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भीम आर्मी से मिलकर प्रदेश में बड़े आंदोलन की तैयारी
Updated Fri, 12 Jan 2018 12:18 AM IST
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सहारनपुर। भीम आर्मी के चीफ एवं सहारनपुर हिंसा के आरोपी चंद्रशेखर उर्फ रावण से मिलने के लिए जिग्नेश मेवाणी का सहारनपुर की जिला कारागार में पहुंचना दलित राजनीति को गर्माने की तैयारी माना जा रहा है। जिग्नेश देश भर के दलित नेताओं को एकजुट करने की कवायद कर रहे हैं और भीम आर्मी को माध्यम बनाकर प्रदेश में बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
गुजरात के बड़गाम विधानसभा क्षेत्र से विधायक जिग्नेश ने दलितों के मुद्दों को उठाना शुरू किया, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में दस्तक देने के लिए उन्हें सहारनपुर हिंसा का सहारा मिल गया। भीमा कोरेगांव में सहारनपुर हिंसा एवं भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण की गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर युवा हुंकार रैली दिल्ली में करने का एलान किया। दिल्ली में 9 जनवरी को हुई युवा हुंकार रैली से ही उन्होंने दलित नेताओं को एकजुट करने की कवायद शुरू कर दी। मंगलवार की शाम को रैली खत्म करने के बाद बुधवार की सुबह ही अपने साथ असम एवं हरियाणा समेत कुछ अन्य राज्यों के दलित नेताओं को लेकर सहारनपुर में चंद्रशेखर से मिलने के लिए पहुंचना दलित आंदोलन की तैयारी का संकेत भी माना जा रहा है। यूपी के दलित नेताओं से संपर्क साधा जा रहा है। सिर्फ यूपी ही नहीं पंजाब और उत्तराखंड के दलित नेताओं से भी संपर्क स्थापित कर उन्हें भी अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। भीम आर्मी के पदाधिकारियों का कहना है कि रासुका में निरुद्ध चंद्रशेखर उर्फ रावण को जेल से रिहा कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे भीम आर्मी के कार्यों एवं आंदोलन को गति मिल सके। जिग्नेश मेवाणी फिर से सहारनपुर आएंगे और इस बार चंद्रशेखर से मिलकर दलितों के मुद्दों को उठाने पर चर्चा करेंगे।
--। प्रदेश में दलित राजनीति की धुरी हैं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती
प्रदेश में अभी तक दलित राजनीति की धुरी बसपा सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ही रहीं हैं। उन्होंने सहारनपुर से ही जीत की शुरुआत कर प्रदेश की राजनीति में चरम पर पहुंचीं थीं। अब जिग्नेश भी सहारनपुर के जरिए प्रदेश की दलित राजनीति को गर्माकर प्रदेश में अपनी राजनीतिक दस्तक देने की तैयारी कर रहे हैं।
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गुजरात के बड़गाम विधानसभा क्षेत्र से विधायक जिग्नेश ने दलितों के मुद्दों को उठाना शुरू किया, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में दस्तक देने के लिए उन्हें सहारनपुर हिंसा का सहारा मिल गया। भीमा कोरेगांव में सहारनपुर हिंसा एवं भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण की गिरफ्तारी के मुद्दे को लेकर युवा हुंकार रैली दिल्ली में करने का एलान किया। दिल्ली में 9 जनवरी को हुई युवा हुंकार रैली से ही उन्होंने दलित नेताओं को एकजुट करने की कवायद शुरू कर दी। मंगलवार की शाम को रैली खत्म करने के बाद बुधवार की सुबह ही अपने साथ असम एवं हरियाणा समेत कुछ अन्य राज्यों के दलित नेताओं को लेकर सहारनपुर में चंद्रशेखर से मिलने के लिए पहुंचना दलित आंदोलन की तैयारी का संकेत भी माना जा रहा है। यूपी के दलित नेताओं से संपर्क साधा जा रहा है। सिर्फ यूपी ही नहीं पंजाब और उत्तराखंड के दलित नेताओं से भी संपर्क स्थापित कर उन्हें भी अपने साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। भीम आर्मी के पदाधिकारियों का कहना है कि रासुका में निरुद्ध चंद्रशेखर उर्फ रावण को जेल से रिहा कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे भीम आर्मी के कार्यों एवं आंदोलन को गति मिल सके। जिग्नेश मेवाणी फिर से सहारनपुर आएंगे और इस बार चंद्रशेखर से मिलकर दलितों के मुद्दों को उठाने पर चर्चा करेंगे।
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--। प्रदेश में दलित राजनीति की धुरी हैं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती
प्रदेश में अभी तक दलित राजनीति की धुरी बसपा सुप्रीमो एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ही रहीं हैं। उन्होंने सहारनपुर से ही जीत की शुरुआत कर प्रदेश की राजनीति में चरम पर पहुंचीं थीं। अब जिग्नेश भी सहारनपुर के जरिए प्रदेश की दलित राजनीति को गर्माकर प्रदेश में अपनी राजनीतिक दस्तक देने की तैयारी कर रहे हैं।
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