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उस्ताद-ए-हदीस मौलाना असलम की सेवाओं को याद किया गया
Updated Wed, 15 Nov 2017 12:15 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। उस्ताद-ए-हदीस मौलाना असलम कासमी के इंतकाल पर दारुल उलूम वक्फ में शोकसभा का आयोजन किया गया। जिसमें उनके लिए दुआए मगफिरत की गई। साथ ही उनके बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया गया।
मंगलवार को दारुल उलूम वक्फ में आयोजित शोकसभा में संस्था के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने कहा कि मौलाना असलम कासमी की दीनी सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके इंतकाल से जो क्षति हुई है उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने कहा कि कासमी खानदान ने हमेशा अपनी अलग पहचान बनाकर रखी है उसमें खास बात यह है कि उस खानदान में हमेशा से सादा मिजाज रही है और मौलाना असलम कासमी ने अपनी जिंदगी में इस खानदानी पहचान को बरकरार रखा। मौलाना असलम कासमी के बेटे व दारुल उलूम वक्फ के उस्ताद मौलाना मोहम्मद फारुक कासमी ने कहा कि उनके पिता पिछले लंबे समय तक बीमार रहे, लेकिन कभी उनकी जुबान पर शिकायत का एक लफ्ज नहीं आया। आखिरी समय तक उन्होंने सब्र से काम लिया और अल्लाह का शुक्र अदा करते रहे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. उबैद इकबाल आसिम, मौलाना इस्लाम कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने भी विचार रखे। शोकसभा में मौलाना असलम के लिए दुआए मगफिरत की गई। शोकसभा में सैकड़ों मदरसा छात्र मौजूद रहे। वहीं, श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने भी मौलाना असलम कासमी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूर्णीय क्षति बताया। साथ ही उन्होंने दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
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मंगलवार को दारुल उलूम वक्फ में आयोजित शोकसभा में संस्था के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी ने कहा कि मौलाना असलम कासमी की दीनी सेवाओं को हमेशा याद रखा जाएगा। उनके इंतकाल से जो क्षति हुई है उसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी ने कहा कि कासमी खानदान ने हमेशा अपनी अलग पहचान बनाकर रखी है उसमें खास बात यह है कि उस खानदान में हमेशा से सादा मिजाज रही है और मौलाना असलम कासमी ने अपनी जिंदगी में इस खानदानी पहचान को बरकरार रखा। मौलाना असलम कासमी के बेटे व दारुल उलूम वक्फ के उस्ताद मौलाना मोहम्मद फारुक कासमी ने कहा कि उनके पिता पिछले लंबे समय तक बीमार रहे, लेकिन कभी उनकी जुबान पर शिकायत का एक लफ्ज नहीं आया। आखिरी समय तक उन्होंने सब्र से काम लिया और अल्लाह का शुक्र अदा करते रहे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डा. उबैद इकबाल आसिम, मौलाना इस्लाम कासमी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने भी विचार रखे। शोकसभा में मौलाना असलम के लिए दुआए मगफिरत की गई। शोकसभा में सैकड़ों मदरसा छात्र मौजूद रहे। वहीं, श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने भी मौलाना असलम कासमी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे अपूर्णीय क्षति बताया। साथ ही उन्होंने दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
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