारी अतिक्रमण की वजह से सड़क संकरी रहती है। इसकी वजह से यहां सड़क हादसों में कई लोगों की जान तक चली गई है। यही हालत कोर्ट रोड, दिल्ली रोड, चिलकाना रोड की भी है। स्मार्ट सिटी में चयन के बाद महापौर संजीव वालिया और नगरायुक्त गौरव मिश्रा ने शहर को अतिक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए बड़े बड़े दावे किए थे। मुख्यमंत्री के आदेश का हवाला देते हुए महापौर ने व्यापारियों की बैठक में साफ किया था की शहर से 50 साल पुराने रिकार्ड के आधार पर अतिक्रमण हटाया जाएगा। उन्होंने कहा था कि लेखपाल शहर की सड़कों की पैमाइश करेंगे। व्यापारियों को थोड़े बहुत नुकसान के लिए तैयार रहना होगा। मगर बैठक के बाद कुछ नहीं हुआ। आलम यह है कि अतिक्रमण लगातार सड़कों को खत्म कर रहा है। इसकी वजह से राहगीरों को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है।
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होटल और हॉस्पिटल में नहीं पार्किंग
शहर के ज्यादातर होटलों और निजी अस्पतालों के पास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। घंटा घर और अंबाला रोड पर कई होटल ऐसे हैं, जो वर्षों से सड़क का इस्तेमाल पार्किंग के रूप में करते आ रहे हैं। इनकी वजह से वाहनों को निकलने में परेशानी रहती है। यही स्थिति निजी अस्पताल की भी है। लिंक रोड के साथ ही बाजोरिया रोड पर ज्यादातर हॉस्पिटल ने सड़कों पर पार्किंग बनाई हुई हैं। इसकी वजह से इस मार्ग पर दिन भर जाम रहता है। पास में ही जिला अस्पताल होने की वजह से कई बार एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहती है।
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ट्रांसफार्मर और पुलिस चौकियां भी बनी रोड़ा
विद्युत ट्रांसफार्मर और पुलिस चौकियां भी अतिक्रमण की बड़ी वजह हैं। विद्युत निगम ने ज्यादातर ट्रांसफार्मर सड़कों पर रखे हुए हैं। इनकी आड़ में कई रेहड़ी वाले और अन्य लोग सड़क पर अपनी दुकानें चला रहे हैं। ट्रांसफार्मर को सड़कों से हटाकर अलग रखने के लिए विद्युत निगम के पास शासन से पैसा भी आ चुका है। इसके बावजूद विद्युत निगम इस कार्य में गति नहीं ला रहा है। यही स्थिति पुलिस चौकियों और थानों की है। ज्यादातर पुलिस चौकियां और थाने सड़क पर बने हैं। जिनको हटाने की हिम्मत प्रशासन आज तक नहीं कर सका है।
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शहर की सड़कों से अतिक्रमण हटाने को लेकर हम पूरी तरह गंभीर हैं। इस दिशा में काम चल रहा है। एकदम से सख्ती नहीं की जा सकती। हम व्यापारियों और शहर के गण्यमान्य लोगों को साथ जोड़ रहे हैं, जिससे अतिक्रमण हटाने में कोई बाधा न आए।
- संजीव वालिया, महापौर।